केंद्रीय बजट 2026

Union Budget 2026: मेडिकल टूरिज्म से लेकर रिवाइज्ड ITR तक… बजट 2026 में क्या अच्छा हुआ और क्यों मिली निराशा
मेडिकल टूरिज्म से लेकर रिवाइज्ड ITR तक… बजट 2026 में क्या अच्छा हुआ और क्यों मिली निराशा

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बजट आवंटन (₹ Cr)

Ministry 2024-25 (Lakh Cr) 2025-26 (Lakh Cr) 2026-27 (Lakh Cr) FY27 vs FY26
Defence 6.22 6.81 7.85 15.2%
Road Transport And Highways 5.48 5.47 5.98 9.3%
Home Affairs 2.19 2.33 2.55 9.4%
Education 1.21 1.29 1.39 7.8%
Health 0.87 0.99 1.04 5.0%

इनकम टैक्स स्लैब

Tax Rate Old Regime (Amount in Lakh) New Regime (FY26)
Nil upto 2.5 L upto 4 L
5% 2.5 L to 5 L 4 L to 8 L
10% - 8 L to 12 L
15% - 12 L to 16 L
20% 5 L to 10 L 16 L to 20 L
25% - 20 L to 24 L
30% Above 10 L Above 24 L
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Budget 2024

लाइव अपडेट्स

रुपया शुरुआती कारोबार में 37 पैसे चढ़कर 91.56 प्रति डॉलर पर

वित्त मंत्री के नाम पत्र

चंद्रजीत बनर्जी कहते हैं,

चंद्रजीत बनर्जीDirector General, CII

चंद्रजीत बनर्जी कहते हैं, "जैसे-जैसे भारत ग्रीन ट्रांजिशन के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है, डीकार्बनाइजेशन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है, जहां रिन्यूएबल्स और ग्रीन मोबिलिटी पर फोकस करने के साथ-साथ ट्रांजिशन फाइनेंस, सर्कुलरिटी और एक मजबूत ESG रिपोर्टिंग इकोसिस्टम को प्राथमिकता दी जाए.''

इंडिया, ACCA (एसोसिएशन ऑफ चार्टर्ड सर्टिफाइड अकाउंटेंट्स) के डायरेक्टर मोहम्मद साजिद खान का कहना है, ''जैसे-जैसे भारत यूनियन बजट 2026 की तैयारी कर रहा है, देश के फाइनेंशियल और इकोनॉमिक इकोसिस्टम को मजबूत करने पर फोकस के साथ-साथ भविष्य के लिए तैयार टैलेंट में निवेश करना भी जरूरी है. अकाउंटिंग और फाइनेंस का प्रोफेशन डिजिटलाइजेशन, सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग, AI और बदलते ग्लोबल कंप्लायंस स्टैंडर्ड्स की वजह से तेजी से बदल रहा है. हमें उम्मीद है कि आने वाले बजट में ऐसे उपायों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो ग्लोबल स्टैंडर्ड के हिसाब से हाई-क्वालिटी प्रोफेशनल एजुकेशन और इंडस्ट्री-एकेडेमिया के बीच मजबूत सहयोग को सपोर्ट करें.''

मोहम्मद साजिद खानDirector – India, ACCA

इंडिया, ACCA (एसोसिएशन ऑफ चार्टर्ड सर्टिफाइड अकाउंटेंट्स) के डायरेक्टर मोहम्मद साजिद खान का कहना है, ''जैसे-जैसे भारत यूनियन बजट 2026 की तैयारी कर रहा है, देश के फाइनेंशियल और इकोनॉमिक इकोसिस्टम को मजबूत करने पर फोकस के साथ-साथ भविष्य के लिए तैयार टैलेंट में निवेश करना भी जरूरी है. अकाउंटिंग और फाइनेंस का प्रोफेशन डिजिटलाइजेशन, सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग, AI और बदलते ग्लोबल कंप्लायंस स्टैंडर्ड्स की वजह से तेजी से बदल रहा है. हमें उम्मीद है कि आने वाले बजट में ऐसे उपायों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो ग्लोबल स्टैंडर्ड के हिसाब से हाई-क्वालिटी प्रोफेशनल एजुकेशन और इंडस्ट्री-एकेडेमिया के बीच मजबूत सहयोग को सपोर्ट करें.''

ABP एजुकेशन के CEO यश मेहता का कहना है,

यश मेहताCEO, ABP Education

ABP एजुकेशन के CEO यश मेहता का कहना है, "जैसे-जैसे भारत यूनियन बजट 2026-27 की ओर बढ़ रहा है, एजुकेशन सेक्टर एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है. हालांकि एक्सेस और इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार प्रगति हुई है, लेकिन अब फोकस क्वालिटी, सीखने के नतीजों और भविष्य की तैयारी पर होना चाहिए. आने वाला बजट एक समावेशी शिक्षा इकोसिस्टम बनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर देता है."

