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GST कंपनसेशन को लेकर केंद्र और राज्यों में तकरार, जानें क्या है पूरा मामला

गैर-बीजेपी शासित पांचों राज्यों ने केंद्र से जीएसटी कंपनसेशन को लेकर मोर्चा खोल दिया है. राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, केरल और पश्चिम बंगाल की सरकारों ने केंद्र सरकार को जल्द से जल्द कंपनसेशन देने के लिए कहा है.

नई दिल्ली: जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स को लेकर नया बखेड़ा खड़ा हो गया है. केंद्र सरकार और पांच राज्यों की सरकारों में जीएसटी को लेकर तकरार खुलकर सामने आ रही है. दरअसल, ये पूरा मामला जीएसटी कंपनसेशन यानी जीएसटी क्षतिपूर्ति को लेकर है. राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, केरल और पश्चिम बंगाल की सरकारों ने केंद्र सरकार को जल्द से जल्द अगस्त और सितंबर का जीएसटी कंपनसेशन देने के लिए कहा है. इन राज्यों की सरकारों का कहना है कि केंद्र सरकार ने अगस्त और सितंबर का जीएसटी कंपनसेशन रिलीज नहीं की है. इसके चलते राज्य सरकारों के सामने वित्तीय संकट खड़ा हो रहा है.

राज्य सरकारों का कहना है कि जुलाई 2017 में जीएसटी का फॉर्मूला लागू हुआ था. तब से लेकर अभी तक जीएसटी कंपनसेशन को लेकर कोई दिक्कत सामने नहीं आई थी. लेकिन, अगस्त और सितंबर 2019 का जीएसटी कंपनसेशन समय पर न मिलने के चलते राज्य सरकारों के सामने दिक्कत आ रही है.

क्या है जीएसटी कंपनसेशन 2017 में जीएसटी लागू होने से पहले केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच यह तय हुआ था कि अगर जीएसटी लागू होने से राज्य सरकारों को राजस्व के मोर्चे पर नुकसान होगा तो अगले 5 साल तक केंद्र सरकार इसकी 100 फीसदी क्षतिपूर्ति करेगी. इसकी गणना के लिए 2015-16 को बेस ईयर माना गया था. राज्यों के राजस्व की सालाना बढोतरी दर 14 फीसदी तय की गई थी.

बेस ईयर का टैक्स राजस्व निकालने के लिए राज्यों का वैट, केंद्रीय बिक्री कर, एंटरी टैक्स, ऑक्ट्रॉय, लोकल बॉडी टैक्स, लक्जरी टैक्स और विज्ञापनों पर लगने वाले कर को जोड़ा गया था. इस हिसाब से अगर राज्यों की राजस्व गणना में असल राजस्व कम रहता है तो उसे केंद्र सरकार जीएसटी कंपनसेशन के रूप में राज्य सरकारों को देती है.

किस राज्य का कितना बकाया पंजाब- 2100 करोड़ रुपये केरल- 1600 करोड़ रुपये दिल्ली- 2335 करोड़ रुपये पश्चिम बंगाल- 1500 करोड़ रुपये

जीएसटी कंपनसेशन का पैसा आता कहां से है जीएसटी क्षतिपूर्ति के लिए बहुत से उत्पादों और सेवाओं पर जीएसटी कंपनसेशन सेस लगता है. जीएसटी कंपनसेशन सेस आटोमोबाइल्स, टोबैको और लक्जरी आइटमों पर लगता है. इन सभी आइटमों पर 28 फीसदी जीएसटी लगता है. कानून के मुताबिक, जीएसटी कंपनसेशन का पैसा केंद्र सरकार को राज्यों को हर दूसरे महीने देना होता है. अगस्त और सितंबर 2019 का पैसा अक्टूबर में राज्यों को मिल जाना चाहिए था. लेकिन, यह रकम न मिलने के चलते अब राज्य सरकारें केंद्र पर दबाव बना रही हैं.

क्यों आ रही है दिक्कत ऐसे में अब सवाल उठता है कि आखिर केंद्र सरकार ने समय पर जीएसटी कंपनसेशन राज्यों को क्यों नहीं दिया? दरअसल, केंद्र सरकार के लक्ष्य के मुताबिक देश में जीएसटी कलेक्शन नहीं हो पा रहा है. केंद्र सरकार को जितना पैसा जीएसटी के रूप में आने की उम्मीद थी, उतना नहीं आया . केंद्र सरकार का अनुमान था कि हर महीने सरकार को 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का जीएसटी कलेक्शन मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ .

मौजूदा वित्त वर्ष यानी 2019-20 के शुरुआती 7 महीनों में से सिर्फ 3 महीनों में ही जीएसटी कलेक्शन 1 लाख करोड़ रुपये के पार गया है. बात अगर बीते महीने यानी अक्टूबर 2019 की करें तो बीते अक्टूबर के मुकाबले जीएसटी कलेक्शन 5.29 फीसदी कम रहा है. अक्टूबर 2019 में 95,380 करोड रुपये जीएसटी कलेक्शन में आए.

राज्यों का तर्क अधिकांश राज्य सरकारों की आमदनी में सबसे बड़ा हिस्सा जीएसटी का ही है. अधिकांश राज्यों का जीएसटी राजस्व कुल आमदनी का तकरीबन 60 फीसदी होता है. ऐसे में अगर जीएसटी कंपनसेशन में देरी होती है तो इससे राज्यों के बजट पर सीधा असर पड़ता है. इसी वजह से गैर-बीजेपी शासित पांचों राज्यों ने केंद्र से जीएसटी कंपनसेशन को लेकर मोर्चा खोल दिया है.

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