क्या अंतरिक्ष में भी कोई जीव बच्चे पैदा कर सकता है, जानें विज्ञान क्या कहता है?
2009 में अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने एक अध्ययन किया था, जिसमें यह पाया गया कि स्पेस में चूहे के भ्रूण का विकास पृथ्वी पर होने वाले विकास से अलग था.
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अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं होता है. इसके अलावा वहां पृथ्वी जैसा जीवनदायक वातावरण भी नहीं होता. अब सवाल उठता है कि जो लोग या जीव अंतरिक्ष यान में रहते हैं क्या वो प्रेग्नेंट हो सकते हैं. अगर हां, तो फिर होने वाला बच्चा क्या पृथ्वी पर होने वाले बच्चे जैसा ही होगा. चलिए आज इस खबर में इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.
अंतरिक्ष में प्रजनन
दरअसल, अंतरिक्ष में प्रजनन की प्रक्रिया, पृथ्वी पर होने वाली प्रजनन प्रक्रिया से अलग हो सकती है. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. लेकिन मुख्य कारण अंतरिक्ष का अलग वातावरण है और माइक्रोग्रैविटी यानी कम गुरुत्वाकर्षण है. इसे ऐसे समझिए कि पृथ्वी पर गर्भधारण के दौरान, गुरुत्वाकर्षण सहायता करता है, जैसे कि भ्रूण का सही ढंग से विकास और उसके शरीर के ऊतकों का उचित विभाजन. यह सबकुछ गुरुत्वाकर्षण पर भी निर्भर करता है. लेकिन जब कोई जीव स्पेस में प्रेग्नेंट होता है तो वहां गुरुत्वाकर्षण ना के बराबर होने की वजह से उसके भ्रूण का सही विकास नहीं हो पाता.
प्रेग्नेंट हो सकते हैं
कुछ रिसर्च के अनुसार, अंतरिक्ष में शुक्राणु और अंडाणु का मिलन यानी फर्टिलाइजेशन सामान्य रूप से हो सकता है. क्योंकि यह प्रक्रिया रासायनिक और जैविक प्रतिक्रियाओं पर निर्भर करती है. ये गुरुत्वाकर्षण से ज्यादा प्रभावित नहीं होती. लेकिन, जब बात भ्रूण के विकास की आती है, तब स्पेस की प्रेग्नेंसी धरती की प्रेग्नेंसी से अलग हो जाती है.
नासा का रिसर्च
आपको बता दें, 2009 में अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने एक अध्ययन किया था जिसमें यह पाया गया कि स्पेस में चूहे के भ्रूण का विकास पृथ्वी पर होने वाले विकास से अलग था. खासतौर से भ्रूण के हड्डी और मांसपेशियों का निर्माण सही से नहीं हो पाया था. इस रिसर्च से ये साफ हो गया था कि स्पेस में रह कर अगर कोई प्रेग्नेंट जीव अपने भ्रूण का विकास करना चाहता है तो ग्रैविटी के ना होने के चलते यह भ्रूण के विकास के लिए घातक साबित हो सकता है.
इसके अलावा जापान ने भी इस पर रिसर्च किया है. 1990 के दशक में, जापान की अंतरिक्ष एजेंसी (JAXA) ने भी एक अंतरिक्ष प्रयोग किया, जिसमें कीटाणु (सी. एलेजन्स) और प्रजनन कोशिकाओं का अध्ययन किया गया. इस प्रयोग में भी यही पाया गया कि माइक्रोग्रैविटी में कुछ कोशिकाओं का विकास पृथ्वी के मुकाबले सामान्य नहीं था.
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