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BLOG: "घर-घर से ईंटा लाएंगे, दरभंगा एम्स बनाएंगे", मिथिला स्टूडेंट यूनियन

भारत के बिहार राज्य के उत्तर में मौजूद शहरों में से प्रमुख शहर दरभंगा है, लेकिन आजकल दरभंगा का एक अनोखा अभियान पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है. भारत में कोरोना महामारी ने कितना आतंक मचाया है यह बात शायद किसी को बताने की जरूरत नहीं है, कोरोना के समय पर देशभर के अस्पतालों की बदहाली भी किसी से छुपी हुई नहीं है. भविष्य में इस तरह की कोई परेशानी ना हो, इसलिए दरभंगा में एक अस्पताल निर्माण के लिए इस तरह का अभियान चलाए जा रहें हैं. केंद्रीय सरकार ने वर्ष 2015-16 के बजट में दरभंगा एम्स बनाने की घोषणा की थी, लेकिन 6 साल बीत जाने के बाद भी एम्स का कही भी अता-पता नहीं है. इस परेशानी का हल निकालने के लिए स्थानीय मिथिला स्टूडेंट यूनियन (MSU) छात्र संगठन आगे आया है, उन्होंने जन सहयोग से दरभंगा एम्स के शिलान्यास की मुहिम छेड़ दी है. मिथिला स्टूडेंट यूनियन के अनुसार उन्होंने यह मुहीम बिहार और केंद्र सरकार को जगाने के लिए शुरू की है, अगर सरकार अपनी जिम्मेदारी समय रहते निभाती तो इस तरह के अभियान की आवश्यकता नहीं थी. 

6 साल पहले हुई थी घोषणा
6 साल पहले एम्स की घोषणा के बावजूद भी आज तक दरभंगा एम्स का शिलान्यास नहीं हो पाया है, ऐसे में MSU छात्र संगठन ने इस अस्पताल को बनाने का बीड़ा उठाया है. यूनियन के सभी स्टूडेंट, लोगों के घर-घर जाकर ईंट लाने का संकल्प किए हैं. ये किसी भी आधारभूत संरचना को बनाने की अद्भुत पहल है. छात्र संघ ने एम्स का निर्माण अभियान के लिए एक नारा भी दिया है  ‘घर-घर से ईंटा लाएंगे, दरभंगा एम्स बनाएंगे.’ अगर कार सेवा से मंदिर बन सकता है तो जन अभियान से अस्पताल, स्कूल और कॉलेज भी बन सकता है, इसी को लेकर छात्र पूरे क्षेत्र में जागरूकता फैला रहे हैं. छात्र संघ दरभंगा, समस्तीपुर, मधुबनी, सीतामढ़ी समेत कई अन्य जिलों से पिछले कुछ दिनों से ईंट जमा कर रहे हैं. मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने 8 सितंबर 2021 को दरभंगा एम्स का शिलान्यास करने की घोषणा की है. उन्होंने एक सोशल मीडिया अभियान "#DarbhangaAIIMS" शुरू किया है जो बहुत ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है और पिछले दिनों ट्विटर पर कई घंटो तक टॉप ट्रेंड टॉपिक में रहा. 

'जाना पड़ता है दूसरे शहर'
बाढ़ और चमकी बुखार जैसी घातक बिमारी यहां हर साल की कहानी है, उत्तर बिहार के 21 ज़िलों में कुछ मेडिकल कॉलेजों को छोड़ दें, तो यहाँ पर एक भी बेहतर सुविधा वाला अस्पताल नहीं है. उत्तर बिहार के इन जिलों में मौजूद पानी में आयरन और आर्सेनिक की मात्रा अधिक होने की वजह से कैंसर, किडनी और लिवर से संबंधी मरीजों की संख्या बढ़ती जा रहीं हैं. जो भी लोग इन बीमारियों से पीड़ित हैं उन्हें इलाज कराने दूसरे शहरों का चकर लगाना परता है. कुछ प्राइवेट अस्पताल और क्लिनिक यहाँ मौजूद हैं जो आम आदमी की पहुंच से बहुत दूर है. ऐसी स्थिति में गरीब आदमी अपना इलाज कराने के लिए पटना और दिल्ली के सरकारी अस्पताल के चक्कर लगाने के लिए मजबूर हैं. दिल्ली के एम्स में उत्तर बिहार के मरीजों की जनसंख्या ज्यादा रहती हैं.

