वैसलीन का इस्तेमाल अक्सर हमें सर्दियों में ज्यादा दिखाई देता है. लोग इसका इस्तेमाल अपनी स्किन को बेहतर बनाने के लिए करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि वैसलीन को बनाने का निर्णय इसलिए लिया गया था क्योंकि इसे घाव पर लगाने से वह तेजी से भर जाते हैं. दरअसल, वैसलीन को बनाने का काम आज से 150 साल पहले हुआ था. लेकिन आज यह छोटी सी डिबिया आपको हर घर में मिल जाएगी, तो चलिए आपको बताते हैं आखिर पहली बार वैसलीन क्यों बना था.
घाव को तेजी से भरता है वैसलीन
वैसलीन की खोज करने वाले अमेरिका के केमिस्ट रॉबर्ट अगस्टस एक बार जब पेंसिलवेनिया की यात्रा कर रहे थे तो उन्होंने देखा कि जहाज पर काम करने वाले कर्मचारी अपनी चोट पर ऑयल पाइप से निकली वैक्स लगा रहे हैं. इसे देख कर रॉबर्ट से रहा नहीं गया और उन्होंने कर्मचारियों से इसकी वजह पूछी. कर्मचारियों ने कहा कि इसे लगाने से उनके घाव तेजी से भरते हैं. बस वहीं से वैसलीन के बनाने के आईडिया ने रॉबर्ट के दिमाग में अपनी जगह बना ली.
भारत में कैसे बनाई इसने अपनी
भारत में वैसलीन की एंट्री हुई...1947 में. पहले तो यहां ये उतनी कामयाब नहीं हुई, लेकिन धीरे-धीरे इसने भारत में अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू कर दी. काफी ब्रांडिंग के बाद आज ये वैसलीन की छोटी सी डिबिया आपके घर में कहीं पड़ी जरूर मिल जाएगी. हालांकि, अब इसका इस्तेमाल घाव को ठीक करने के लिए नहीं होता है, बल्कि त्वचा के रूखे पन को सुधारने के लिए होता है.
कभी प्रेम चोपड़ा ने भी किया था इसका प्रचार
बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता प्रेम चोपड़ा ने भी एक दौर में इसके लिए प्रचार किया था. हालांकि, उन्होंने वैसलीन के हेयर क्रीम के लिए किया था. कहा जाता है कि भारत में वैसलीन को स्थापित करने में उसके विज्ञापनों का बड़ा रोल रहा है. खुल गई रौनक की डिबिवा वाला ऐड तो आपको याद ही होगा. इस ऐड ने वैसलीन को घर-घर में मशहूर कर दिया.
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