चीन के शेयर बाजारों में पिछले कुछ सालों से लगातार आ रही गिरावट का दुनिया भर के बाजारों पर असर दिख रहा है. कहीं इसका असर नकारात्मक है तो कहीं-कहीं इससे फायदा भी हो रहा है. कम से कम भारत के लिए तो यह फायदे का सौदा साबित हो रहा है.


एक महीने में 11 फीसदी की तेजी


ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन के बाजार में लगातार आती गिरावट से विदेशी निवेशकों का मोहभंग हो रहा है. खासकर जापानी निवेशक चीन के बाजार से दूर हो रहे हैं. ऐसे में भारतीय बाजार को खूब फायदा हो रहा है, जो अभी जापानी निवेशकों के नए फेवरिट बने हुए हैं. आंकड़े भी इसकी गवाही देते हैं. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी महीने में जापान में इंडिया इक्विटी-फोकस्ड इन्वेस्टमेंट ट्रस्टों की कुल एसेट 11 फीसदी बढ़ गई.


जनवरी में आया इतना निवेश


जापान में इंडिया इक्विटी-फोकस्ड इन्वेस्टमेंट ट्रस्टों की कुल एसेट अब 237 बिलियन येन यानी 1.6 बिलियन डॉलर पर पहुंच गई है. यह सिर्फ एक महीने में 11 फीसदी की बढ़ोतरी है. इंडिया इक्विटी फंडों में करीब 140 बिलियन येन का इनफ्लो जनवरी के दौरान देखने को मिला है. यह आंकड़ा इस लिहाज से खास हो जाता है, क्योंकि समान अवधि यानी जनवरी महीने के दौरान जापानी स्टॉक के फंडों में नेट इनफ्लो लगभग शून्य रहा है.


सबसे ज्यादा हो रहा चीन को नुकसान


इस दौरान चाइनीज शेयरों में फंड का फ्लो सबसे ज्यादा गिरा है. इंटरनेशनल इवेस्टमेंट पोजिशन को लेकर जापान के जिन आंकड़ों को कवर किया जाता है, उनके अनुसार, 14 उभरते बाजारों में सबसे ज्यादा नुकसान चाइनीज शेयरों को ही हुआ है. इन आंकड़ों में संस्थागत और खुदरा निवेशकों, दोनों का आंकड़ा है. इससे पता चलता है कि चाइनीज शेयरों से बड़े-छोटे हर तरह के निवेशक दूर हो रहे हैं.


इन कारणों से बन रहा नया संतुलन


एक्सपर्ट भारतीय बाजार को अगला चीन बता रहे हैं, जबकि चीन में आर्थिक स्थितियों के बिगड़ने और बाजार में सरकारी दखल बढ़ने के चलते निवेशकों की दिलचस्पी कम हुई है. जहां एक ओर चीन की आर्थिक वृद्धि दर लगातार सुस्त बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच सबसे तेज तरक्की करने वाला बना हुआ है.


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