SBI जनरल इंश्योरेंस के MD और CEO नवीन चंद्र झा कहते हैं,

नवीन चंद्र झाMD & CEO, SBI General Insurance

SBI जनरल इंश्योरेंस के MD और CEO नवीन चंद्र झा कहते हैं, "जैसे ही हम यूनियन बजट 2026 के करीब पहुंच रहे हैं, जनरल इंश्योरेंस सेक्टर एक अहम मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है, जो तेजी से टॉपलाइन विस्तार से स्थायी, अनुशासित विकास की ओर बढ़ रहा है. मजबूत रेगुलेशन, बेहतर क्लेम गवर्नेंस और बढ़ती कस्टमर उम्मीदें एक ज्यादा पारदर्शी और कैपिटल-एफिशिएंट इकोसिस्टम को बढ़ावा दे रही हैं. बजट बीमा की पहुंच और सामर्थ्य को बेहतर बनाकर इंश्योरेंस पेनिट्रेशन को बढ़ाने का मौका देता है, खासकर छोटे व्यवसायों, ग्रामीण परिवारों और पहली बार खरीदने वालों के लिए."

हेड ऑफ APAC, Binance SB सेकर कह रहे हैं,

SB सेकरHead of APAC, Binance

हेड ऑफ APAC, Binance SB सेकर कह रहे हैं, "भारत में ब्लॉकचेन और वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) को तेजी से अपनाना उसकी डिजिटल इकॉनमी के पैमाने और रिटेल यूज़र्स की बढ़ती भागीदारी को दिखाता है. आने वाला बजट VDA इकोसिस्टम को मजबूत करने का एक मौका देता है, जिसमें सोच-समझकर रेगुलेटरी और टैक्स सुधार किए जाएं जो यूजर्स की सुरक्षा करें, फाइनेंशियल स्टेबिलिटी बनाए रखें और मार्केट डेवलपमेंट को सपोर्ट करें.''

गोदरेज कैपिटल के MD और CEO मनीष शाह ने कहा,

मनीष शाहMD & CEO, Godrej Capital

गोदरेज कैपिटल के MD और CEO मनीष शाह ने कहा, "जैसे-जैसे भारत फाइनेंशियल सेक्टर में अगले फेज में आगे बढ़ रहा है, फोकस सिर्फ क्रेडिट बढ़ाने से हटकर फाइनेंस की क्वालिटी, एक्सेसिबिलिटी और सस्टेनेबिलिटी को बेहतर बनाने पर होना चाहिए. हालांकि कैपिटल की उपलब्धता में सुधार हुआ है, लेकिन असली मौका फाइनेंस को ज्यादा किफायती, फ्लेक्सिबल बनाने और घरों, MSMEs और नए एंटरप्रेन्योर्स के कैश-फ्लो की असलियत के हिसाब से बनाने में है. बजट 2026 घरेलू लिक्विडिटी को बढ़ाकर और क्रेडिट गारंटी और को-लेंडिंग स्ट्रक्चर जैसे रिस्क-शेयरिंग फ्रेमवर्क को मजबूत करके एक अहम भूमिका निभा सकता है."

बजाज लाइफ इंश्योरेंस के MD और CEO तरुण चुघ कहते हैं, ''जैसे-जैसे यूनियन बजट पास आ रहा है, यह ज्यादा लगातार और बराबर पॉलिसी सपोर्ट के जरिए लाइफ इंश्योरेंस को लॉन्ग-टर्म बचत और रिटायरमेंट सॉल्यूशन के तौर पर मजबूत करने का मौका देता है. हाल के पॉलिसी उपायों जैसे इंश्योरेंस प्रीमियम को GST से छूट देना, ने सेक्टर की ग्रोथ के लिए एक मजबूत नींव रखी है और बजट सोच-समझकर, नतीजे देने वाले उपायों के जरिए इस गति को और आगे बढ़ा सकता है.''

तरुण चुघMD & CEO, Bajaj Life Insurance

बजाज लाइफ इंश्योरेंस के MD और CEO तरुण चुघ कहते हैं, ''जैसे-जैसे यूनियन बजट पास आ रहा है, यह ज्यादा लगातार और बराबर पॉलिसी सपोर्ट के जरिए लाइफ इंश्योरेंस को लॉन्ग-टर्म बचत और रिटायरमेंट सॉल्यूशन के तौर पर मजबूत करने का मौका देता है. हाल के पॉलिसी उपायों जैसे इंश्योरेंस प्रीमियम को GST से छूट देना, ने सेक्टर की ग्रोथ के लिए एक मजबूत नींव रखी है और बजट सोच-समझकर, नतीजे देने वाले उपायों के जरिए इस गति को और आगे बढ़ा सकता है.''

