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Katchatheevu Island: कच्चातिवु में क्या है घूमने लायक जगह, वहां कैसे जा सकते हैं? आखिर क्यों इंदिरा गांधी सरकार ने श्रीलंका को दिया था ये द्वीप

लोकसभा चुनाव से पहले कच्चातिवु द्वीप का मुद्दा गरम है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इंदिरा गांधी ने इसे श्रीलंका को ये द्वीप क्यों दिया था. आज हम आपको बताएंगे कि इस द्वीप पर घूमने वाली कौन सी जगहें हैं.

लोकसभा चुनाव से पहले ही भारत और श्रीलंका के बीच पाल्क स्ट्रेट पर स्थित कच्चातिवु द्वीप एक बड़ा मुद्दा बन गया है. दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कच्चातिवु द्वीप श्रीलंका को देने के लिए कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा था. जिसके बाद से सोशल मीडिया समेत हर जगह कच्चातिवु द्वीप का जिक्र हो रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कच्चातिवु द्वीप में घूमने वाली जगहें कौनसी है? यहां पर कैसे पहुंचा जा सकता है.

कच्चातिवु द्वीप का इतिहास

पहले ये जानते हैं कि कच्चातिवु द्वीप का इतिहास क्या है. आरटीआई से मिले जवाबों के मुताबिक 1974 में तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने इस द्वीप को श्रीलंका को सौंप दिया था. तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने द्वीप को लेकर एक आरटीआई आवेदन दिया गया था. बता दें कि कच्चातिवु द्वीप हिंद महासागर में भारत के दक्षिण छोर पर है. 285 एकड़ में फैला यह द्वीप भारत के रामेश्वरम और श्रीलंका के बीच में बना हुआ है. 

जानकारी के मुताबिक 17वीं शताब्दी में यह द्वीप मदुरई के राजा रामानंद के अधीन था. अंग्रेजों के शासनकाल में कच्चातिवु द्वीप मद्रास प्रेसीडेंसी के पास आया था. उस दौर में यह द्वीप मछलीपालन के लिए अहम स्थान माना जाता था. यहीं वजह थी कि भारत और श्रीलंका दोनों मछली पकड़ने के लिए इस द्वीप पर अपना-अपना दावा करते थे. आजादी के बाद समुंद्र की सीमा को लेकर 1974-76 के बीच 4 समझौते हुए थे. समझौते के तहत भारतीय मछुआरों को इस द्वीप पर आराम करने और जाल सुखाने की इजाजत दी गई थी और यह द्वीप श्रीलंका को सौंप दिया गया था.

श्रीलंका को क्यों सौंपा गया द्वीप?

जानकारी के मुताबिक साल 1974 में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और श्रीलंका की राष्ट्रपति श्रीमावो भंडारनायके के बीच एक समझौता हुआ था. समझौते के तहत इंदिरा गांधी ने श्रीलंका को कच्चातिवु द्वीप सौंप दिया था. इस समझौते को लेकर 26 जून को कोलंबो और 28 जून को दिल्ली में दोनों देशों के बीच बातचीत हुई थी. बैठक के बाद ही कुछ शर्तों के साथ इस द्वीप को श्रीलंका को सौंपा गया था. इसमें शर्त ये थी कि भारतीय मछुआरे इसका इस्तेमाल जाल सुखाने और आराम करने के लिए करते रहेंगे. शर्त में यह भी कहा गया था कि इस द्वीप पर बने चर्च में भारतीयों को बिना वीजा जाने की इजाजत नहीं होगी. वहीं भारतीय मछुआरे यहां पर मछलियां भी नहीं पकड़ सकते हैं. 

ये हैं घूमने वाली जगहें

कच्चातिवु द्वीप भारत और श्रीलंका के बीच पर एक छोटा सा आईलैंड है. इसे विवादित क्षेत्र के रुप में भी जाना जाता है. यहां पर घूमने के लिए सबसे फेमस सेंट एंटनी चर्च है. जहां पर लोकल लोगों का जाना खूब होता है. इसके अलावा यहां पर बहुत सारे समुद्री तट हैं, जिन्हें हम बीच भी कहते हैं. जानकारी के मुताबिक कच्चातिवु द्वीप पर अलग-अलग प्रजाति की मछलियां बहुत पाई जाती हैं. 

कैसे पहुंच सकते ?

कच्चातिवु पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन तमिलनाडु का मदुरई स्टेशन है. वहीं सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन रामेश्वरम रेलवे स्टेशन हैं. यहां से आप समुद्र मार्ग के जरिए कच्चातिवु द्वीप जा सकते हैं. हालांकि कच्चातिवु द्वीप जाने के लिए सभी भारतीयों को पासपोर्ट की जरूरत होती है. 

 

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