Cyber Attack On Pension: सावधान! आपकी पेंशन पर है साइबर ठगों की नजर, एक क्लिक और खाली हो जाएगा पूरा अकाउंट, PFRDA ने किया आगाह
PFRDA Warning: पेंशन फंड का पूरा पैसा निकलवाने का दावा करने वालों से PFRDA यानी पेंशन फंड रेगुलेटरी डेवलपमेंट अथॉरिटी ने सावधान किया है. पब्लिक नोटिस जारी कर कहा है कि ये साइबर ठग हो सकते हैं.

Cyber Attack On Pension: आपको अभी पैसे की सख्त जरूरत है और लोन लेना नहीं चाह रहे हैं. ऐसे में आपकी नजर पैसे निकालने के लिए पेंशन फंड या पीएफ फंड पर जाती है. आप चाहते हैं कि पेंशन से आप अधिक से अधिक पैसा निकाल लें, ताकि आपका काम भी पूरा हो जाय और आपको कहीं दूसरी जगह से पैसे मांगने या लोन लेने की जरूरत नहीं पड़े. ऐसी स्थिति में आपकी नजर किसी वेबसाइट, ईमेल या एसएमएस पर जाती है.
जो दावा करते हैं कि आपके पेंशन फंड का पूरा पैसा निकलवाने में वे आपकी मदद करेंगे. PFRDA यानी पेंशन फंड रेगुलेटरी डेवलपमेंट अथॉरिटी ने इससे सावधान किया है. पब्लिक नोटिस जारी कर लोगों से अपील की है कि ऐसा दावा करने वाले साइबर ठग हो सकते हैं, जो पेंशन फंड निकालने के नाम पर आपकी जीवन भर की कमाई हड़प जाएंगे.
पीएफआरडीए की ओर से साफ कहा गया है कि किसी भी स्थिति में एनपीएस यानी नेशनल पेंशन सिस्टम और एपीवाई यानी अटल पेंशन योजना के तहत पेंशन फंड का पूरा हिस्सा नहीं निकाला जा सकता है. नियमों के तहत केवल एक हिस्सा ही निकाला जा सकता है.
साइबर ठग ऐसे लगा रहे हैं पेंशन में सेंध
साइबर ठग कभी रुकी हुई पेंशन दिलाने के नाम पर तो कभी जीवन प्रमाण-पत्र अपडेट कराने के नाम पर लोगों को ठग रहे हैं. समय-समय पर सरकारी विभाग और बैंकों की ओर से लोगों को इसके बारे में सचेत किया जा रहा है. इसके बावजूद साइबर ठगी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है. सेंट्रल पेंशन अकाउंटिंग ऑफिस यानी सीपीएओ ने भी अपनी वेबसाइट पर साफ शब्दों में कहा है कि साइबर जालसाज पेंशनभोगियों को उनके जीवन प्रमाण-पत्र को ऑनलाइन अपडेट करने में मदद करने के बहाने कॉल कर रहे हैं और उन्हें धोखा देने के लिए इस नए तरीके का उपयोग कर रहे हैं.
ओटीपी के जरिए पेंशन खातों तक बनाते हैं पहुंच
साइबर अपराधी पीड़ितों से उनके व्यक्तिगत विवरण जैसे पेंशन भुगतान आदेश संख्या, जन्म तिथि, बैंक विवरण, आधार नंबर आदि साझा करने के लिए कहते हैं और फिर सत्यापन के लिए वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) भेजने का दावा करते हैं और पेंशनभोगी से ओटीपी साझा करने का अनुरोध करते हैं. उनके साथ एक बार ओटीपी साझा करने के बाद धोखेबाज को पीड़ित के पेंशन खाते तक पहुंच मिल जाती है और सभी उपलब्ध धनराशि को फर्जी खातों में स्थानांतरित कर दिया जाता है, जिससे पीड़ितों के लिए अपना पैसा वापस पाना मुश्किल हो जाता है.
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