मुथूट फाइनेंस के MD जॉर्ज अलेक्जेंडर मुथूट कह रहे हैं, ''जैसे-जैसे हम यूनियन बजट 2026 के करीब पहुंच रहे हैं, हम उम्मीद करते हैं कि सरकार ऐसे उपायों को प्राथमिकता देना जारी रखेगी जो पहली बार लोन लेने वालों और जरूरतमंद उधारकर्ताओं के लिए फॉर्मल क्रेडिट तक पहुंच को बेहतर बनाएंगे. किफायती, सुरक्षित लोन फाइनेंशियल इन्क्लूजन को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाते हैं, खासकर उन परिवारों और छोटे कारोबारियों के लिए जिन्हें अक्सर पारंपरिक बैंकिंग प्रोडक्ट्स तक पहुंच नहीं मिल पाती है.''

जॉर्ज अलेक्जेंडर मुथूटMD, Muthoot Finance

मुथूट फाइनेंस के MD जॉर्ज अलेक्जेंडर मुथूट कह रहे हैं, ''जैसे-जैसे हम यूनियन बजट 2026 के करीब पहुंच रहे हैं, हम उम्मीद करते हैं कि सरकार ऐसे उपायों को प्राथमिकता देना जारी रखेगी जो पहली बार लोन लेने वालों और जरूरतमंद उधारकर्ताओं के लिए फॉर्मल क्रेडिट तक पहुंच को बेहतर बनाएंगे. किफायती, सुरक्षित लोन फाइनेंशियल इन्क्लूजन को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाते हैं, खासकर उन परिवारों और छोटे कारोबारियों के लिए जिन्हें अक्सर पारंपरिक बैंकिंग प्रोडक्ट्स तक पहुंच नहीं मिल पाती है.''

सेक्‍टोरल रिपोर्ट

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लेटेस्‍ट स्‍टोरीज

बजट टाइमलाइन

2025

2025: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश के सामने अपना 8वां पूर्ण बजट पेश करने वाली हैं. देश की 140 करोड़ की आबादी को इस बजट से बहुत उम्मीदें हैं. साल 2014 से लेकर  23 जुलाई 2024 तक मोदी सरकार के 13 बजट (11 पूर्ण बजट और दो अंतरिम बजट) देश के सामने पेश हो चुके हैं. 2025 के इस आम बजट में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों को केंद्र में रखकर कई योजनाओं की घोषणा हो सकती है. इसके साथ ही, डिफेंस, एआई, रियल एस्टेट और कृषि क्षेत्र से जुड़ी कई बड़ी घोषणाओं के होने की भी उम्मीद है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस साल का आम बजट 1 फरवरी 2025 को सुबह 11 बजे देश के सामने पेश करेंगी.

निर्मला सीतारमण

2025: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश के सामने अपना 8वां पूर्ण बजट पेश करने वाली हैं. देश की 140 करोड़ की आबादी को इस बजट से बहुत उम्मीदें हैं. साल 2014 से लेकर 23 जुलाई 2024 तक मोदी सरकार के 13 बजट (11 पूर्ण बजट और दो अंतरिम बजट) देश के सामने पेश हो चुके हैं. 2025 के इस आम बजट में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों को केंद्र में रखकर कई योजनाओं की घोषणा हो सकती है. इसके साथ ही, डिफेंस, एआई, रियल एस्टेट और कृषि क्षेत्र से जुड़ी कई बड़ी घोषणाओं के होने की भी उम्मीद है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस साल का आम बजट 1 फरवरी 2025 को सुबह 11 बजे देश के सामने पेश करेंगी.

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2024

2024: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक बार फिर देश की 140 करोड़ जनता की उम्मीदों को उड़ान देने के लिए नए बजट के साथ अपनी तैयरी में जुटी हुई हैं. नौकरीपेशा से लेकर किसान तक, महिलाओं से लेकर युवाओं तक. टेलीकॉम सेक्टर से लेकर रीयल स्टेट तक. सभी अपने अपने हिसाब से उम्मीदें बांधे हुए हैं. टैक्स स्लैब में कमी की आशा सभी को है. भारत में युवाओं के सामने सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी की है और हर तरफ से यही पुकार है- नई नौकरी के रास्ते निकले, मौके बने. अब इन सवालों के जवाब के दिन करीब हैं.

निर्मला सीतारमण

2024: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक बार फिर देश की 140 करोड़ जनता की उम्मीदों को उड़ान देने के लिए नए बजट के साथ अपनी तैयरी में जुटी हुई हैं. नौकरीपेशा से लेकर किसान तक, महिलाओं से लेकर युवाओं तक. टेलीकॉम सेक्टर से लेकर रीयल स्टेट तक. सभी अपने अपने हिसाब से उम्मीदें बांधे हुए हैं. टैक्स स्लैब में कमी की आशा सभी को है. भारत में युवाओं के सामने सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी की है और हर तरफ से यही पुकार है- नई नौकरी के रास्ते निकले, मौके बने. अब इन सवालों के जवाब के दिन करीब हैं.

