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देश भर में एमटेक के एडमिशन में आई भारी गिरावट, हर 3 में से 2 सीट हैं खाली, ये है मुख्य कारण

एमटेक में एडमिशन को लेकर युवाओं का रुझान काफी कम होता जा रहा है. पिछले कुछ सत्र में इस कोर्स में भारी गिरावट देखने को मिली है. ऐसे में गिरावट क्यों आई है इसका कारण हम आपको बता रहे हैं...

देश में इंजीनियरिंग सेक्टर में एमटेक की तरफ युवाओं का इंटरेस्ट काफी हद तक कम होता जा रहा है. एक रिपोर्ट में ये सामने आया है कि देश के अधिकतर इंजीनियरिंग कॉलेज में हर तीन में से दो सीटें खाली जा रही है. अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देशभर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एमटेक की सीटों का एक बड़ा हिस्सा खाली पड़ा हुआ है. यह स्थिति तब भी जारी है, जब 2017-18 के बाद कुल स्नातकोत्तर सीटों में एक तिहाई की कमी की गई थी. ऐसे में हम आपको बताते हैं ये गिरावट क्यों सामने या रही है और क्या कारण है कि स्टूडेंट्स का रुझान एमटेक कि तरफ काम होता जा रहा है.

ये हैं प्रमुख कारण  

परिषद द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो शैक्षिक वर्षों में एमटेक में प्रवेश करने वाले छात्रों की संख्या घटकर 45,000 तक पहुंच गई है, जो सात सालों में इसका सबसे निचला स्तर है. यह संख्या बीटेक के नामांकन में हो रही वृद्धि के बिल्कुल विपरीत है. विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हैं, जिनमें एमटेक डिग्री से कोई वैल्यू एडीशन नहीं होना, पाठ्यक्रम और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच असमानता, और वेतन के मामले में कोई महत्वपूर्ण लाभ न होना शामिल हैं. इन कारणों के चलते छात्रों का रुझान एमटेक की बजाय अन्य विकल्पों की तरफ बढ़ रहा है.

एमटेक के एडमिशन में 64 फीसदी नहीं भरी सीट 

देश भर में एमटेक की 64% सीटें खाली रह गई हैं. सात साल पहले, 1.85 लाख स्नातकोत्तर इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी सीटों में से केवल 68,677 सीटें भरी गई थीं, जिससे 63% सीटें खाली रह गई थीं. 2023-24 में, हालांकि एमटेक सीटों की संख्या घटकर 1.24 लाख रह गई है, रिक्तियों की दर 64% तक बढ़ गई है, जिसमें केवल 45,047 छात्र ही इस डिग्री को प्राप्त कर रहे हैं. पिछले दो शैक्षिक वर्षों में एमटेक में प्रवेश करने वाले छात्रों की संख्या सबसे कम रही है. 2022-23 में केवल 44,303 छात्रों ने दाखिला लिया था, जिससे 66% सीटें खाली रह गईं. 2023-24 में यह संख्या मामूली बढ़कर 45,047 हो गई है.

इस लिए कम हो रहा एमटेक का क्रेज

एमटेक के प्रति छात्रों का रुझान कम होने के बारे में मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एआईसीटीई के सदस्य सचिव राजीव कुमार ने कहा कि स्नातकोत्तर अध्ययन में छात्रों की कोई खास रुचि नहीं रही है, जो एक चिंता का विषय है. उनका कहना है कि बीटेक पूरी करने के बाद छात्रों को जो वेतन मिलता है, उसमें और एमटेक के बाद मिलने वाले वेतन में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है, जिससे छात्रों को स्नातकोत्तर की ओर रुख करने के लिए प्रेरणा नहीं मिल रही. उन्होंने यह भी कहा कि जो छात्र शिक्षा क्षेत्र में करियर बनाने में रुचि रखते हैं, वे ही एमटेक पाठ्यक्रम लेने के बारे में सोचते हैं, जबकि अधिकांश छात्र कामकाजी क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत करना चाहते हैं, और इसलिए वे स्नातकोत्तर नहीं करना चाहते.

यह भी बताया गया कारण

यह भी एक महत्वपूर्ण कारण है कि एमटेक का क्रेज कम हो रहा है. मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार पूर्व एआईसीटीई अध्यक्ष एसएस मंथा ने कहा कि अब स्नातक छात्र मुख्य इंजीनियरिंग क्षेत्रों की बजाय स्नातकोत्तर डिग्री के रूप में मैनेजमेंट को चुन रहे हैं, क्योंकि मैनेजमेंट शिक्षा में समय के साथ बदलाव आए हैं, जो उन्हें बेहतर करियर अवसर प्रदान कर रहे हैं. 

वहीं, आईआईटी दिल्ली के पूर्व निदेशक और बिट्स पिलानी के समूह कुलपति वी. रामगोपाल राव ने यह बताया कि टियर 1 संस्थान जैसे आईआईटी एमटेक सीटें भरने में सक्षम हैं, लेकिन फिर भी कई छात्र एमटेक के बाद नौकरी के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में शामिल होते हैं, खासकर जब उन्हें GATE स्कोर के माध्यम से नौकरी का अवसर मिल जाता है. इस कारण एमटेक की सीटों की संख्या भरी नहीं जा रही और छात्र स्नातकोत्तर में दाखिला लेने से बच रहे हैं.

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