Muslim cricketers Roza During Match: रमजान मुस्लिमों का पवित्र महीना है. इस्लाम कैलेंडर के हिसाब से ये नौवां महीना है और इस दिन मुस्लिम 29 या 30 रोजे रखते हैं. इस्लाम धर्म में रोजे रखना अनिवार्य माना जाता है, इसीलिए ज्यादातर मुस्लिम सारे रोजे रखते हैं और जिनके रोजे किसी वजह से छूट जाते हैं या टूट जाते हैं, वो उनको बाद में पूरा करते हैं. लेकिन हाल ही में चैंपियंस ट्रॉफी मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मोहम्मद शमी को जूस/एनर्जी ड्रिंक पीते हुए देखा गया था. जिससे सोशल मीडिया पर हल्ला हो गया कि शमी ने रोजा क्यों नहीं रखा.


शमी की तुलना साउथ अफ्रीका के खिलाड़ी हाशिम अमला से कर दी गई. कहा गया कि एक मौके पर उन्होंने रोजा रखा था और 311 रनों की पारी खेली थी. इसके बाद ये बहस बढ़ने लगी कि क्या कोई क्रिकेटर सीरीज के दौरान रोजा रख सकता है? चलिए आपको इसके पीछे नियम बताएं. 


हाशिम अमला से होने लगी शमी की तुलना


शमी की जूस पीते फोटो वायरल होने के बाद लोगों ने कहा कि हाशिम अमला ने जुलाई 2012 में  इंग्लैंड के खिलाफ रिकॉर्डतोड़ पारी खेली थी और इस दौरान वो रोजा कर रहे थे. लेकिन ये दावे गलत हैं. द गार्जियन से बात करते हुए हाशिम अमला ने कहा था कि “मैं घर से बाहर हूं और ट्रैवेल कर रहा हूं, इसलिए मैंने रोजा नहीं रखा है. लेकिन जब मैं अपने घर पहुंचूंगा तब इसे पूरा करूंगा.” वहीं शमी के जूस पीने पर बरेली के मौलाना ने नाराजगी जताई थी. इसके अलावा ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि इस्लाम ने रोजे को फर्ज करार दिया है. अगर फिर भी कोई शख्स जानबूझकर रोजा नहीं रखता है तो वो गुनाहगार है. रोजा न रखकर शमी ने गुनाह किया है. 


क्या कहता है इस्लामिक नियम


इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेरमैन और ईदगाह के मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने भी इस मसले पर बात की है. उन्होंने कहा, इस्लाम में ऐसा नहीं कहा गया है कि अगर आप नेशनल ड्यूटी पर तब भी आपको रोजा रखना अनिवार्य है. इस्लाम में ऐसा है कि अगर आप कहीं पर बाहर गए हैं और सफर कर रहे हैं तो रोजा नहीं भी रख सकते हैं. लेकिन जब आप अपने देश या घर वापस आ जाएं तो रोजा रखे जा सकते हैं. 


कोच ने दिया शमी का साथ 


वहीं इस मामले पर शमी के बचपन के कोच बदरुद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि “शमी ने कोई गलती नहीं की है. पूरा देश उनके साथ है और देश के आगे कुछ भी नहीं है. और यही संदेश वो सभी मौलवियों को देना चाहते हैं. शमी को चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल खेलना है और इस तरीके की बातों के खिलाड़ी का मनोबल टूटता है.”