BLOG: ‘तारक मेहता’ के 'डॉ हाथी' कहते थे, हाथी की तरह जल्द ठीक होकर आ जाऊंगा
असली जिंदगी में अविवाहित थे डॉ हाथी

मशहूर सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में डॉ हाथी की भूमिका निभाने वाले कवि कुमार आज़ाद ने सबको हंसाते हंसाते यह दुनिया छोड़ दी. लेकिन अपने पीछे वह इतनी यादें छोड़ गए हैं कि उनके संगी साथी उनकी बातें बताते हुए रो पड़ते हैं. कोई उनके भारी वज़न को लेकर मज़ाक भी करता था तो वह बुरा न मानकर मुस्कुरा देते थे. सीरियल ‘तारक मेहता’ में तो उन्हें विवाहित दिखाया है, जहां उनकी पत्नी कोमल और एक बेटा गोली भी है. लेकिन अपनी असली जिंदगी में अविवाहित थे कवि कुमार. साथ ही सीरियल में तो उन्हें खाने पीने का ऐसा शौक़ीन दिखाया गया है कि उन्हें थोड़ी थोड़ी देर में बहुत भूख लगती है और वह ज़मकर खाते हैं. लेकिन असली जिंदगी में वह बहुत कम खाते थे.
मुंबई में तारक मेहता के सेट पर उनके साथ मुझे अपनी दो मुलाकात तो अच्छे से याद हैं. करीब 6 साल पहले जब मैं पहली बार डॉ हाथी से मिला तो वह शूटिंग के लंच ब्रेक में खाना खा रहे थे. मैंने उनसे पूछा आपका खाना खाते हुए फोटो ले लूं ? मुझे लगा वह मना कर देंगे क्योंकि अधिकतर लोग खाते पीते हुए अपना फोटो खींचाना पसंद नहीं करते. लेकिन वह हंसते हुए बोले- “जरुर लीजिये, डॉ हाथी खाते हुए ही अच्छे लगते हैं.” अभी पिछले वर्ष भी मैं अपने परिवार के साथ ‘तारक’ के सेट पर गया तब भी वह हम सभी से बहुत सम्मान के साथ मिले और बातें करते रहे. असल में सेट पर वह खुद तो हमेशा हंसते ही रहते थे, दूसरों को भी हंसाते रहते थे. भारी शरीर के कारण बेशक उन्हें कई तकलीफ थीं लेकिन अपने दुख –तकलीफ को वह किसी के साथ साझा नहीं करते थे.
‘तारक मेहता’ में ‘जेठा लाल’ की भूमिका करने वाले अभिनेता दिलीप जोशी बताते हैं- “डॉ हाथी के साथ काम करते हुए बरसों हो गए, वह बहुत अच्छे इंसान और बहुत अच्छे दोस्त थे. हम सभी पुरुष कलाकार साथ बैठ खूब गप शप करते थे. उन्हें सेहत की समस्या अक्सर हो जाती थी, लेकिन वह अक्सर अपनी तकलीफ, अपना दर्द बताते नहीं थे. उनको लगातार खुश देख, हंसता देख मुझे बहुत अच्छा लगता था. मुझे तो वह ‘लाफिंग बुद्धा’ की तरह लगते थे, हमेशा खुश रहना और उनके खुश रहने से हमको भी प्रेरणा मिलती थी. हालांकि मुझे दुख है कि अभी लन्दन में होने के कारण मैं उनकी अंतिम यात्रा में नहीं जा सका. सच तो यह है कि हमने कभी नहीं सोचा था कि अचानक से यह सब हो जाएगा और वह चले जायेंगे. उनके निधन से तीन चार दिन पहले हमने साथ शूटिंग की थी. वह तब ठीक थे. मुझे उनकी एक बात हमेशा याद रहेगी कि जब मैं उनसे पूछता था –हाथी भाई क्या हाल हैं. तो वह कहते थे- आल इज वेल सर. लेकिन अब हम उनको बेहद मिस करेंगे.’’
