टैरिफ के बीच अगले हफ्ते कैसी रहेगी मार्केट की चाल? इन 5 फैक्टर्स पर होगी सबकी नजर
फाइनेंशल ईयर 2025 के आखिरी सप्ताह के लिए विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े 4 अप्रैल को जारी होंगे. देश का विदेशी मुद्रा भंडार 21 मार्च को खत्म हुए सप्ताह में बढ़कर 658.8 डॉलर हो गया था.

अमेरिका की ट्रंप सरकार की तरफ से 2 अप्रैल को टैरिफ लगाने के एलान ने इस वक्त अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता की स्थिति पैदा कर दी है. 31 मार्च यानी आज ईद की वजह से बाजार बंद है. ऐसे में 1 अप्रैल से शुरू होने वाले छोटे सप्ताह में बेंचमार्क इंडेक्स के मजबूत होने की संभावना है. हालांकि, उससे पहले 31 अप्रैल को सोना अब तक सर्वोच्च स्तर 3100 डॉलर के पार पहुंच गया है.
अमेरिका की तरफ से 2 अप्रैल से रेसिप्रोकल टैरिफ उन देशों के खिलाफ प्रभावी हो जाएगा, जो अमेरिकी सामानों पर जितना टैरिफ लगाता है, उन देशों के खिलाफ उसी हिसाब से लगाया जाएगा. तो वहीं, ऑटो टैरिफ भी 2 अप्रैल से लगना शुरू हो जाएगा. एक्सपर्ट्स लगातार इस बात को लेकर आगाह कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में ट्रेड वॉर बढ़ शुरू हो सकती है और इसका नतीजा वैश्विक मंदी के रुप में सामने आ सकता है.
अब आइये जानते हैं कि वो कौन से फैक्टर रहेंगे, जिन पर सबकी नजरें टिकी रहेंगे:
चीन, जापान और अमेरिका के साथ ही कई देशों के मैन्युफैक्चरिंग डेटा मार्च के महीने में जारी होंगे. अमेरिकी नौकरियों के डेटा जारी होने पर भी सबकी नजर रहेगी. इसके साथ ही, ब्याज दर पर किसी तरह का फैसला लेते समय अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व नौकरियों के आंकड़ों पर भी फोकस करता है.
इसके अलावा, फाइनेंशल ईयर 2025 के आखिरी सप्ताह के लिए विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े 4 अप्रैल को जारी होंगे. देश का विदेशी मुद्रा भंडार 21 मार्च को खत्म हुए सप्ताह में बढ़कर 658.8 डॉलर हो गया था. इसी तरह से ऑटोमोबाइल कंपनियां आने वाले हफ्ते में बिक्री को लेकर नया डेटा जारी करेगी. इसके अलावा, फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टरस (एफआईआई) की एक्टिविटीज पर भी मार्केट पार्टिसिपेंट्स का फोकस रहेगा.
कोई नया आईपीओ इस हफ्ते नहीं खुल रहा है. पहले से ही खुले तीन आईपीओ में पैसा लगाने के लोगों के पास मौका रहेगा. इसके अलावा, साथ ही, डीआईआई यानी डॉमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने पिछले हफ्ते 6797 करोड़ के शेयर खरीदकर मार्केट में अपने सपोर्ट को बरकरार रखा है.
जियोजीत इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा, ‘‘आगे चलकर विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का प्रवाह मुख्य रूप से ट्रंप के जवाबी शुल्क पर निर्भर करेगा. यदि शुल्क का प्रतिकूल प्रभाव बहुत अधिक नहीं रहता है, तो एफआईआई का प्रवाह जारी रह सकता है.’’ उन्होंने कहा कि एफआईआई की रणनीति बिकवाली से मामूली खरीद की हो गई है.
21 मार्च को समाप्त सप्ताह में यह दिखाई दिया था और 28 मार्च को समाप्त सप्ताह में भी यह रुख जारी रहा. निवेशकों की निगाह रुपये-डॉलर के रुझान और वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों पर भी रहेगी. जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘इस सप्ताह शुल्क को लेकर चीजें अधिक साफ हो सकेंगी. इससे निवेशक वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव का आकलन कर सकेंगे.
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