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अपने पिता की गलतियों से क्यों नहीं सीखते हैं राहुल गांधी?

हर कोई छुट्टी पर जाना चाहता है, परिवार के साथ वक्त बिताना चाहता है. कोई भी हो उसके लिए छुट्टी पर किसी रोमांच से कम नहीं होता. लेकिन यही छुट्टियां जब कोई राजनीतिक या फेमस पर्सनल्टी मनाने चुपचाप निकल पड़ता है तो वह चर्चा का केन्द्र बन जाती है. बात जब देश के सबसे बडे राजनीतिक घराने की हो तो मामला और भी दिलचस्प हो जाता है. यहां बात राहुल गांधी के छुट्टियों पर जाने की हो रही है.

AICC उपाध्यक्ष इन दिनों निजी छुट्टियों पर लंदन रवाना हो गए है जहां वह करीब एक सप्ताह तक रहेंगे. राहुल की छुट्टी के लिए उनके ही एक ट्वीट का हवाला दिया जा रहा है. लेकिन यहां कांग्रेस के युवराज की छुट्टियों पर जाने की बात इसलिए की जा रही है क्योंकि राहुल की छुट्टियां किसी पहेली से कम नहीं होती. पिछले बार जब 16 फरवरी 2016 को राहुल गांधी 15 दिन की छुट्टियों पर गए थे और 57 दिन बाद लौटे तो उनकी खूब आलोचना हुई. इस बार भी उनकी छुट्टियों को लेकर कुछ ऐसा ही लगता है. क्योंकि देश में जिस तरह की राजनीतिक घमासान मचा है उसे देखते हुए राहुल गांधी के छुट्टी पर जाने की सलाह देने वाला उनका दोस्त तो हरगिज नहीं हो सकता. उनके सलाहकारों की फेहरिस्त में गिने जाने वाले कुछ वरिष्ठों की बात करें तो वह तो हरगिज इस समय उन्हें छुट्टी पर जाने की सलाह नहीं दे सकते तो क्या राहुल का यह अपना फैसला है?

सिर्फ राहुल गांधी ही नहीं उनके पिता राजीव गांधी की छुट्टियां भी देशवासियों के लिए आकर्षण और आलोचना का केन्द्र बनती थीं. लेकिन बाप और बेटे के छुट्टी मनाने में ज़मी आसमां का फर्क है. जहां राहुल गांधी अज्ञातवास में चले जाते हैं तो वही राजीव गांधी अपने परिवार और दोस्तों के साथ छुट्टियों पर निकलते थे. 1984 से 1989 के बीच राजीव गांधी प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष की भूमिका में रहे इस दौरान वह क्रिसमस और नए साल की छुट्टियां मनाया करते थे. 1985 में वह एमपी के कान्हा किसली राष्ट्रीय उद्यान,1986 रणथम्भौर नेशनल पार्क राजस्थान,1987 में सोनियां और अपने दोस्तों के साथ अंडमान निकोबार और 1988 में उन्होनें लक्ष्यद्धीप में छुट्टियां मनाई. रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान तो उस दौरान 6 दिनों तक आम लोगों के लिए बंद ही कर दिया गया था.

राजीव के साथ इन छुट्टियों में सोनियां गांधी और दोनों बच्चे प्रियंका और राहुल सहित इटली से आए उनके माता-पिता और रिश्तेदार,राजीव के दोस्त ब्रजेन्द्र सिंह उनका परिवार, अमिताभ बच्चन-जया और उनके दो बच्चों सहित 23 लोगों ने मिलकर नए साल की छुट्टियां बिताई थी. बताया जाता है इस दौरान राजीव गांधी एक खुली जीप में आधा घंटा घूमते रहे यही नहीं उन्होंने प्रधानमंत्री होने के बावजूद भी 4500 रूपए का बिल भी भरा और रसोईये और अटेंडेन्ट को 2 हजार रूपए टिप के रूप में भी दिए. इसी दौरान उस समय की प्रसिद्ध अभिनेत्री श्रीदेवी के नृत्य का लुत्फ भी लिया गया जिसकी बाद में खूब आलोचना हुई. वहीं जब 1988 में जब राजीव गांधी लक्ष्यद्वीप छुट्टी मनाने गए तो वहां एक समुद्र किनारे घायल व्हेल को उन्होनें अपने सुरक्षाकर्मियों की सहायता से हिन्द महासागर में पहुंचाया. कुल मिलाकर राजीव गांधी के इन संस्मरणों के द्वारा बताने का प्रयास है कि जनता राजनेताओं को सिर्फ काम करते देखना चाहती है न कि छुट्टियां मनाते. कहते है कि भूत में हुई गलतियों से सीख लेनी चाहिए तो राहुल गांधी के सामने उनके पिता का उदाहण है उस समय तो सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनल भी नही थे.

देश के भूतपूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पीवी नरसिंहम्हा राव, एचडी देवेगौडा, आईके गुजराल, मनमोहन सिंह, अटल बिहारी बाजपेयी आदि की छुट्टियों पर भी हमेशा से लोगों की निगाह रही है. वहीं पीएम नरेन्द्र मोदी ने जनता के सामने एक उदाहरण पेश करते हुए पदभार ग्रहण करने के बाद से कोई छुट्टी नहीं ली. यह एक आरटीआई सूचना में मांगे गए प्रश्न के उत्तर में पीएमओ ने बताया है.

वहीं राहुल गांधी की बात की जाए तो वह आने वाले समय में एक बड़े नेता के रूप में उभर रहे है जिसको लेकर कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि राहुल को अपने सार्वजनिक जीवन में अपनी निजी ख्वाहिशों को दूर रखना चाहिए नहीं तो वह हमेशा ही आलोचना के भागीदार रहेगें. राजनीतिक पंडितों की माने तो राहुल को विदेशों में राजनीतिक समारोह और पार्टी कांफ्रेसों में शिरकत करनी चाहिए यह एक अच्छा उदाहरण होगा. राहुल लंदन से आने के बाद इसी माह चीन जायेंगे. लेकिन वो छुट्टी नहीं पार्टी का कार्य है. राहुल कांग्रेस के एक प्रतिनिधि मण्डल का नेतृत्व करेंगे और कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना से उच्च स्तर पर बातचीत करेंगे. चीन की राहुल गांधी में दिलचस्पी दिखाती है कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर राहुल में अभी भी रुचि और उम्मीद कायम है. राहुल इससे पहले भी दो बार चीन जा चुके हैं. चीन में प्रिंसेलिंग शब्द का इस्तेमाल होता है उन महत्वपूर्ण व्यक्तियों के लिये जो हाल या भविष्य में चीन के लिये उपयोगी साबित हो सकते हैं. राहुल को मौका है कि अपनी चीन यात्रा से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने आप को अच्छे ढंग से पेश कर सकें.

नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आकड़ें लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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