Byju Crisis: बायजू का संकट और बढ़ा, दो बड़े नाम छोड़ेंगे एडटेक कंपनी का साथ
Think & Learn: इन दोनों दिग्गजों को बायजू रविंद्रन को सलाह देने के लिए लाया गया था. मगर, कंपनी के खिलाफ देश और विदेश में चल रहे केसों के चलते इन्होंने कार्यकाल न बढ़ाने का फैसला किया है.

Think & Learn: संकट में फंसी एडटेक कंपनी बायजू (Byju’s) के लिए एक और बुरी खबर है. बायजू की पैरेंट कंपनी थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड (Think & Learn) के सलाहकार पैनल में शामिल दो बड़े नाम रजनीश कुमार (Rajnish Kumar) और टीवी मोहनदास पई (T.V. Mohandas Pai) उसे बीच भंवर में छोड़कर जाना चाहते हैं. पिछले साल कंपनी से जुड़े इन दोनों दिग्गजों का कार्यकाल 30 जून को खत्म हो रहा है. उन्होंने इसे आगे न बढ़ाने की इच्छा जताई है.
पिछले साल जुड़े थे रजनीश कुमार और टीवी मोहनदास पई
पिछले साल जून में बायजू के फाउंडर बायजू रविंद्रन (Byju Raveendran) के सलाहकार के तौर पर रजनीश कुमार और टीवी मोहनदास पई ने कंपनी ज्वॉइन की थी. उस समय कंपनी वित्तीय संकटों में फंसी थी और कई शेयरहोल्डर्स का बायजू रविंद्रन के साथ झगड़ा बढ़ चुका था. कंपनी के खिलाफ कई केस शुरू हो चुके थे. साथ ही कई बड़े नाम कंपनी छोड़कर जा चुके थे. इसके बाद एसबीआई के पूर्व चेयरमैन रजनीश कुमार और इंफोसिस के पूर्व सीएफओ मोहनदास पई को सलाहकार समिति में लाया गया था.
कंपनी के खिलाफ चल रहे केस बने इनके जाने का कारण
लाइव मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों दिग्गजों ने अपने निर्णय की जानकारी थिंक एंड लर्न के बोर्ड को दे दी है. सूत्रों के अनुसार, इन दोनों के जाने का बड़ा कारण बायजू के खिलाफ देश और विदेश में चल रहे केस हैं. बायजू के कुछ बड़े शेयरहोल्डर्स बायजू रविंद्रन को पद से हटाना चाहते हैं. सलाहकार समिति का मुख्य काम कंपनी की वित्तीय स्थिति सुधारना, नई टीम बनाना और शेयरहोल्डर्स से बातचीत करना था. मगर, कानूनी विवादों के चलते अभी तक इनमें से किसी में भी सफलता नहीं मिली है.
कंपनी में बड़े पैमाने पर छंटनी, मुश्किल से मिलती है सैलरी
बायजू का उत्थान और पतन दोनों ही भारतीय कारोबार जगत में अद्भुत कहानियां हैं. तेजी से बढ़ते हुए इस स्टार्टअप ने साल 2022 तक 22 अरब डॉलर का मार्केट वैल्यूएशन हासिल कर लिया था. मगर, इस साल कंपनी की वैल्यूएशन सिर्फ 1 अरब डॉलर आंकी गई थी. साथ ही फोर्ब्स ने बायजू रविंद्रन की नेट वर्थ भी जीरो कर दी है. कंपनी में बड़े पैमाने पर छंटनी हुई है और हर महीने मुश्किल से स्टाफ की सैलरी मिल पाती है.
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