इस बारे में जब हमने सीरियल ‘तारक मेहता’ के निर्माता असित कुमार मोदी से बात की, तो वह बोले, ‘’हम तो सोमवार 9 जुलाई को उनका सेट पर इंतज़ार कर रहे थे. हमने सीरियल की आगे की कुछ प्लानिंग आदि को लेकर सभी कलाकारों की उस दिन एक मीटिंग भी रखी थी. इसलिए जिनकी शूटिंग नहीं थी वे कलाकार भी आये थे. तभी पता लगा कि वह इस दुनिया में नहीं रहे. तो यह सुनकर हम सब हैरान रह गए. 7 जुलाई को उन्होंने अपनी तबियत खराब होने पर डॉक्टर के पास जाने के लिए कहा था. हमने कहा कोई बात नहीं आप जाइए. हमने फिर शूटिंग में बदलाव किया. तबियत खराब होने की समस्या उनके साथ पहले भी हो जाती थी. लेकिन वह ठीक हो शूटिंग पर आ जाते थे. 8 जुलाई को शूटिंग नहीं थी. तो हम मानकर चल रहे थे कि 9 जुलाई को आ जायेंगे. लेकिन उनकी जगह उनके निधन की खबर आई. तब हमने उनकी स्मृति में शूटिंग रद्द कर दी. उनको सभी ने मिलकर याद किया.”
मोदी यह भी बताते हैं, ‘’कवि कुमार की ‘तारक मेहता’ में डॉ हाथी के रूप में एंट्री 90वें एपिसोड से हुई थी. पहले यह भूमिका कोई और कर रहा था. लेकिन तब से अब तक करीब 9 साल में उनका काम तो अच्छा रहा ही. साथ ही उनसे भी कभी कोई समस्या या शिकायत नहीं रही. हमेशा पूरे उत्साह से काम करते थे.” ज़ाहिर है अब आप डॉ हाथी की भूमिका के लिए किसी और को चुनेंगे? यह पूछने पर असित मोदी कहते हैं, ‘’अभी इस बारे में कुछ भी नहीं सोचा. अभी हम इस दुख से बाहर नहीं निकल पा रहे. इतने साल साथ काम करते करते वह परिवार का हिस्सा बन गए थे. कुछ न कुछ करना तो पड़ेगा ही लेकिन क्या यह अभी दो चार दिन बाद सोचेंगे.’’
कवि कुमार आज़ाद झारखंड के रहने वाले थे. वह एक ओर कवितायें लिखते थे तो साथ ही उनको अभिनय का भी शौक था. लेकिन उनके घर वाले नहीं चाहते थे कि उनका बेटा अभिनय की दुनिया में जाए. घर वालों के विरोध के बावजूद वह सन 1994 में घर से भागकर मुंबई आ गए. जहां फिल्मों में काम पाने के लिए उन्होंने बहुत संघर्ष किया. धीरे धीरे उन्हें कुछ फिल्मों और सीरियल में काम मिलना शुरू हुआ. जिनमें ‘मेला’, ‘फंटूश’, ‘क्योंकि’ और ‘जोधा अकबर’ जैसी फ़िल्में शामिल हैं. लेकिन इनकी किस्मत तब बदली जब सन 2008 में इनको ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ मिला. पिछले दिनों वह काफी खुश थे. अब लम्बे संघर्ष के बाद मुंबई में उनका अपना मकान बन गया था. अपनी कार थी. यहां तक दो साल पहले मुंबई के मीरा रोड पर उन्होंने कोलकाता की एक मशहूर फ़ूड चेन का रेस्टोरेंट खोल लिया था, जो खूब चल निकला तो जल्द ही मलाड में दूसरा रेस्ट्रा भी खोल लिया. अपने माता-पिता, दादी और बड़े भाई, भाभी को भी उन्होंने अपने साथ रहने के लिए मुंबई बुला लिया था. और अब एक और रेस्टोरेंट खोलने की योजना भी वह बना चुके थे. लेकिन नियति ने उससे पहले उनको अपने पास बुला लिया.
