Increasing Population: आखिर कितनी आबादी का बोझ उठा सकती है हमारी पृथ्वी, जनसंख्या बढ़ने के साथ क्या-क्या होंगी दिक्कतें?
Increasing Population: धरती पर आबादी तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में इसे कम करने की बातें की जा रही हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि धरती कितना बोझा उठा सकती है और पॉपुलेशन बढ़ने से क्या नुकसान हैं.

Increasing Population: दुनिया में तेजी से आबादी बढ़ती जा रही है. जनसंख्या विस्फोट के खतरे को देखते हुए इस पर लगाम लगाने की बात कही जा रही है. बहुत सारे देशों में तो जनसंख्या नियंत्रण पर अमल किया जाना शुरू हो चुका है. वहां की आबादी इस कदर कम हो रही है कि वो देश चिंता में हैं. कुदरत के सीमित संसाधनों का हवाला दिया जा रहा है, क्योंकि यह तो तय है कि धरती का आकार नहीं बढ़ने वाला और मौजूदा संसाधन जैसे पानी, खेती के लिए जमीन आदि तो नहीं बढ़ने वाली है. ऐसे में हमें खुद को धरती के अनुसार ही सीमित करना पड़ेगा. तो चलिए जानते हैं कि धरती कितना बोझा सहन कर सकती है और बढ़ती आबादी किस कदर खतरनाक है.
अधिकतम कितनी हो सकती है आबादी
लंदन के इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायरमेंट एंड डेवलपमेंट के सीनियर फेलो डेविड सैटवर्थ ने गांधी जी का हलावा देते हुए कहा था कि ऐसा नहीं है. आबादी से ज्यादा इस बात की अहमियत है कि आप संसाधनों का इस्तेमाल कितना करते हैं. गांधी जी ने कहा था कि धरती पर सबकी जरूरत के लिए तो सामान मौजूद है, लेकिन लालच को पूरा करने के लिए नहीं है. पहले धरती पर इतनी आबादी नहीं हुआ करती थी. 2022 में दुनिया की आबादी आठ अरब से ज्यादा हो चुकी है. संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि 2070 से 2080 के बीच पृथ्वी पर इंसानों की अधिकतम आबादी 9.4 से 10.4 अरब के बीच जा सकती है.
धरती पर कितना बोझ बढ़ेगा
डेविड की मानें तो आबादी बढ़ने के असर का सुराग हम भारत, पाकिस्तान और चीन जैसे देशों से ले सकते हैं, क्योंकि यहां तेजी से आबादी बढ़ रही है. लेकिन खास बात यह है कि इसकी वजह से धरती के संसाधनों का बोझ नहीं बढ़ रहा है, क्योंकि यहां पर रहन-रहन बहुत खर्चीला नहीं है. ऐसे में यहां पर कार्बन डाई ऑक्साइड और ग्रीन हाउस गैसें बहुत ज्यादा तो नहीं बनती हैं, क्योंकि यहां लोग सीमित संसाधनों में जीते हैं. भारत जैसे देशों में सालाना एक टन ग्रीन हाउस गैस बनती हैं, वहीं अमीर देशों में यह प्रति व्यक्ति 30 टन के करीब होती है. इसलिए अगर भारत, पाकिस्तान जैसे देशों में आबादी बढ़ेगी तो धरती पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा. लेकिन जर्मनी, इंग्लैंड या अमेरिका की आबादी बढ़ने से धरती पर बोझ पड़ेगा.
धरती पर बोझ बढ़ने से बढ़ेंगी समस्याएं
हालांकि 22वीं सदी आने तक धरती की आबादी का अनुमान 11 अरब लगाया जा रहा है. ऐसे में 11 अरब लोगों का बोझ उठा पाना धरती के लिए मुश्किल होगा. इसलिए जरूरी है कि हमें बढ़ती आबादी पर कंट्रोल करना चाहिए. 2012 में आई संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के आंकड़ों की मानें तो धरती आठ अरब से 1024 अरब लोगों का बोझा उठा सकती है. बढ़ती आबादी के कारण पानी की खपत, खेती के लिए जमीन, बिजली, खाना जैसी प्राइमरी नीड्स का सामान कम होने लगेगा. बढ़ती आबादी से जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों की कमी जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं.
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