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Trailer Review: बाबरी मस्जिद से लेकर दंगों तक को ट्रेलर में मिली जगह, बेहद बेबाक है 'ठाकरे' का ट्रेलर
Thackeray Trailer Review: देश में हिंदुत्व और महाराष्ट्र में मराठियों के हक की बात करने वाले बाला साहेब ठाकरे के जीवन पर बन रही फिल्म 'ठाकरे' का आज ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है.
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Thackeray Trailer Review: देश में हिंदुत्व और महाराष्ट्र में मराठियों के हक की बात करने वाले बाला साहेब ठाकरे के जीवन पर बन रही फिल्म 'ठाकरे' का आज ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है. फिल्म का ट्रेलर अपने टीजर की ही तरह शानदार है. फिल्म में बाल ठाकरे के व्यक्तित्व के कई खास पहलुओं को जगह दी गई है.
साथ ही उनके एक कार्टूनिस्ट से एक ताकतवर राजनेता बनने के सफर को भी बेहद संजीदगी व बेबाकी से दिखाया गया है. फिल्म का निर्माण और इसकी कहानी 'शिवसेना' के ही संजय राउत ने लिखी है और उन्होंने इसमें उनके दमदार व्यक्तित्व को हूबहू पेश करने की कोशिश की है.
सिल्वर स्क्रीन पर बाबरी मस्जिद और 1992 के दंगों को भी फिल्म के ट्रेलर में जगह दी गई है. 80 और 90 के दशक में महाराष्ट्र की राजनीति में बाला साहेब ठाकरे की तूती बोलती थी. भले ही ठाकरे ने कभी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री या देश के प्रधानमंत्री के पद पर बैठने की इच्छा नहीं जताई. न ही उन्होंने सत्ता को अधिक महत्व दिया लेकिन फिर भी महाराष्ट्र की राजनीति का फैसला वही करते थे. नेता से लेकर अभिनेता सभी उनके यहां जाकर सिर झुकाया करते थे.
बाल ठाकरे पर हिंदुत्व की चिंगारी भड़काने का भी आरोप लगता रहा है. इतना ही बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में उन्हें हाई कोर्ट के समक्ष पेश भी होना पड़ा था. उनके जीवन के इस अहम हिस्से को भी फिल्म के ट्रेलर में जगह दी गई है. साथ ही राम मंदिर को लेकर उनके विचारों को भी साफ तौर पर दिखाने की कोशिश की गई है.
कौन थे बाला साहेब ठाकरे
बाला साहेब ठाकरे के पिता केशव सिताराम ठाकरे एक समाज सेवी थे. शुरुआती दौर में बाल ठाकरे एक कार्टूनिस्ट थे उन्होंने द फ्री प्रेस जरनल और टाइम्स ऑफ इंडिया जैसे पत्रकारों में काम किया था. इनमें वो मराठी मानुष के अधिकारों और आम आदमी जुडे़ लोगों की समस्याओं को लेकर कार्टून बनाया करते थे.
बाद में उन्होंने खुद की साप्ताहिक शुरू किया जिसका नाम 'मार्मिक' था. उसमें वो अपने व्यंगात्मक कार्टून और लेख छपा करते थे. इसके बाद बाल ठाकरे ने 1966 में 'शिव सेना' की नींव रखी. उन पर कई बार दंगे भड़काने और सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के भी आरोप लगे हैं. उन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति में काफी अहम भूमिका निभाई थी. मराठियों के अधिकारों की मांग के बाद उन्होंने हिंदुत्व के मुद्दे को भी उन्होंने चिंगारी दी थी. जो आज भी राजनीति में एक बड़ा संजीदा मुद्दा है.
कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि फिल्म को ट्रेलर में बाला साहेब ठाकरे के व्यक्तित्व की ही तरह बेबाक और बोल्ड रखा गया है. उसमें उनके जीवन की कॉन्ट्रोवर्सी से लेकर उस दौर की राजनीति और राजनेताओं में उनके दबदबे को भी दिखाया गया है.
कुछ सीन्स पर सेंसर बोर्ड को है आपत्ति
'ठाकरे' में हिंसा और दंगों के कई सीन रखे गए हैं. ऐसे में बताया जा रहा है कि सेंसर बोर्ड ने मुख्य तौर पर किसी सीन पर तो नहीं लेकिन उसके कुछ डायलॉग्स पर आपत्ति जताई थी. लेकिन शिवसेना ने साफ शब्दो में कहा कि जो इतिहास में है वही फिल्म में दिखाया जायेगा. उसमें कोई कट नही होगा. ये कोई लव स्टोरी नही है जिसमें सेंसरबोर्ड कांट छांट करे.
ट्रेलर लॉन्च पर पहुंचा परिवार
मुंबई में आज ठाकरे परिवार की उपस्थिति में रिलीज किया गया इस फिल्म का ट्रेलर. बालासाहेब के बेटे और शिवसेना के मौजूदा मुखिया उद्धव ठाकेर ने आज इस मौके पर कहा कि बाला साहेब के जीवन को लोग तो फिल्मी पर्दे पर दो घंटे में ही देख लेंगे लेकिन अपने पिता के व्यक्तित्व को उन्होंने 52 साल तक देखा और जिया है इस मौके पर उद्धव ठाकरे भावुक होते भी नजर आये.
ये हैं दमदार डायलॉग्स
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- जनता के काम के लिए जनता के बीच में जाना पड़ेगा .
- भीख मांगने से अच्छा है गुंडा बनकर अपना हक जीतना.
- मैं जब भी कहता हूं जय महाराष्ट्र तो पहले जय हिंद कहता हूं. जय हिंद, जय महाराष्ट्र. मेरे लिए देश सबसे पहले है, राज्य बाद में.
- मैं सही हूं या गलत इसका फैसला आप नहीं देश की जनता करेगी, क्योंकि मैं सबसे उपर जनता की अदालत को मानता हूं.
- मेरे कंधे पर जो ये है न वो देश का लोकतंत्र है.
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रुमान हाशमी, वरिष्ठ पत्रकार
Opinion