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2023

2023: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स स्लैब में कोई बदलाव तो नहीं किया, लेकिन न्यू रिजीम में बेसिक एक्जेम्पशन को 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दिया. न्यू टैक्स रिजीम में पहली बार 50 हजार के स्टैंडर्ड डिडक्शन को जगह मिली. सरकार का कैपेक्स बढ़कर पहली बार 10 लाख करोड़ रुपये हुआ. कृषि को बढ़ावा देने के लिए एग्रीकल्चर एक्सीलेटर फंड की घोषणा की गई. -

निर्मला सीतारमण

2023: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स स्लैब में कोई बदलाव तो नहीं किया, लेकिन न्यू रिजीम में बेसिक एक्जेम्पशन को 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दिया. न्यू टैक्स रिजीम में पहली बार 50 हजार के स्टैंडर्ड डिडक्शन को जगह मिली. सरकार का कैपेक्स बढ़कर पहली बार 10 लाख करोड़ रुपये हुआ. कृषि को बढ़ावा देने के लिए एग्रीकल्चर एक्सीलेटर फंड की घोषणा की गई. -

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2022

2022: साल 2022 के बजट में अमृत काल के रूप में अगले 25 साल की आर्थिक वृद्धि का खाका पेश किया गया. भारत में पहली बार क्रिप्टो एसेट पर टैक्स लगाया गया. कॉरपोरेट सरचार्ज को 12 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी कर दिया गया.

निर्मला सीतारमण

2022: साल 2022 के बजट में अमृत काल के रूप में अगले 25 साल की आर्थिक वृद्धि का खाका पेश किया गया. भारत में पहली बार क्रिप्टो एसेट पर टैक्स लगाया गया. कॉरपोरेट सरचार्ज को 12 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी कर दिया गया.

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2021

2021: साल 2021 का बजट कोरोना महामारी से जूझ रही अर्थव्यवस्था को उबारने पर फोकस था. बजट में सरकार ने बुनियादी संरचनाओं पर खर्च करने पर जोर दिया था. टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ. पेट्रोल और डीजल पर पहली बार एग्री सेस लगा.

निर्मला सीतारमण

2021: साल 2021 का बजट कोरोना महामारी से जूझ रही अर्थव्यवस्था को उबारने पर फोकस था. बजट में सरकार ने बुनियादी संरचनाओं पर खर्च करने पर जोर दिया था. टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ. पेट्रोल और डीजल पर पहली बार एग्री सेस लगा.

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2020

2020: 2020 के बजट को सबसे लंबे बजट भाषण के लिए भी याद किया जाता है. वित्त मंत्री सीतारमण ने 2 घंटे 42 मिनट का बजट भाषण दिया था और एक साल पहले 2019 में दिए 2 घंटे 7 मिनट के रिकॉर्ड को तोड़ा था. बजट में कृषि क्षेत्र की बेहतरी के लिए 16 सूत्रीय कार्य योजना पेश की गई. न्यू टैक्स रिजीम के साथ इनकम टैक्स की दरें घटाकर मध्यम वर्ग को राहत प्रदान किया गया.

निर्मला सीतारमण

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2019

2019: मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में वित्त मंत्रालय का जिम्मा निर्मला सीतारमण को मिला और उन्होंने 2019 में अपना पहला बजट पेश किया. देश के इतिहास में पहली बार किसी महिला वित्त मंत्री ने बजट पेश किया. इससे पहले इंदिरा गांधी भी 1970 में बजट पेश कर चुकी थीं, लेकिन वह प्रधानमंत्री थीं. अपने पहले बजट में निर्मला सीतारमण ने ब्रीफकेस की परंपरा बदल दी और बही-खाते के रूप में बजट पेश किया.

निर्मला सीतारमण

2019: मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में वित्त मंत्रालय का जिम्मा निर्मला सीतारमण को मिला और उन्होंने 2019 में अपना पहला बजट पेश किया. देश के इतिहास में पहली बार किसी महिला वित्त मंत्री ने बजट पेश किया. इससे पहले इंदिरा गांधी भी 1970 में बजट पेश कर चुकी थीं, लेकिन वह प्रधानमंत्री थीं. अपने पहले बजट में निर्मला सीतारमण ने ब्रीफकेस की परंपरा बदल दी और बही-खाते के रूप में बजट पेश किया.

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2018

2018: तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली का यह पांचवां और अंतिम बजट में था. जीएसटी लागू होने के बाद 2018 में पहला बजट पेश हुआ. बजट में खरीफ फसलों की एमएसपी बढ़ाकर लागत की डेढ़ गुनी की गई. 8 करोड़ गरीब महिलाओं को गैस कनेक्शन दिए जाने का ऐलान हुआ.

