बांग्लादेश और पाकिस्तान की बढ़ती नज़दीकी, भारत के लिए बनी नई चुनौती?

शेख़ हसीना वाजिद के सत्ता से हटने के बाद, बांग्लादेश और पाकिस्तान के रिश्तों में काबिलेगौर सुधार देखा गया है. दोनों देशों ने 50 वर्षों के बाद व्यापारिक गतिविधियाँ फिर से शुरू कर दी हैं, जिससे इलाक़ाई Geo-politics में नए आयाम जुड़े हैं. इस पूरे सिलसिले को देखते हुए, भारत भी सतर्क हो गया है और अपनी स्ट्रैटेजीकल पोजीशन को मज़बूत करने के लिए ज़रूरी क़दम उठा रहा है.
बांग्लादेश-पाकिस्तान संबंधों में नया दौर
अगस्त 2024 में शेख़ हसीना की सत्ता से विदाई के बाद, बांग्लादेश और पाकिस्तान ने अपने आपसी रिश्तों को दोबारा से बहाल करने की दिशा में अहम कदम उठाए हैं. नए अंतरिम सरकार के प्रमुख, नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस, ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ से दो बार मुलाकात की.
जनवरी 2025 में, बांग्लादेश के हाई-लेवल सैन्य अधिकारी जनरल एस.एम. कमरुल हसन ने इस्लामाबाद का दौरा किया और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर से मुलाकात की. इन बैठकों से दोनों देशों के बीच बढ़ती कूटनीतिक नज़दीकी साफ़ ज़ाहिर होती है.
व्यापारिक रिश्तों में नई शुरुआत
दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग भी तेज़ी से बढ़ रहा है. फेडरेशन ऑफ पाकिस्तान चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FPCCI) के एक प्रतिनिधिमंडल ने बांग्लादेश का दौरा किया. इस दौरान, पाकिस्तान-बांग्लादेश संयुक्त व्यापार परिषद (Joint Trade Council) स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए. फरवरी 2025 में दोनों देशों के बीच 1 बिलियन डॉलर की व्यापारिक गतिविधियाँ दर्ज की गईं. उम्मीद की जा रही है कि अगले एक साल में यह आंकड़ा 3 बिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है.
समुद्री और हवाई मार्गों की बहाली
बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच कनेक्टिविटी को मज़बूत करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं. चटगांव और कराची के बीच समुद्री रास्ते को 52 वर्षों के बाद फिर से खोला गया. इससे व्यापारिक और यात्री आवाजाही आसान होगी. 2018 से बंद सीधी उड़ानों को दोबारा शुरू करने का फैसला किया गया है. बांग्लादेश में पाकिस्तानी हाई-कमीशन ने वीज़ा प्रोसेस को आसान बनाने का ऐलान किया है, जिससे दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क बढ़ेगा.
भारत के लिए क्या यह चिंता की बात है?
बांग्लादेश और पाकिस्तान के बढ़ते संबंध भारत के लिए रणनीतिक चुनौती बन सकते हैं. भारत के पूर्व राजदूत अजय बिसारिया ने एक हिंदी दैनिक अख़बार को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर पाकिस्तान बांग्लादेश के साथ सुरक्षा संबंध स्थापित करता है और भारत के प्रभाव को कम करने की कोशिश करता है, तो यह क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को बिगाड़ सकता है.
भारत को अपनी पूर्वी सीमाओं पर पाकिस्तान के बढ़ते प्रभाव को काउंटर करने के लिए कड़े सुरक्षा उपाय अपनाने पड़ सकते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश और पाकिस्तान की बढ़ती नज़दीकी शिलिगुड़ी कॉरिडोर के लिए ख़तरा बन सकती है, जो उत्तर-पूर्वी भारत को शेष देश से जोड़ता है. इस क्षेत्र में किसी भी अस्थिरता से भारत की सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है.
बांग्लादेश की नई सरकार और भारत के साथ रिश्ते
शेख़ हसीना के सत्ता से बाहर होने के बाद, भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में ठंडापन आ गया है. नई सरकार भारत को शक की निगाह से देख रही है. उन्हें लगता है कि भारत ने अवामी लीग को समर्थन देकर बांग्लादेश की राजनीति में दखलअंदाजी की है. शेख़ हसीना भारत में रहकर अपनी राजनीतिक गतिविधियाँ चला रही हैं, जिससे नई सरकार और ज़्यादा नाराज है. इसका सीधा असर यह हुआ कि बांग्लादेश अब पाकिस्तान और चीन की ओर ज़्यादा झुक रहा है.
क्या भारत के लिए यह गंभीर खतरा है?
अगर बांग्लादेश, पाकिस्तान और चीन एक सामरिक गठबंधन (Strategic Alliance) बनाते हैं, तो यह भारत के लिए बड़ा झटका हो सकता है. बंगाल की खाड़ी में पाकिस्तान और चीन की बढ़ती मौजूदगी भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती है. अगर बांग्लादेश चीन की Belt and Road Initiative (BRI) का हिस्सा बनता है, तो भारत के लिए कूटनीतिक और आर्थिक मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं.
भारत की रणनीति क्या होनी चाहिए?
भारत के लिए सबसे अच्छा विकल्प यह होगा कि वह बैकचैनल डिप्लोमेसी और आर्थिक कूटनीति के ज़रिए बांग्लादेश से रिश्ते सुधारने की कोशिश करे.यक़ीन है की भारत सरकार ऐसा ही कुछ कर रही होगी.
1. आर्थिक निवेश:
भारत को बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखनी होगी ताकि चीन और पाकिस्तान की पूरी पकड़ न बन सके.
2. सुरक्षा सहयोग:
आतंकवाद और सीमा सुरक्षा के मुद्दों पर भारत-बांग्लादेश का सहयोग दोनों के हित में रहेगा.
3. राजनीतिक संवाद:
खुले तौर पर नई सरकार भारत से नाराज हो सकती है, लेकिन पर्दे के पीछे संपर्क बनाए रखना ज़रूरी है.
निष्कर्ष
बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों का सुधरना भारत के लिए चिंता का विषय है, खासकर जब नई बांग्लादेश सरकार के साथ भारत की दूरियाँ बढ़ रही हैं.
भारत को जल्दबाजी में कोई कदम उठाने के बजाय, बैकचैनल डिप्लोमेसी और आर्थिक रणनीति के ज़रिए बांग्लादेश को अपने करीब बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए. हालात भारत के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन कूटनीति में धैर्य,सब्र और इंतज़ार ही सबसे बड़ी ताकत होती है.
[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही ज़िम्मेदार है.]
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