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ब्लॉग: यूपी पुलिस से अपराधी नहीं जनता डरती है !

यूपी में कानून-व्यवस्था का हाल किसी से छिपा नहीं है। आये दिन भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। एनकाउंटर को लेकर भी यूपी पुलिस संदेह के घेरे में है। ये कहना अतिश्योक्ति न होगा कि राज्य में कानून व्यवस्था भगवान भरोसे है

यूपी पुलिस की गिनती देश की सबसे बड़ी पुलिस फोर्स में होती है...जिसपर देश के सबसे ज्यादा आबादी वाले सूबे में कानून का इकबाल बुलंद रखने और अपराध पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी है... लेकिन इतनी बड़ी पुलिस फोर्स की चर्चा उसकी चुस्ती-फुर्ती और अपराध पर लगाम लगाने के लिए नहीं होती। बल्कि भ्रष्टाचार, अवैध उगाही, उत्पीड़न और सुस्त कामकाज यूपी पुलिस की पहचान बन चुके हैं... जिसके जिम्मे यूपी के करीब 23 करोड़ लोगों की हिफाजत का जिम्मा है... हम ये सवाल अक्सर उठाते रहे हैं और आज ये सवाल एक बार फिर इसलिये उठा रहे हैं... क्योंकि उत्तर प्रदेश के बेहद पॉश माने जाने वाले नोएडा में पुलिस थाने से महज सौ मीटर की दूरी पर एक छात्रा से गैंगरेप हो जाता है।

हर सरकार इस वादे के साथ सत्ता में आती है कि उसकी सरकार में कानून व्यवस्था पहले से ज्यादा चुस्त और दुरुस्त होगी... लेकिन सरकारें तो बदल जाती हैं पुलिस के कामकाज का तरीका बिलकुल नहीं बदलता... लेकिन ऐसा है क्यों, दरअसल जिस पुलिस पर जनता से कानून का पालन करवाने की जिम्मेदारी हो वो खुद नियम-कानून की धज्जियां उड़ाए तो ऐसा ही होगा। ये सब तब हो रहा है जब उत्तर प्रदेश में अपराध को रोकने नहीं बल्कि खत्म करने को अपनी पहली प्राथमिकता बताने वाले योगी आदित्यनाथ जैसे मुख्यमंत्री हैं। लेकिन पुलिस महकमे के अफसर की सीएम योगी की यूपी पुलिस की छवि बदलने की मुहिम को पलीता लगाने में लगे हुए हैं। जिसकी एक बानगी यूपी की राजधानी लखनऊ में भी दिखती है।

जिसमें राजधानी लखनऊ के एसएसपी कलानिधि नैथानी बिना सीट बेल्ट लगाए पीसीआर वैन चला रहे थे, लेकिन अगर कोई आम आदमी बिना सीट बेल्ट लगाये गाड़ी चलाता हुआ पकड़ा जाता। तो उससे एक हजार रुपये जुर्माना वसूला जाना तय होता लेकिन चूंकि खुद एसएसपी ही मोटर व्हीकल एक्ट की धज्जियां उड़ा रहे थे इसलिये किसी पुलिस वाले का कार्रवाई करने का सवाल ही नहीं पैदा होता है।

वही दूसरी तरफ एनकाउंटर के दम पर क्राइम को कंट्रोल करने की यूपी पुलिस की कोशिशें भी नाकाम होती दिख रही हैं। हाईटेक सिटी कहे जाने वाले नोएडा में अपराधियों ने एक युवती से गैंगरेप किया और फरार हो गए। ये घटना तब हुई है जब नोएडा और ग्रेटर नोएडा से लगातार मुठभेड़ की घटनाएं सामने आती रहती हैं और एक तस्वीर फिरोजाबाद से सामने आई थी, जिसमें एक बार फिर यूपी पुलिस ने खुद अपना मजाक बनाकर रख दिया... जब मॉकड्रिल के दौरान मैदान में दंगाइयों को रोकने की ड्रिल के दौरान पुलिसवाले घोड़े की बजाय डंडे पर सवार होकर हवाई घोड़े दौड़ाते दिखे।

इन तीन घटनाओं से आप ये अंदाजा लगा सकते हैं कि यूपी में नियम कानून सिर्फ आम जनता के लिए हैं। अपराधी अब भी पुलिस को सीधी चुनौती दे रहे हैं और पुलिस खुद अपनी छवि सुधारने को लेकर संजीदा नहीं है।

बेहतर समाज के निर्माण के लिए सुरक्षित माहौल सबसे जरूरी चीज है। हालांकि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था हमेशा से बड़ी चुनौती रही है, जिसके लिए मुख्यमंत्री खुद लगातार पुलिस अफसरों की नकेल कसते रहे हैं, लेकिन पुलिस के आला अफसरों से लेकर सिपाही तक के कार्यकलाप और नोएडा गैंगरेप जैसी घटना ना सिर्फ पुलिस के इकबाल पर सवाल है बल्कि पुलिस का आचरण खुद कानून-व्यवस्थ को मुंह चिढ़ाता नजर आता है। इसके लिये कसूरवार बेशक चंद पुलिसवाले होते हैं लेकिन कठघरे में पूरा पुलिस सिस्टम और सरकार तक होती है। ऐसे में अपराध पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस को ज्यादा सतर्क, जिम्मेदार और संवेदनशील होने की जरूरत है ताकि दुरुस्त कानून व्यवस्था सिर्फ दो शब्द ना बनकर रह जाए बल्कि आम जनता खुद को सुरक्षित महसूस भी करे।

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ओपिनियन

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