अरुण जेटली

2018: तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली का यह पांचवां और अंतिम बजट में था. जीएसटी लागू होने के बाद 2018 में पहला बजट पेश हुआ. बजट में खरीफ फसलों की एमएसपी बढ़ाकर लागत की डेढ़ गुनी की गई. 8 करोड़ गरीब महिलाओं को गैस कनेक्शन दिए जाने का ऐलान हुआ.

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2017

2017: साल 2017 से पहले तक आम बजट और रेल बजट अलग-अलग पेश किए जाते थे. आम बजट वित्त मंत्री के द्वारा पेश किया जाता था, जबकि रेल मंत्री के द्वारा रेल बजट को पेश किया जाता था. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2017 में रेल बजट को आम बजट के साथ मिला दिया. उसके बाद से अब रेल बजट आम बजट के हिस्से के रूप में आता है. इसी के साथ बजट की तारीख भी बदल गई. फरवरी महीने की अंतिम तारीख यानी 28/29 फरवरी के बजाय पहली बार 1 फरवरी को बजट पेश हुआ.

अरुण जेटली

2017: साल 2017 से पहले तक आम बजट और रेल बजट अलग-अलग पेश किए जाते थे. आम बजट वित्त मंत्री के द्वारा पेश किया जाता था, जबकि रेल मंत्री के द्वारा रेल बजट को पेश किया जाता था. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2017 में रेल बजट को आम बजट के साथ मिला दिया. उसके बाद से अब रेल बजट आम बजट के हिस्से के रूप में आता है. इसी के साथ बजट की तारीख भी बदल गई. फरवरी महीने की अंतिम तारीख यानी 28/29 फरवरी के बजाय पहली बार 1 फरवरी को बजट पेश हुआ.

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2005

2005: मनमोहन सरकार के दौरान 2005 में पेश किए गए बजट को आम आदमी बजट भी कहा जाता है. इसे तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने पेश किया था. 2005 में आए बजट में कॉरपोरेट टैक्स और कस्टम ड्यूटी की दरें कम की गई थीं. ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अहम रोजगार गारंटी योजना मनरेगा और सूचना के अधिकार की शुरुआत भी उसी बजट में हुई थी.

पी चिदंबरम

2005: मनमोहन सरकार के दौरान 2005 में पेश किए गए बजट को आम आदमी बजट भी कहा जाता है. इसे तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने पेश किया था. 2005 में आए बजट में कॉरपोरेट टैक्स और कस्टम ड्यूटी की दरें कम की गई थीं. ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अहम रोजगार गारंटी योजना मनरेगा और सूचना के अधिकार की शुरुआत भी उसी बजट में हुई थी.

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2000

2000: साल 2000 में आए बजट को मिलेनियम बजट भी कहा जाता है. तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने 2000-2001 के लिए मिलेनियम बजट पेश किया था. उसी बजट में देश को तकनीक का हब बनाने की नींव रखी गई. वाजपेयी सरकारने उस बजट में ऑप्टिकल फाइबर बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों पर कस्टम ड्यूटी को घटाकर 10 फीसदी कर दिया था. मोबाइल फोन बनाने वाली सामग्रियों पर ड्यूटी घटाकर 20 फीसदी कर दी गई थी. इस बजट की एक और खास बात समय में बदलाव है. इससे पहले बजट शाम में 5 बजे आता था. पहली बार 2000 में दिन के 11 बजे बजट पेश किया गया.

यशवंत सिन्हा

2000: साल 2000 में आए बजट को मिलेनियम बजट भी कहा जाता है. तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने 2000-2001 के लिए मिलेनियम बजट पेश किया था. उसी बजट में देश को तकनीक का हब बनाने की नींव रखी गई. वाजपेयी सरकारने उस बजट में ऑप्टिकल फाइबर बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों पर कस्टम ड्यूटी को घटाकर 10 फीसदी कर दिया था. मोबाइल फोन बनाने वाली सामग्रियों पर ड्यूटी घटाकर 20 फीसदी कर दी गई थी. इस बजट की एक और खास बात समय में बदलाव है. इससे पहले बजट शाम में 5 बजे आता था. पहली बार 2000 में दिन के 11 बजे बजट पेश किया गया.

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1997

1997: तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भारतीय अर्थव्यवस्था की सूरत बदलने वाले सबसे अहम बजट में से एक पेश किया था. उसे ड्रीम बजट भी कहा जाता है. उसी बजट में इनकम टैक्स की दरें उदार बनाई गई थीं और कस्टम ड्यूटी में भी कटौती की गई थी. सरकार ने काला धन पर रोक लगाने के लिए उसी बजट में आय की स्वेच्छा से खुलासा करने वाली योजना की शुरुआत की थी.

पी चिदंबरम

1997: तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भारतीय अर्थव्यवस्था की सूरत बदलने वाले सबसे अहम बजट में से एक पेश किया था. उसे ड्रीम बजट भी कहा जाता है. उसी बजट में इनकम टैक्स की दरें उदार बनाई गई थीं और कस्टम ड्यूटी में भी कटौती की गई थी. सरकार ने काला धन पर रोक लगाने के लिए उसी बजट में आय की स्वेच्छा से खुलासा करने वाली योजना की शुरुआत की थी.

