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EPFO: महिला कर्मचारियों को मिल रहे ईपीएफओ के मैसेज, आखिर क्या जानना चाह रही सरकार

Employer Rating Survey: ईपीएफओ की तरफ से किए जा रहे इस सर्वे के आधार पर कंपनियों में महिलाओं की स्थिति का आकलन किया जाएगा.

Employer Rating Survey: विभिन्न कंपनियों में काम कर रही महिला कर्मचारियों को इन दिनों एम्प्लॉईज प्रॉविडेंट फंड आर्गेनाईजेशन (EPFO) की तरफ से टेक्स्ट मैसेज भेजे जा रहे हैं. इनमें उनसे जानने की कोशिश की जा रही है कि क्या कंपनी की तरफ से उन्हें समान काम का समान वेतन दिया जा रहा है. ईपीएफओ के साथ इस सर्वे में श्रम और रोजगार मंत्रालय के साथ ही महिला और बाल विकास मंत्रालय भी शामिल हैं. इस सर्वे के जरिए विभिन्न कंपनियों के वर्कफोर्स में महिला कर्मचारियों की हिस्सेदारी भी जानी जाएगी. इसके आधार पर कंपनियों का आंकलन किया जाएगा. 

एम्प्लॉयर रेटिंग सर्वे में पूछे जा रहे कई सवाल

इस एम्प्लॉयर रेटिंग सर्वे में कई सवाल पूछे गए हैं. इसमें महिला कर्मचारियों को हां, ना और नॉट एप्लीकेबल जैसे विकल्प चुनने हैं. सर्वे के रिजल्ट बताएंगे कि कंपनियां महिला कर्मचारियों के प्रति कैसा रवैया रखते हैं. साथ ही अपने वर्कफोर्स में कितनी महिलाओं को जगह दे रहे हैं. इसमें महिलाओं से पूछा जा रहा है कि आपकी कंपनी में यौन उत्पीड़न के खिलाफ शिकायत के लिए क्या सुविधा दी गई है. बच्चों के लिए क्रेच है या नहीं. समान काम का समान वेतन मिल रहा है या नहीं और रात में काम के बाद घर भेजने की क्या सुविधा है. 

ईपीएफओ ने 30 करोड़ सब्सक्राइबर को भेजे सवाल 

जानकारी के मुताबिक, ईपीएफओ ने यह प्रश्नावली अपने 30 करोड़ सब्सक्राइबर को भेजी है. लेबर मिनिस्ट्री के अनुसार, साल 2022-23 तक ईपीएफओ में 28 लाख महिलाएं रजिस्टर थीं. यह अब तक सबसे बड़ा आंकड़ा था. ईपीएफओ एक रिटायरमेंट फंड है, जिसके आंकड़े देश में नियमित रोजगार की स्थिति बताते हैं. पिछले हफ्ते महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने इस एम्प्लॉयर रेटिंग सर्वे की जानकारी दी थी. उन्होंने बताया कि यह ‘सक्षम नारी सशक्त भारत - वूमेन इन द वर्कफोर्स फॉर विकसित भारत’ मुहिम का हिस्सा है. 

महिलाओं को नहीं मिल पा रहे अच्छे रोजगार 

रोजगार में महिलाओं की स्थिति के मामले में भारत निचले पायदान के देशों में शामिल है. सरकार का लेबर फोर्स सर्वे बताता है कि 2022-23 में रोजगार में महिलाओं की संख्या का आंकड़ा 27.8 फीसदी पहुंच गया था. यही आंकड़ा साल 2017-18 में 17.5 फीसदी था. इसमें भी महिलाओं को ज्यादातर रोजगार हेल्पर्स के हैं. इनमें नियमित वेतन नहीं मिल पाती है. अच्छे रोजगारों में महिलाओं की स्थिति अभी भी ठीक नहीं है.

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