राष्ट्रपति शासन अगर कई साल तक रहा तो विधायकों का क्या होता है रोल? जानें कैसे होता है काम
राज्यपाल की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है. इसके बाद राज्य सरकार की सारी शक्तियां राज्यपाल के पास आ जाती हैं. इस दौरान राज्यपाल विधानसभा और मंत्रीपरिषद को भंग कर देता है.

Manipure President Rule: भारत के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया है. यह फैसला मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद लिया गया. बीते रविवार को उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया था, जिसके बाद संभावना थी कि भाजपा नए चेहरे को मुख्यमंत्री के रूप में आगे करेगी, हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ और राज्यपाल की सिफारिश पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया है.
मणिपुर में इससे पहले 10 बार राष्ट्रपति शासन लगाया जा चुका है. राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद राज्य सरकार की सारी शक्तियां राज्यपाल के पास आ गई हैं. यहां विधानसभा भी भंग कर दी गई है. ऐसे में सवाल यह है कि अगर किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन कई साल तक लगा रहता है, तो विधायकों का क्या रोल होता है? इस दौरान कैसे काम होता है और राज्य के बारे में फैसले कौन लेता है.
कितने साल तक चल सकता है राष्ट्रपति शासन
किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन अधिकतम कितने दिन तक लगाया जा सकता है? दरअसल, इसको लेकर नियम बनाए गए हैं. राष्ट्रपति शासन लागू होने की घोषणा की तारीख से दो माह के भीतर संसद के दोनों सदनों द्वारा अनुमोदन होना चाहिए. एक बार जब दोनों सदनों से अनुमोदन हो जाता है, तो इसे छह माह तक लगाया जा सकता है. हालांकि, छह-छह माह करके इसे अधिकतम तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है.
कैसे होता है काम?
राज्यपाल की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है. इसके बाद राज्य सरकार की सारी शक्तियां राज्यपाल के पास आ जाती हैं. इस दौरान राज्यपाल विधानसभा और मंत्रीपरिषद को भंग कर देता है और पूरा कामकाज अपने हाथों में ले लिया जाता है. अनुच्छेद 356 के तहत कहा गया है कि राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्य विधायिका की शक्तियों का इस्तेमाल संसद के पास आ जाता है.
संसद बना सकती है कानून
राष्ट्रपति शासन की अवधि में विधानसभा निलंबित रहती है. ऐसे में इसकी शक्तियों का इस्तेमाल संसद करती है. राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद राज्य के बजट प्रस्ताव व विधेयक संसद द्वारा ही पारित किए जाते हैं. जब संसद नहीं चल रही होती है तो राष्ट्रपति, राज्य के लिए कोई अध्यादेश जारी कर सकता है.
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