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उत्तराखंड चुनाव: बीजेपी और कांग्रेस के लिए आखिर केजरीवाल क्यों बन गए बड़ी मुसीबत?

Uttarakhand Election 2022: पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में दोबारा भगवा परचम लहराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने भी आज चुनाव प्रचार के आखिरी दिन अपनी पूरी ताकत लगाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी तो वहीं प्रियंका गांधी ने भी बीजेपी को सत्ता से बाहर करने के लिए धामी सरकार पर जमकर हमले किये. वहां की 70 विधानसभा सीटों पर 14 फरवरी को वोटिंग है.

साल 2000 में राज्य से बनने से लेकर अब तक वहां मुख्य मुकाबला कांग्रेस व बीजेपी में ही होता आया है, लेकिन बीच में मायावती की बीएसपी ने भी वहां अपनी जमीन तलाशी थी. हालांकि इस बार अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के मैदान में कूदने से मुकाबला दिलचस्प होने के साथ ही चौतरफा होता दिख रहा है.

आप के अखाड़े में आने से कांग्रेस और बीजेपी के खेमे में थोड़ी घबराहट इसलिये भी है कि वह दोनों को ही नुकसान पहुंचा सकती हैं, लेकिन देखना ये है कि इसका  ज्यादा नुकसान किसे होता है. हालांकि उत्तराखंड के लोगों ने पिछले 21 सालों में कांग्रेस व बीजेपी, दोनों को ही आजमाया है. लिहाज़ा कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि वोटरों का एक बड़ा तबका दोनों मुख्य दलों से खार खाये बैठा है और वह सबक सिखाने के मूड में है. आम आदमी पार्टी के रुप में लोगों को एक विकल्प मिला है, इसलिये मतदाताओं का एक वर्ग इस बार उसे भी एक मौका देकर आजमाने के मूड में दिख रहा है.

दोनों ही पार्टियों में से कोई भी बहुमत पाने के लिए जरुरी 36 सीटों के आंकड़े को को नहीं छू पाता है तो इस सूरत में केजरीवाल की पार्टी पांच-सात सीटें हासिल करने में भी अगर कामयाब होती है तो वह राज्य की राजनीति में 'किंग मेकर' की भूमिका में आ सकती है. मतलब साफ है फिर उसके समर्थन से ही अगली सरकार बनेगी. 

बीजेपी का सबसे बड़ा माइनस पॉइंट ये है कि उसे पांच साल में अपने तीन मुख्यमंत्री बदलने पड़े और सरकार के खिलाफ एन्टी इनकंबेंसी फैक्टर भी नजर आ रही है. कांग्रेसी सरकार के कारनामों और भ्रष्टाचार के किस्सों को भी लोग भूले नहीं हैं. ऊपर से पार्टी नेताओं की आंतरिक कलह भी जगजाहिर है. बीजेपी से बेदखल किये गए राज्य के कद्दावर नेता हरक सिंह रावत ने दोबारा भले ही कांग्रेस का हाथ थाम लिया है, लेकिन बताते हैं कि अब उनका जनाधार पांच साल पहले जैसा नहीं रहा.

दूसरी तरफ देखें तो केजरीवाल के चुनावी वादे तो अपनी जगह हैं, लेकिन आप ने कर्नल अजय कोठियाल को अपना मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करके इस मामले में दोनों बड़ी पार्टियों से बढ़त हासिल कर ली है. आप ने पंजाब में भी यही रणनीति अपनाई है. उत्तराखंड की राजनीति पर पकड़ रखने वाले विश्लेषक मानते हैं कि कर्नल कोठियाल की साफ-सुथरी छवि का फायदा आप को मिलना तय है और लोगों ने जिस तरह से उनके प्रति अपना उत्साह दिखाया है, उसका असर आसपास की कुछ सीटों पर भी पड़ेगा.

आप का वोटर साइलेंट है और दोनों बड़ी पार्टियों के नेताओं को भी अहसास हो चुका है कि इस बार आप ही उनका खेल बिगाड़ देगी. उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने के लिए छेड़े गये आंदोलन में वर्षों तक सक्रिय रहे राजनीतिक विश्लेषक राजेन्द्र रतूड़ी भी इसी तरह की बात कहते हुए नजर आते हैं. उनके मुताबिक हकीकत ये है कि पहाड़ में आप के लिए बेहद तेजी से अंडर करंट बह रहा है. इसलिये मेरा कहना है कि केजरीवाल यहां 'गेम चेंजर' साबित होने वाले हैं.

(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.)

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