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1991

1991: आधुनिक भारतीय अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ 1991 के बजट में ही तैयार किए गए. तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की सरकार ने देश में आर्थिक उदारीकरण और वैश्वीकरण की शुरुआत की. तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने भारतीय इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण बजट में से एक पेश करते हुए अर्थव्यवस्था को विदेशी निवेशकों के लिए खोलने का ऐलान किया था और कई व्यापारिक पाबंदियों को दूर किया था.

मनमोहन सिंह

1991: आधुनिक भारतीय अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ 1991 के बजट में ही तैयार किए गए. तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की सरकार ने देश में आर्थिक उदारीकरण और वैश्वीकरण की शुरुआत की. तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने भारतीय इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण बजट में से एक पेश करते हुए अर्थव्यवस्था को विदेशी निवेशकों के लिए खोलने का ऐलान किया था और कई व्यापारिक पाबंदियों को दूर किया था.

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1986

1986: अप्रत्यक्ष कर के मोर्चे पर जीएसटी से पहले बड़े सुधार का सूत्रपात 1986 के बजट में हुआ था, जिसे पेश किया था वीपी सिंह ने. वीपी सिंह के उस बजट में मोडवैट क्रेडिट की शुरुआत की गई. इससे कच्चे माल पर भुगतान किए गए टैक्स के बदले तैयार उत्पाद के फाइनल टैक्स पर टैक्स क्रेडिट का लाभ मिलने लगा. इसने तैयार माल की कीमतों पर पड़ने वाले कैसकेडिंग इफेक्ट की विसंगति को दूर किया.

वीपी सिंह

1986: अप्रत्यक्ष कर के मोर्चे पर जीएसटी से पहले बड़े सुधार का सूत्रपात 1986 के बजट में हुआ था, जिसे पेश किया था वीपी सिंह ने. वीपी सिंह के उस बजट में मोडवैट क्रेडिट की शुरुआत की गई. इससे कच्चे माल पर भुगतान किए गए टैक्स के बदले तैयार उत्पाद के फाइनल टैक्स पर टैक्स क्रेडिट का लाभ मिलने लगा. इसने तैयार माल की कीमतों पर पड़ने वाले कैसकेडिंग इफेक्ट की विसंगति को दूर किया.

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1973

1973: 1973 में आए बजट को ब्लैक बजट के नाम से जाना जाता है. उस समय देश गंभीर आर्थिक संकटों में घिरा हुआ था. इंदिरा गांधी सरकार में वह बजट पेश किया था वाईबी चव्हाण ने. वह 550 करोड़ रुपये के घाटे वाला बजट था. उस बजट में कोयला खदानों, बीमा कंपनियों समेत कई सरकारी कंपनियों का राष्ट्रीयकरण भी किया गया था.

इंदिरा गांधी

1973: 1973 में आए बजट को ब्लैक बजट के नाम से जाना जाता है. उस समय देश गंभीर आर्थिक संकटों में घिरा हुआ था. इंदिरा गांधी सरकार में वह बजट पेश किया था वाईबी चव्हाण ने. वह 550 करोड़ रुपये के घाटे वाला बजट था. उस बजट में कोयला खदानों, बीमा कंपनियों समेत कई सरकारी कंपनियों का राष्ट्रीयकरण भी किया गया था.

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1968

1968: तत्कालीन उप-प्रधानमंत्री व वित्त मंत्री मोरारजी देसाई के द्वारा पेश किए गए बजट में पहली बार सेल्फ-असेसमेंट का कॉन्सेप्ट भारत में आया. सरकार ने फैक्ट्रियों के गेट पर एक्साइज डिपार्टमेंट के अधिकारियों के द्वारा मुहर लगाने की जरूरत को समाप्त कर दिया और मैन्युफैक्चरर्स को सेल्फ-असेसमेंट का अधिकार दिया गया. इसने देश में विनिर्माण को बढ़ावा दिया.

मोरारजी देसाई

1968: तत्कालीन उप-प्रधानमंत्री व वित्त मंत्री मोरारजी देसाई के द्वारा पेश किए गए बजट में पहली बार सेल्फ-असेसमेंट का कॉन्सेप्ट भारत में आया. सरकार ने फैक्ट्रियों के गेट पर एक्साइज डिपार्टमेंट के अधिकारियों के द्वारा मुहर लगाने की जरूरत को समाप्त कर दिया और मैन्युफैक्चरर्स को सेल्फ-असेसमेंट का अधिकार दिया गया. इसने देश में विनिर्माण को बढ़ावा दिया.

