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नमाज अल्लाह की इबादत है, तो योग है परमात्मा से मिलन का मार्ग

नई दिल्लीः योग करने में ॐ या अल्लाह शब्द के उच्चारण को लेकर कांग्रेस नेता जो ट्वीट किया है वह अनजाने में नहीं हुआ है बल्कि उसके राजनीतिक मायने भी हैं क्योंकि अगले साल की शुरुआत में उत्तरप्रदेश समेत अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं.

कांग्रेस अकसर चुनावों से पहले ऐसे मुद्दे की तलाश में रहती है जिस पर बहस छेड़कर उसे विवाद का रुप दे दिया जाए और फिर उससे सियासी फायदा उठाया जाये. हालांकि इसे बेवजह का विवाद माना जा रहा है लेकिन कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने अपने इस ट्वीट के जरिये एक तरह से यह संदेश देने की कोशिश की है कि योग किसी एक धर्म की बपौती नहीं है, इसलिये अगर कोई मुस्लिम इंसान योग का अभ्यास करता है तो यह जरुरी नहीं है कि वह ॐ शब्द का ही उच्चारण करे.

दरअसल, योगाभ्यास करना तो शरीर को स्वस्थ रखने की ही एक क्रिया है और इसका किसी धर्म, मजहब या जाति से कोई संबंध नहीं है और न ही होना चाहिये. इसलिये अगर एक इंसान योग करते समय किसी खास शब्द का उच्चारण करे या न करे, इस पर न तो किसी को ऐतराज होना चाहिये और न ही यह विवाद का विषय बनना चाहिये.

दुनिया को सबसे पहले योग का सूत्र देने वाले महर्षि पतंजलि ने योग का अर्थ बताया है- जुड़ना, मन को वश में करना और वृत्तियों से मुक्त होना ही योग है.

सदियों पहले महर्षि पतंजलि ने मुक्ति के आठ द्वार बताए, जिन्हें हम 'अष्टांग योग' कहते हैं.लेकिन मौजूदा दौर में हम अष्टांग योग के कुछ अंगों जैसे आसन, प्राणायाम और ध्यान को ही जान पाए हैं. उन्होंने तो इसे आत्मा के परमात्मा से मिलने का मार्ग भी बताया है और उसकी तीन अवस्था बताईं हैं- धारणा,ध्यान और समाधि. लेकिन आधुनिक युग आते-आते योग महज शारारिक वर्जिश का एक साधन बन गया. चूंकि इसने एक धंधे का रुप ले लिया, लिहाजा योग की बाकी क्रियाओं को गायब कर दिया गया जिनमें शरीर के साथ ही मन की अवस्था को भी महत्वपूर्ण माना गया है.

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर सिंघवी के जिस ट्वीट से विवाद छिड़ा है, उसमें उन्होंने लिखा कि, "ॐ के उच्चारण से ना तो योग ज्यादा शक्तिशाली हो जाएगा और ना अल्लाह कहने से योग की शक्ति कम होगी." जाहिर है कि इस पर रिएक्शन तो होना ही था, सो सबसे पहली प्रतिक्रिया योगगुरु स्वामी रामदेव की आई. उन्होंने कहा कि " ईश्वर-अल्लाह तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवान’. अल्लाह, भगवान, खुदा सब एक ही है, ऐसे में ॐ बोलने में दिक्कत क्या है. लेकिन, हम किसी को खुदा बोलने से मना नहीं कर रहे हैं. इन सभी को भी योग करना चाहिए, फिर इन सभी को एक ही परमात्मा दिखेगा."

लेकिन ऐसा नहीं है कि ॐ के उच्चारण को लेकर यह विवाद पहली बार हुआ है. दरअसल, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर 2014 से ही सरकार हर साल बड़े पैमाने पर इसका आयोजन करती आ रही है. साल 2016 में सरकार ने योग दिवस के लिए जो प्रोटोकॉल जारी किया था, उसमें योग सत्र की शुरुआत 'ॐ' के उच्चारण की प्रार्थना के साथ हुई थी. तब भी कई राजनीतिक दलों और अन्य संगठनों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि सरकार इस बहाने अपने हिंदुत्व के अजेंडे को आगे बढ़ाना चाहती है.

हालांकि, तब आयुष मंत्रालय ने सफाई दी थी कि योग सत्र के दौरान 'ॐ' बोलने को अनिवार्य नहीं किया गया है. यह पूरी तरह स्वैच्छिक है और 'ॐ' के उच्चारण के दौरान कोई भी शख्स चुप रह सकता है. इस पर कोई सवाल नहीं उठाएगा.

हालांकि अगर बारीकी से देखा जाये, तो योग और नमाज में काफी हद तक समानताएं नजर आती हैं. योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द 'युजा' से हुई है जिसका मतलब है 'एकजुटता'. ठीक इसी तरह नमाज जिसे 'सलात' कहा जाता है, इसकी उत्पत्ति हुई है अरबी शब्द 'सिला/विसाल' से. इसका भी मतलब 'एकजुटता' से ही है. नमाज के दौरान मन को शांत रखा जाता है और ध्यान लगाया जाता है. योग में भी मन को शांत कर ध्यान लगाया जाता है. 

(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.)

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