सीरियल में डॉ हाथी के सह कलाकार और दोस्त सोढी की भूमिका कर रहे अभिनेता गुरु चरण सिंह भी इस गम से बाहर नहीं निकल पा रहे. गुरु चरण कहते हैं, “मेरी तो डॉ हाथी से सबसे ज्यादा दोस्ती थी और हमारी खूब पटती थी. इसका एक कारण यह भी था कि मेरी और कवि कुमार आज़ाद की जन्म तिथि एक ही थी 12 मई. हम उस दिन शूटिंग होने पर अपना जन्म दिन साथ ही मनाते थे. मुझे ही सबसे पहले उनके निधन की सूचना किसी ने दी तो मैंने सोचा यह कोई अफवाह होगी. मैंने तभी उनके भाई को फ़ोन किया तो उन्होंने कहा यह सच है. यह सुनते ही मैं फूट फूट कर रोने लगा. वह यारों के यार थे. बहुत जोशीले और मेहनती थे. वह जब शूटिंग पर आते थे अपने साथ तरह-तरह के पराठें लाते थे. उनके यहां के पराठें और आलू की सब्जी मुझे बहुत अच्छी लगती थी. मुझे जब भी भूख लगती तो मैं उनसे कहता था आज कौनसा परांठा लाये हो जरा निकालो, भूख लगी है. लेकिन अब सब यादें रह गयीं हैं. हालांकि जब से उन्होंने अपना वज़न कम करने का ओपरेशन कराया था उसके बाद से उनकी भूख कम हो गयी थी. अब वह बहुत कम खाते थे. मैं उनके परिवार से मिलकर आया हूं, सभी बहुत रो रहे हैं. उनके अंतिम संस्कार पर भी गया तो उन्हें देख कर लगा कि सो रहे हैं, अभी उठ जायेंगे. उन्हें मैं हमेशा मिस करूंगा. बहुत ही अच्छे इन्सान थे. दूर की सोच रखते थे. दुनिया से बिदा होने से पहले वह अपने पूरे परिवार को सेट कर गए हैं. जिससे उनके बाद उनके माता पिता या भाई भाभी को कोई दिक्कत न हो.’’
सीरियल ‘तारक मेहता’ में ‘अंजली तारक मेहता’ की भूमिका करने वाली अभिनेत्री नेहा मेहता भी डॉ हाथी को याद कर उदास हो जाती हैं. नेहा कहती हैं, ‘’हमारी पूरी यूनिट उनके जाने से दुखी है. पर क्या करें जिसका बुलावा आता है उसे जाने से कोई नहीं रोक सकता. वह जब भी मिलते थे तो हंसते हुए कहते थे- जय हो. उनका जय हो, जय हो कहना सभी को अच्छा लगता था. वह स्वभाव में बिलकुल बच्चों जैसे थे. बच्चों के साथ उनकी जमती भी खूब थी. उनकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि हममें से कोई भी उनके भारी शरीर पर कभी कोई मज़ाक भी करता था तो वह बुरा नहीं मानते थे. यहां तक बाहर से आया कोई व्यक्ति भी उनपर कोई हंसता था तो वह भी हंस देते थे. वह कहते थे आजकल दुनिया रुलाने पर उतारू है, लेकिन यदि मैं या मेरा भारी शरीर किसी को ख़ुशी देता है तो इससे बढ़कर क्या हो सकता है. अधिक वजन के कारण वह अस्वस्थ हो जाते थे लेकिन ज्यादातर अपनी समस्या किसी को बताते नहीं थे. कभी तबियत ख़राब होने पर यदि वह घर वापस जाने लगते तो मैं उनसे पूछती क्या तबियत ठीक नहीं है. तो वह मुस्कुराते हुए कहते- आज तबियत कुछ नासाज़ है अंजलि जी लेकिन जल्द ठीक होकर हाथी की तरह आउंगा. वह हर बार ठीक होकर अगले ही दिन आ भी जाते थे. लेकिन अफ़सोस अब वह कभी नहीं आयेंगे.’’
लेखक से ट्विटर पर जुड़ने के लिए क्लिक करें- https://twitter.com/pradeepsardana
और फेसबुक पर जुड़ने के लिए क्लिक करें- https://www.facebook.com/pradeep.sardana.1
(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.)ट्रेंडिंग न्यूज
टॉप हेडलाइंस
