Paddy Cultivation: 2600 साल पुराना है काला नमक धान, कभी विलुप्त होने की कगार पर था, अब इस स्टेट में 70 हजार एकड़ का रकबा हो गया
भगवान बुद्ध से कालानमक धान का इतिहास जुड़ा है. उत्तर प्रदेश में धान की यह प्रजाति खत्म होने के कगार पर पहुंच गई. अब यहां रकबा 70 हजार एकड़ तक पहुंच गया है

Paddy Management: रबी सीजन चल रहा है. खरीफ की फसल कटकर मंडी पहुंच चुकी है. धान खरीफ की प्रमुख फसलों में से एक है. धान का इतिहास भी हजारों साल पुराना है. काला नमक धान भी ऐसी ही प्रजातियों में से एक है. इसका इतिहास करीब 2600 साल पुराना माना जाता है. धान की यही प्राचीन प्रजाति अब विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई हैं. इसको रिजर्व करने का बीड़ा अब उत्तर प्रदेश गवर्नमेंट ने उठाया है. प्रदेश में इसका रकबा भी तेजी से बढ़ने लगा है.
70 हजार एकड़ क्षेत्र में बोया गया काला नमक धान
काला नमक धान One District One Product(ODOP) योजना के तहत सिद्धार्थनगर का उत्पाद घोषित है. इस फसल को जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग भी मिला है. इसके बाद से ही काला नमक धान बोने को लेकर किसानों में दिलचस्पी बढ़ी है. स्टेट गवर्नमेंट के प्रयास से प्रजाति का रकबा प्रदेश में अब 70 हजार एकड़ तक पहुंच गया है.
राजभवन में आधा एकड़ में बोया गया
उत्तर प्रदेश की कैपिटल लखनऊ के राजभवन में भी काला नमक धान बोया गया है. यहां आधे एकड़ रकबे में धान की फसल बोई गई थी, जोकि अब पककर पूरी तरह से तैयार हो चुकी है. खास बात यह है कि राजभवन में धान को ऑर्गेनिक तरीके से तैयार किया गया है. सिद्धार्थनगर के अलावा महाराजगंज, गोरखपुर, संतकबीरनगर, बलरामपुर, बहराइच, बस्ती, कुशीनगर, गोंडा, बाराबंकी, देवरिया व गोंडा आदि जिलों में भी बुवाई होती है. इसकी वजह यह है कि इन जिलों का एनवायरमेंट काला नमक धान के अनुकूल है.
कभी 2200 हेक्टेयर रह गया था धान का रकबा
काला नमक धान को लेकर सरकारी प्रयास न होने और किसानों के मुंह मोड़ने के कारण इसका क्षेत्रफल तेजी से घटने लगा था. कुछ साल पहले इसका रकबा महज 2200 एकड़ तक सिमट गया था. वर्ष 2018 में ओडीओपी योजना के तहत सिद्धार्थनगर की पहचान के तौर पर घोषित किया गया. शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने इसे बढ़ाने की कवायद की और अब वही प्रयास रंग ला रहे हैं.
इतना पोषक है काला नमक धान
काला नमक धान के बारे में एक्सपर्ट का कहना है कि यह पोषक तत्वों से भरपूर है. इसमें प्रोटीन, जिंक, आयरन, बीटा कैरोटीन पाया जाता है. बीटा कैरोटीन Vitamin A का मूल तत्व है. 100 ग्राम चावल में 42 मिलीग्राम बीटा कैरोटीन मिलता है. इसकी खुशबू बेहद जानदार है और टेस्टी भी है. चावल की अन्य प्रजातियों के मुकाबले प्रोटीन, आयरन, जिंक बेहद अधिक पाए जाते हैं.
ई-कामर्स प्लेटफार्म पर भी मौजूद
स्टेट गवर्नमेंट पोडेक्ट को बढ़ावा देने के लिए डिजीटल विंग पर भी ध्यान दे रही है. काला नमक धान ई-कामर्स प्लेटफार्म पर भी मौजूद है. इसका एक्सपोर्ट भी तेजी से बढ़ा है. स्टेट गवर्नमेंट ने मार्च 2021 में कपिलवस्तु महोत्सव के साथ ही काला नमक महोत्सव मनाया था.
ये है कालानमक धान का इतिहास
ऐसी मान्यता है कि करीब 2600 साल पुराना काला नमक धान का इतिहास है. काला नमक धान की खेती भगवान बुद्ध के समय में भी की जाती थी. कहा जाता है कि भगवान बुद्ध ने कपिलवस्तु की तराई में अपने शिष्यों को यह चावल सौंप दिया था और कहा कि कि इसकी खुशबू व गुणवत्ता उनकी याद दिलाएगी. इसी वजह से काला नमक धान को कुछ लोग बुद्ध का प्रसाद भी मानते हैं.
Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. किसान भाई, किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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