Shani Gochar 2023: कुंभ में शनि गोचर, साल 2023 से 34 के बीच हो सकता है तीसरा विश्व युद्ध! जानें भविष्यवाणी
Saturn Transit 2023: शनि 17 जनवरी को कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे, जिसका प्रभाव तीसरे विश्व युद्ध का संकेत हो सकता है. प्रसिद्ध भविष्यवक्ता पंडित सुरेश श्रीमाली और क्या-क्या भविष्यवाणी की है? जानें.
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Saturn Transit 2023 in Aquarius, Shani Gochar 2023, Shani Gochar Effect: पंचांग के अनुसार क्रूर ग्रह शनि 17 जनवरी को रात 8 बजकर 02 मिनट पर मकर राशि निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे. ये यहां पर 12 महीने में 3,384 घंटे वक्री रहेंगे. शनि के वक्री होने से विभिन राशियों के लोगों के साथ- देश दुनिया पर भयंकर प्रभाव पड़ेगा. साल 2023 के दौरान कुंभ में शनि गोचर के प्रभाव से तीसरे विश्वयुद्ध का आगाज हो सकता है. आइये जानें भारत के भविष्यवक्ता पंडित सुरेश श्रीमाली शनि के प्रभावों के बारे में क्या-क्या कहते हैं?
साल 2023 में शनि गोचर का विश्व पर असर
यह लगभग निश्चित सा हैं कि न केवल वर्ष 2023 बल्कि आगे के वर्षों में शनि शांत होते नहीं लगते. वर्ष 2023 से 2025 के मध्य शनि के कुंभ राशि में रहते विश्व युद्ध होने के कई योग सामने आएंगे तथा 2024 से 2034 के बीच तीसरा विश्व युद्ध तक होने की संभावित स्थितियों के बारे में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्वस्त भविष्यवक्ता सुरेश श्रीमाली पहले ही व्यक्त कर चुके हैं.
श्रीमाली के अनुसार अगले इस विश्व युद्ध में भारत सर्वाधिक आर्थिक तथा अन्य शक्तियों के रूप में उभरेगा. साथ ही इस युद्ध में शांति स्थापित करने तक में भारत की मुख्य भूमिका होगी. वर्ष 2023 से वर्ष 2025 के बीच शनि के कई अनिष्टकारी प्रभाव सामने आने के योग हैं. भारत में राजनीतिक तथा दलीय संघर्ष चरम तक पहुंचेगा. यहां कुछ राजनीतिक दल साम्प्रदायिक उन्माद के शिकंजे में फंसकर अशांति बढ़ाने में सक्रिय हो सकते हैं.
कुंडली में शनि की स्थिति और लोगों पर उनका प्रभाव
पंडित श्रीमाली के अनुसार, जन्म कुण्डली में शनि निर्बल अथवा नीच में होते हैं तो यह दारिद्रय, चोर-भय, लकवा, उदर व्याधि, नैत्र रोग, चोटादि से अंग-भंग, दमा, कुष्ठ, वात तथा कफ जनित रोग उत्पन्न करते हैं. शनि देव आयु कारक भी हैं, आयुष्य योगों में शनि का स्थान महत्वपूर्ण है. शुभ स्थिति में होने पर शनि आयु वृद्धि करते हैं तो अशुभ स्थिति में होने पर आयु का हरण कर लेते हैं.
शनि देव अप्सरा सिद्धि भी देते हैं
शनि देव अप्सरा सिद्धि भी देते हैं. अप्सराएं शनि मण्डल में ही निवास करती हैं. शनि लोक में वह सुरक्षित महसूस करती हैं. क्योंकि शनि देव काम विहीन हैं. काम को भस्म करना शनि देव ने अपने गुरु शिव से सीखा है. शनि देव परम योगी हैं. वे परम ध्यानी हैं. वे सदैव अपनी नासिका के ऊपर अपनी दृष्टि केन्द्रित रखते हैं.
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