नई दिल्ली: बेहद बुरे दौर से गुज़र रहे ऑटोमोबाइल उद्योग को बजट से बूस्टर डोज़ मिलने की उम्मीद है. कार निर्माता कंपनियों से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं के लिए बजट में बड़ी सौगातों का एलान हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक ऑटोमोबाइल उद्योग की सुस्त रफ्तार को स्पीड देने के लिए बजट में टैक्स कटौती से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई बड़ी घोषणाएं हो सकती हैं.


ऑटोमोबाइल उद्योग की हालत को इस आंकड़े के साथ समझा जा सकता है कि मई 2019 में पैसेंजर वाहनों की बिक्री में बीते 18 वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. पैसेंजर वाहनों की बिक्री मई 2019 में मई 2018 के मुकाबले 20.55% गिरी है. वहीं कमर्शियल वाहन जैसे बस, ट्रक आदि की बिक्री 10 फीसदी से ज़्यादा गिरी है तो दुपहिया वाहनों की बिक्री भी 7% से ज़्यादा घटी है.


ऑटोमोबाइल उद्योग को देश की अर्थव्यवस्था का आइना माना जाता है. ऐसे में सुस्त पड़े ऑटोमोबाइल उद्योग को रफ्तार देने के लिए सरकार बजट में कई अहम घोषणाएं कर सकती है. सूत्रों का कहना है कि जीएसटी दरों में कोई बदलाव मुमकिन नहीं है. लेकिन, कंपनियों के कॉर्पोरेट टैक्स को घटाकर 25% पर लाया जा सकता है. इसके अलावा रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर अतिरिक्त छूट भी दी जा सकती है. इन कदमों से कार कंपनियों का मुनाफा बढ़ेगा तो वो वाहनों की कीमतें कम कर बिक्री को दोबारा से पटरी पर ला सकती हैं.


आगामी बजट में सबसे बड़ी सौगात इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनियों को मिल सकती है. सूत्रों का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए टैक्स इंसेंटिव मिल सकते हैं. इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता इकाई लगाने के लिए इन्वेस्टमेंट लिंक्ड इंसेंटिव दिए जा सकते हैं. इसके अलावा SEZ में मिलने वाली टैक्स छूट को 2020 से बढ़ाकर 2025 तक किया जा सकता है.


वहीं इलेक्ट्रिक वाहनों के कल पुर्ज़ों पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को भी कई श्रेणियों में घटाया जा सकता है. इलेक्ट्रिक वाहनों में लगने वाली बैटरियों को सस्ता करने के मकसद से टैक्स घटाया जा सकता है.


अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए ऑटो उद्योग को पटरी पर लाना बेहद ज़रूरी है. ऐसे में आगामी बजट से ऑटो कंपनियों को कई सौगातें मिल सकती हैं. वहीं, दूसरी तरफ इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए भी बजट में कई अहम घोषणाएं हो सकती हैं.