Kundli, Shri Krishna, Janmashtami 2022: भगवान श्रीकृष्ण के जन्म को लेकर शास्त्रों में विशेष वर्णन मिलता है. भागवत पुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में रात्रि 12 बजे हुआ था. भगवान श्रीकृष्ण की कुंडली वृषभ लग्न की है.


श्रीकृष्ण की जन्म कुंडली
माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण की कुंडली वृषभ लग्न थी, जिसमें उच्च का चंद्रमा विराजमान था. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अष्टमी की तिथि का चंद्रमा पूर्ण बली होता है. चंद्रमा की 16 कलाएं होती हैं. रोहिणी नक्षत्र को चंद्रमा की पत्नी माना गया है. इस नक्षत्र में चंद्रमा अति प्रसन्न रहता है. वहीं वृषभ राशि में चंद्रमा को उच्च का हो जाता है. इनसब शुभ संयोगों के कारण भगवान श्रीकृष्ण चंद्रवंश का प्रतिनिधित्व करने में सफल रहे और षोडशकला अवतार कहलाए.


शनि देव कुंडली के छठे भाव में विराजमान थे
भगवान श्रीकृष्ण की कुंडली में शनि छठे भाव में गोचर कर रहे थे. जहां पर तुला राशि थी. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तुला राशि शनि की प्रिय राशि है, क्योंकि शनि यहां पर आकर उच्च के हो जाते हैं.


कुंडली में मौजूद थे से पांच महायोग
भगवान श्रीकृष्ण की कुंडली में रूचक योग, भद्र योग, हंस योग, मालव्य योग और शश योग बने थे.


रूचक योग- कुंडली में यह योग मौजूद हो तो व्यक्ति साहसी और पराक्रमी होता है. ऐसे लोग तत्काल सही निर्णय लेने में निपुण होते हैं. ऐसे लोगों में प्रशासनिक कुशलता पाई जाती है.


भद्र योग- कुंडली में मौजूद यह योग व्यक्ति को बुद्धिमान, चतुर और मीठी वाणी वाला बनाता है. ऐसे लोग अच्छे सलाह देने वाले भी होते हैं.


हंस योग- कुंडली में ये योग हो तो व्यक्ति को सभी प्रकार के सुख प्राप्त करता है., ज्ञान, अध्यात्म का जानकार होता है.


मालव्य योग- कुंडली में यह योग हो तो सौंदर्य कला का प्रेमी होती है. कलात्मक होता है.


शश योग- कुंडली में जब ये योग बनता है तो व्यक्ति न्यायप्रिय, कूटनीति का माहिर, लंबी आयु होती है. ऐसे व्यक्ति धैर्यवान भी होते हैं.


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