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1957

1957: आप अगर लाइसेंस राज शब्द से परिचित हैं तो जान लीजिए कि उसकी नींव रखी गई थी 1957 के बजट में, जिसे पेश किया था टीटी कृष्णमचारी ने. उसी बजट में आयात पर पाबंदियां लगाई गईं और लाइसेंस सिस्टम की शुरुआत की गई. बजट में एक्साइज ड्यूटी 400 पर्सेंट तक बढ़ा दी गई. इनकम टैक्स की दरें बढ़ाई गईं. पहली बार वेल्थ टैक्स और रेलवे पैसैंजर किराए पर टैक्स लगा.

टीटी कृष्णमचारी

1957: आप अगर लाइसेंस राज शब्द से परिचित हैं तो जान लीजिए कि उसकी नींव रखी गई थी 1957 के बजट में, जिसे पेश किया था टीटी कृष्णमचारी ने. उसी बजट में आयात पर पाबंदियां लगाई गईं और लाइसेंस सिस्टम की शुरुआत की गई. बजट में एक्साइज ड्यूटी 400 पर्सेंट तक बढ़ा दी गई. इनकम टैक्स की दरें बढ़ाई गईं. पहली बार वेल्थ टैक्स और रेलवे पैसैंजर किराए पर टैक्स लगा.

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1955

1955: आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि लंबे समय तक भारत के बजट का प्रकाशन किसी भी भारतीय भाषा में नहीं होता था. साल 1955 में जाकर स्थिति बदली, जब पहली बार हिन्दी में भी बजट प्रकाशित हुआ. उससे पहले तक बजट का प्रकाशन सिर्फ अंग्रेजी में होता था. हिन्दी में भारत का बजट लाने का श्रेय जाता है आजाद भारत के तीसरे वित्त मंत्री व रिजर्व बैंक के पहले गवर्नर सीडी देशमुख को.

सीडी देशमुख

1955: आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि लंबे समय तक भारत के बजट का प्रकाशन किसी भी भारतीय भाषा में नहीं होता था. साल 1955 में जाकर स्थिति बदली, जब पहली बार हिन्दी में भी बजट प्रकाशित हुआ. उससे पहले तक बजट का प्रकाशन सिर्फ अंग्रेजी में होता था. हिन्दी में भारत का बजट लाने का श्रेय जाता है आजाद भारत के तीसरे वित्त मंत्री व रिजर्व बैंक के पहले गवर्नर सीडी देशमुख को.

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1951

1951: इसे भारतीय गणराज्य यानी रिपब्लिक ऑफ इंडिया का पहला बजट कहा जाता है. नेहरू सरकार में वह बजट पेश किया था जॉन मथाई ने, जो उस समय केंद्रीय वित्त मंत्री थे. 28 जनवरी 1950 को पेश हुए बजट में ही अर्थव्यवस्था के अहम फैसलों की जिम्मेदारी योजना आयोग को दी गई थी, जिसे बाद में मोदी सरकार ने बदलकर नीति आयोग बना दिया.

जॉन मथाई

1951: इसे भारतीय गणराज्य यानी रिपब्लिक ऑफ इंडिया का पहला बजट कहा जाता है. नेहरू सरकार में वह बजट पेश किया था जॉन मथाई ने, जो उस समय केंद्रीय वित्त मंत्री थे. 28 जनवरी 1950 को पेश हुए बजट में ही अर्थव्यवस्था के अहम फैसलों की जिम्मेदारी योजना आयोग को दी गई थी, जिसे बाद में मोदी सरकार ने बदलकर नीति आयोग बना दिया.

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1950

1950: बजट तैयार करने की प्रक्रिया बेहद गोपनीय होती है. इस गोपनीयता की शुरुआत होती है 1950 से. बजट से संबंधित दस्तावेजों के लीक हो जाने के बाद 1950 से बजट तैयार करने की प्रक्रिया सख्त हो गई और प्रकाशन का कार्य राष्ट्रपति भवन से मिंटो रोड स्थित सरकारी प्रेस में शिफ्ट कर दिया गया. 1980 के बाद से अब तक बजट का प्रकाशन नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में होता आ रहा है.

जॉन मथाई

1950: बजट तैयार करने की प्रक्रिया बेहद गोपनीय होती है. इस गोपनीयता की शुरुआत होती है 1950 से. बजट से संबंधित दस्तावेजों के लीक हो जाने के बाद 1950 से बजट तैयार करने की प्रक्रिया सख्त हो गई और प्रकाशन का कार्य राष्ट्रपति भवन से मिंटो रोड स्थित सरकारी प्रेस में शिफ्ट कर दिया गया. 1980 के बाद से अब तक बजट का प्रकाशन नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में होता आ रहा है.

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1947

1947: आजाद भारत का पहला बजट आजादी के साल यानी 1947 में ही आया. अगस्त में आजादी मिलने के कुछ महीने बाद 26 नवंबर 1947 को आजाद भारत का पहला बजट पेश किया गया. इसे पेश करने का श्रेय मिला आरके शणमुखम चेट्टी को. आजाद भारत का पहला बजट कुछ ही महीने के लिए था. इसमें 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 तक के समय को कवर किया गया था. आजाद भारत के पहले बजट को ये बात भी खास बनाती है कि उसमें टैक्स से संबंधित कोई प्रस्ताव नहीं था.

