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Hydroponic Farming: किसानों के लिये बड़ी खुशखबरी, इन 4 फलों को उगाने के लिये खेत-मिट्टी की जरूरत नहीं, यहां जानें कैसे

Fruit Cultivation Technique: इस तकनीक से खेती करने पर पानी के कम खर्च में ही पौधों को बढ़ाया जाता है, जरूरी पोषक तत्व भी पानी के जरिये सीधा जड़ों तक पहुंचाये जाते हैं.

Fruit Cultivation from Hydroponics Technique: भारत ने पिछले कुछ वर्षों में बागवानी क्षेत्र (Horticulture) में काफी विकास-विस्तार किया है. अब बागवानी फसलों की खेती करने वाले किसान पुराने तरीकों की बजाये कम जोखिम वाले खेती के नये तरीके अपना रहे हैं. इन्हीं खास तरीकों में शामिल है बिना मिट्टी के खेती यानी हाइड्रोपॉनिक्स फार्मिंग (Hydroponics Farming), जो कम जमीन वाले किसानों या शहरी क्षेत्रों में खेती करने का सर्वोत्तम तरीका है. बता दें कि हाइड्रोपोनिक्स (Hydroponic) पर्यावरण के अनुकूल तो है ही, साथ इसमें कीड़े, बीमारियां और खरपतवार जैसे जोखिमों की संभावना भी नहीं होती.  

क्या है हाइड्रोपॉनिक्स(What if Hydroponics)
हाइड्रोपॉनिक्स खेती में बिना खाद-मिट्टी (Soil Free Farming) के सब्जियों की खेती की जाती है. 

  • कम जगह को घेरने वाली हाइड्रोपॉनिक ढांचे को चार दिवारी के अंदर भी लगा सकते हैं. 
  • इसके जरिये खेती करने पर पानी का खर्चा तो कम होता ही है, साथ ही पौधों को जरूरी पोषक तत्व सीधा पानी के जरिये पहुंचाये जाते हैं, जिससे उर्वरकों की बर्बादी नहीं होती. 
  • बढ़ती आबादी और शहरों की बदलती मांग के लिहाज से हाइड्रोपॉनिक खेती किसी  वरदान से कम नहीं है.
  • ये तकनीक पर्यावरण के अनुकूल तो है ही, साथ खेती के खर्चों को कम करने में सहायक है.
  • खेती की इस खास विधि के जरिये कम समय में अच्छी क्वालिटी की अधिक पैदावार भी ले सकते हैं.
  • कई देशों में हाइड्रोपॉनिक्स तकनीक के जरिये सिर्फ सब्जी नहीं बल्कि धान और गेहूं की खेती भी की जा रही है.
  • नासा ने हाइड्रोपॉनिक्स खेती को खेती का भविष्य (Future of Farming) का नाम दिया है.
  • अभी तक हाइड्रोपॉनिक्स विधि के जरिये सिर्फ सब्जियों की खेती की जाती थी, लेकिन कुछ फल ऐसे भी हैं, जो इस तकनीक से किसानों को मालामाल बना सकते हैं.


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स्ट्रॉबेरी (Strawberry Cultivation in Hydroponics)
पहले स्ट्रॉबेरी की खेती के लिये किसानों को सर्दियों का इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब किसान चाहें तो किसी भी मौसम में स्ट्रॉबेरी की खेती कर सकते हैं.

  • हाइड्रोपॉनिक तकनीके के जरिये स्ट्रॉबेरी की खेती समय संरक्षित ढांचे या कमरे का तापमान नियंत्रित करना होता है.
  • इस तकनीक से उगाई गई स्ट्रॉबेरी न सिर्फ आकार में बड़ी होती हैं, बल्कि आम स्ट्रॉबेरी के मुकाबले ज्यादा रसीली भी होती है.
  • हाइ़ड्रोपॉनिक्स विधि से स्ट्रॉबेरी की व्यावसायिक खेती करने पर किसानों को अधिक लाभ मिल सकता है.

जामुन (Berries Cultivation in Hydroponics)
स्ट्रॉबेरी के अलावा छोटे फलों की कई किस्में ऐसी भी हैं, जो हाइड्रोपॉनिक्स के जरिये अच्छा उत्पादन दे सकती है, इनमें जामुन, ब्लू बैरीज़, रास्पबेरी, क्रैनबेरी आदि शामिल हैं.

  • सिर्फ गांव में ही नहीं, शहरों में टेरिस पर हाइड्रोपॉनिक गार्डन बनाकर जामुन जैसी बेरीज़ उगाई जा सकती हैं.
  • इसके लिये फर्श के ऊपर ही ऊंचे सिस्टम बनाये जा सकते हैं, जिससे जामुन के तनों की छंटाई में भी आसानी रहेगी.
  • इस तकनीक में सीधा पौधों की जड़ों को पानी और पोषक तत्व पहुंचाये जाते हैं, जिससे फलों की अच्छी उपज मिल जाती है.

अंगूर (Grapes Cultivation in Hydroponics)
अंगूर एक बेलदार पौधा है, जिसकी खेती बड़े आराम से हाइड्रोपॉनिक्स ढांचे में की जा सकती हैं. 

  • इस तरह अंगूर की हर किस्म का आनंद लेने के लिये मौसम की सीमा नहीं रहेगी, ब्लकि फल भी आम तकनीक से ज्यादा स्वादिष्ट मिलेंगे.
  • खासकर वाइन अंगूर की खेती के लिये हाइड्रोपॉनिक्स तकनीक का प्रयोग करना मुनाफे का सौदा साबित हो सकता हैं.
  • हाइड्रोपॉनिक्स खेती का सेट अप बनाकर अंगूर की लताओं टिकाने के लिये तार या जालियों  का ढांचा तैयार करना होता है.
  • इस तरह हाइड्रोपॉनिक्स के साथ अंगूर की स्टेकिंग करने पर फल में सड़न-गलन की संभावना नहीं रहती और फलों का वजन भी सही रहा है.
  • इस विधि के जरिये  भी अंगूर के पौधों की जड़ में पानी और पोषक तत्व दिये जाते हैं. पौधों के जरिये लताओं तक नमी पहुंचाने पर लगातर अंगूर का उत्पादन ले सकते हैं. 

तरबूज (Watermelon Cultivation in Hydroponics)
गर्मी हो या सर्दी, हर मौसम में तरबूज का उत्पादन लेने के लिये हाइड्रोपॉनिक गार्डन (Hydroponic Garden) में इसकी खेती कर सकते हैं.

  • बेशक तरबूज (Watermelon Cultivation)थोड़े भारी होते हैं, लेकिन हाइड्रोपॉनिक्स का सही सेटअप लगाने खेती करने से ये साधारण तकनीक से अच्छा उत्पादन  दे सकते हैं.
  • हाइड्रोपोनिक में तरबूज उगाने के लिये विकास का माध्यम तलाशना बेहद जरूरी है, ऐसी स्थिति में शुरुआत में मिट्टी के कंकड़ और नारियल कॉयर का इस्तेमाल कर सकते हैं.
  • इस तकनीक में पानी का ज्यादा खर्च नहीं होता, बल्कि तरबूज उगाने में प्रयोग होने वाली पानी को रिसाइकल भी कर सकते हैं.
  • तरबूज के पौधों को स्वादिष्ट और सही वजन देने के लिये पानी के जरिये पोषक तत्वों का आपूर्ति की जाती है.


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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और जानकारियों पर आधारित है. ABPLive.com किसी भी तरह की जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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