'घर-घर से ला रही ईंटे स्टूडेंट यूनियन'
दरभंगा में एम्स बनाने के लिए मिथिला स्टूडेंट यूनियन की अभियान की शुरुआत हो चुकी है, सैकड़ों छात्र घर-घर जाकर ईंट जमा करने के साथ-साथ लोगों को इस मुद्दे पर जागरूक भी कर रहे हैं. पूर्व वित्त मंत्री स्वर्गीय श्री अरुण जेटली ने दरभंगा एम्स के निर्माण की घोषणा वर्ष 2015 के आम बजट में की थी, सरकारों की गंभीरता इस विषय पर कम ही दिखी. बाद के घोषणा हुए अन्य एम्स का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, लेकिन दरभंगा एम्स की अभी तक जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं दिख रहा है. जमीनी स्तर पर सरकार की सुस्ती को देख मिथिला छात्र संघ ने एम्स शिलान्यास का जीमा अपने हाथ लिया है. मिथिला के लोगों में इस अभियान को लेकर काफी उत्साह दिख रहा है और ऐसे में स्टूडेंट यूनियन के युवाओं को सभी वर्ग के लोगों का समर्थन भी मिल रहा है. 

2020 में हुई एयरपोर्ट की शुरुआत
पिछले वर्ष नवंबर 2020 में दरभंगा हवाई अड्डे के शुरू होने के साथ, मिथिला के जनता के बीच एक सकारात्मक माहौल बना है. हवाई अड्डे पर कई गुना यात्रियों के संख्या बढ़ने से इसे और बेहतर करने की कोशिश की जा रही है. इस हवाईअड्डे की सफलता देख यहां अंतरराष्ट्रीय यात्री और अंतरराष्ट्रीय कार्गो सुविधाओं के साथ वर्तमान हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे में बदलने की मांग तेज होने लगी है. इससे इस क्षेत्र को दक्षिण पूर्व एशिया के देश में कई नए अवसर खुलेंगे. हमने देखा है, बिहार के दरभंगा में यह नया हवाई अड्डा कैसे उत्तर-मध्य बिहार के लोगों के लिए जीवन आसान बना रहा है और यह इस कोरोना काल में संकट के समय, विमानन उद्योग की भी कैसे मदद कर रहा है. यदि केंद्र सरकार दरभंगा एयरपोर्ट के अंतर्राष्ट्रीयकरण मांग को पूरा करती है, तो न केवल इस क्षेत्र के आर्थिक विकास में कई गुना वृद्धि होगी बल्कि भारत के सम्पूर्ण विकास को नया आयाम मिलेगा.

'दरभंगा एम्स की मांग तेज'
छात्र संघ द्वारा दरभंगा एम्स का भूमिपूजन कितना मान्य है, वो क़ानूनी मुद्दा है, लेकिन इन युवाओं के द्वारा पूरे मिथिलांचल में एम्स को लेकर एक सकारात्मक माहौल बनाया जा रहा है, जिसका लाभ इस क्षेत्र को आने वाले दिनों में मिलेगा. यहाँ पर एम्स बनने से ना कि केवल उत्तर बिहार के मरीजों को लाभ मिलेगा, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में और कई नए अवसर भी खुलेंगे, चाहे वे शिक्षा, उच्च स्तरीय अनुसंधान या रोजगार के नए अवसर हों.

'मरीजों के लिए होती है मुश्किल'
उत्तर बिहार का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (डी.एम.सी.एच) मानसून के मौसम में घुटने भर पानी में डूबा रहता है और अपने मरीजों के इलाज के लिए मुश्किलों में जूझता रहता है. डी.एम.सी.एच खुद बीमार है और यहाँ मरीजों का इलाज करने में उतनी ही मुश्किल होती है. यह सारी व्यवस्था और घोषणा चुनाव से ठीक पहले हुई और अगले चुनाव तक के लिए खोखली और बेमानी लग रहीं हैं. अंत में, लोग पीड़ित और असहाय हो जाते हैं और अपने रोगियों के इलाज के लिए दूसरे राज्य के सरकारी अस्पतालों में विकल्प तलाशने लगते हैं.

'जल्द मिले बेहतर सुविधा'
वर्तमान महामारी भारत में चरमराई हुई स्वास्थ्य व्यवस्था को जागृत करती है. साल की प्रारम्भ में स्वास्थ्य सेवा में केंद्र सरकार की ओर से बढ़ा हुआ बजट आवंटन एक स्वागत योग्य शुरुआत थी. उत्तर बिहार को जल्द से जल्द बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले जिसकी कमी कई दशकों से यहाँ पर है. हमें उम्मीद है कि MSU के इस नए अभियान से धीमी गति वाली डबल इंजन सरकार को ईंधन मिलेगा, जिससे अगले चुनाव से पहले दरभंगा एम्स की निर्माण कार्य को रफ़्तार देकर, पूरा कर, जनता को सौंप दिया जाएगा.

(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.)

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