शणमुखम चेट्टी

1947: आजाद भारत का पहला बजट आजादी के साल यानी 1947 में ही आया. अगस्त में आजादी मिलने के कुछ महीने बाद 26 नवंबर 1947 को आजाद भारत का पहला बजट पेश किया गया. इसे पेश करने का श्रेय मिला आरके शणमुखम चेट्टी को. आजाद भारत का पहला बजट कुछ ही महीने के लिए था. इसमें 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 तक के समय को कवर किया गया था. आजाद भारत के पहले बजट को ये बात भी खास बनाती है कि उसमें टैक्स से संबंधित कोई प्रस्ताव नहीं था.

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1860

1860: भारत के बजट का इतिहास 160 साल से ज्यादा पुराना है. देश में सबसे पहली बार बजट पेश हुआ था अप्रैल 1860 में. 1857 की क्रांति के बाद ब्रिटिश सरकार ने भारत का शासन ईस्ट इंडिया कंपनी से अपने हाथों में ले लिया था. उसके बाद पहली बार भारत का बजट आया था, जिसे पेश किया था जेम्स विल्सन ने. जेम्स विल्सन स्कॉटलैंड के थे और ईस्ट इंडिया कंपनी से जुड़े हुए अर्थशास्त्री थे.

जेम्स विल्सन

1860: भारत के बजट का इतिहास 160 साल से ज्यादा पुराना है. देश में सबसे पहली बार बजट पेश हुआ था अप्रैल 1860 में. 1857 की क्रांति के बाद ब्रिटिश सरकार ने भारत का शासन ईस्ट इंडिया कंपनी से अपने हाथों में ले लिया था. उसके बाद पहली बार भारत का बजट आया था, जिसे पेश किया था जेम्स विल्सन ने. जेम्स विल्सन स्कॉटलैंड के थे और ईस्ट इंडिया कंपनी से जुड़े हुए अर्थशास्त्री थे.

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Tax Rules अब हुए Easy, न रहेगा Pressure न कोई Panic | Paisa Live
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अक्‍सर पूछे जाने वाले प्रश्‍न

'बजट' शब्द कहां से आया? 

'Budget' शब्द फ्रांसीसी भाषा के 'बॉजेट' शब्द से आया है, जिसका मतलब लेदर का एक छोटा सा थैला या ब्रीफकेस होता है, जिसका इस्तेमाल पहले आमतौर फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट्स रखने के लिए किया जाता है. यही वजह है कि पहले बजट पेश करने के लिए लेदर का बैग लेकर ही आया जाता था. 

1 फरवरी को ही क्यों हर बार बजट पेश किया जाता है? 

केंद्रीय बजट हर साल 1 फरवरी को पेश किया जाता है ताकि 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्त वर्ष से पहले अगर प्रस्तावित कानून या बदलाव को लागू करने के लिए पर्याप्त समय मिले. इसकी एक और वजह पूरे सालभर के लिए वित्तीय योजना, आर्थिक रणनीतियों को बनाने और उन्हें पूरा करने के लिए सरकार को भी पर्याप्त समय देना है. 

सबसे ज्यादा बार किस वित्त मंत्री ने पेश किया बजट?

सबसे ज्यादा बार बजटपेश करने का रिकॉर्ड मोरारजी देसाई के नाम पर है. वह 10 बार केंद्रीय बजट पेश कर चुके हैं. यह भारत के किसी भी वित्त मंत्री के लिए सबसे अधिक है.

सबसे लंबा बजट भाषण किसने दिया?

यह रिकॉर्ड अरुण जेटली के नाम है. साल 2014 में उन्होंने 2.5 घंटे का बजट भाषण देकर यह यह रिकॉर्ड बनाया.

पहले शाम के 5 बजे क्यों पेश किया जाता था बजट?

1999 से पहले आम बजट शाम के 5 बजे पेश किया जाता था. यह अंग्रेजो के जमाने से चली आ रही एक परंपरा थी, जिसके पीछे वजह बजट से जुड़ी सारी जानकारी लंदन के कामकाजी समय में समय पर पहुंचाई जा सके. भारत में जब शाम के 5 बज रहे होते थे, उस समय ब्रिटेन में दोपहर के करीब 12.30 बजे का समय होता था. 1999 अटल विहारी बाजपेयी की सरकार में वित्त मंत्री जसवंत सिंह ने इसे बदलकर सुबह 11 बजे कर दिया ताकि सांसदों, एक्सपर्ट्स और देश की आम जनता को बजट के बारे में पूरी तरह से सोचने-समझने में पूरे दिन का वक्त मिल सके. 

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