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Hiroshima History: बेहद ही खौफनाक है हिरोशिमा का इतिहास, कुछ ही सेकेंड्स में राख हो गया था जापान का ये शहर
Hiroshima Attack: 6 अगस्त 1945 की सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर हिरोशिमा शहर पर लिटिल बॉय नाम का एटम बम गिराया गया. इस बम को जमीन पर आने में सिर्फ 43 सेकेंड लगे. फिर जो तबाही मची, कभी कल्पना नहीं की थी.
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हिरोशिमा अटैक
Hiroshima Day 2022: 77 साल पहले आज ही का दिन यानी 6 अगस्त और साल था 1945... सुबह-सुबह जापान (Japan) के लोग अपने काम में जुटे हुए थे. वह लोग उस खौफनाक मंजर से बिल्कुल अंजान थे, जो कुछ ही घंटे में तबाही लाने वाला था. सुबह के 8 बज रहे थे. हिरोशिमा शहर के ऊपर अमेरिकी विमान मंडरा रहे थे. उनकी गड़गड़ाहट दिलों की धड़कनें तो बढ़ा रहीं थी लेकिन जो हुआ उसकी कल्पना किसी को नहीं थी. इन्हीं विमानों में एक एनोला गे विमान में रखा था लिटिल बॉय एटम बम, जिसकी लंबाई 3.5 मीटर, वजन- 4 टन और क्षमता 20 हजार TNT के बराबर थी. इस विमान को उड़ा रहे थे पायलट पॉल टिबेट्स. सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर उन्होंने AOE ब्रिज को निशाना बनाते हुए इस बम को छोड़ दिया और फिर जो तबाही मची, वैसी दुनिया ने कभी कल्पना ही नहीं की थी..
5 पॉइंट में हिरोशिमा अटैक की खौफनाक कहानी
- दूसरा विश्वयुद्ध (Second World War) चल रहा था. मित्र राष्ट्रों, जिसमें फ्रांस, ग्रेट ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, सोवियत संघ और कुछ हद तक चीन की जीत करीब-करीब तय हो चुकी थी. धुरी शक्तियों में शामिल जर्मनी, जापान और इटली में से जर्मनी ने आत्मसमर्पण कर दिया था. सिर्फ जापान ही मित्र देशों को टक्कर दे रहा था. जुलाई 1945 में जर्मनी के शहर पोट्सडम में अमेरिकी प्रेसीडेंट हैरी ट्रूमैन, ब्रिटिश पीएम विंस्टन चर्चिल और सोवियत संघ के लीडर जोसेफ स्टालिन की एक मुलाकात हुई और यहीं लिखी गई जापान के तबाही की स्क्रिप्ट.
- जब हिरोशिमा पर लिटिल बॉय बम को गिराया गया तब चंद सेकेंड में सब कुछ मिट्टी में मिल गया. वहां का तापमान 10 लाख डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच गया. बम की पहुंच जहां-जहां तक रही, हर कोई राख में बदल गया. माना जाता है कि 1.40 लाख लोगों की मौत हो गई. जापान का 7वां सबसे बड़ा और 3 लाख से भी ज्यादा आबादी वाला शहर ऐसा तबाह हुआ कि बयां कर पाना भी मुश्किल था. शहर में कंक्रीट से बनी बिल्डिंग्स को छोड़ धरती पर मौजूद हर चीज गायब हो गई थी.
- लिटिल बॉय बम का धमाका इतना तेज था कि आसमान में सैकड़ों मीटर तक मशरूम क्लाउड बन गए थे. इसका इफेक्ट रहा कि हवा से आक्सीजन ही गायब हो गई और कई लोग जो शेल्टर में छिपे थे या बच गए थे वे सांस की समस्या से मारे गए. सवा 8 बजे एटम बम का विस्फोट हुआ और इससे बने बादल 11 बजे के करीब हिरोशिमा पर जमकर बरसने लगे. यह बारिश बिल्कुल काली थी. बारिश की बूंदें गंदगी, धूल और विस्फोट से उत्पन्न हुए रेडियोएक्टिव तत्व से भरी हुई थी.
- जहां यह एटम बम गिरा, वहां से एक किलोमीटर के एरिया में हर चीज भाप बन हवा में उड़ गई. एक माइक्रो सेकेंड के अंदर सबकुछ खत्म हो गया. कई चीजों का तो नामोनिशान ही नहीं बचा. एनोला गे विमान के सह पायलट कैप्टेन रॉबर्ट लुइस ने बम गिरने के बाद अपनी लॉग बुक में लिखा- माई गॉड व्हाट हैव वी डन.
- इस हमले जो मारे गए उनका नामोनिशान ही नहीं मिला और जो बदकिस्मती से बच गए, उनकी जिंदगी नर्क से भी बदतर हो गई. उनके शरीर के कई अंग चीथड़े बन चुके थे. किसी के हाथ नहीं तो किसी के पांव गायब थे. इस धमाके से पहले हिरोशिमा में 76,000 घर मौजूद थे, विस्फोट के बाद 70,000 तहस-नहस हो गए. इस बम का असर कई साल तक यहां देखने को मिला. यहां निकलने वाली खतरनाक किरणों की वजह से पैदा होने वाले बच्चे अपंग होते.
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रुमान हाशमी, वरिष्ठ पत्रकार
Opinion