भारत के इस पड़ोसी देश में सिर्फ मुस्लिमों को मिलती है नागरिकता, ये पाकिस्तान नहीं है
मालदीव का संविधान कहता है कि सिर्फ वही लोग मालदीव के नागरिक हो सकते हैं जो इस्लाम को मानते हों यानी मुसलमान हों. यहां तक कि मालदीव 2008 का संविधान ये तक कहता है कि सुन्नी इस्लाम यहां का राजधर्म होगा.
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जब भी कभी भारत के किसी मुस्लिम पड़ोसी देश की बात आती है तो हमारे जहन में सबसे पहला नाम पाकिस्तान का आता है. लेकिन आज हम जिस देश की बात कर रहे हैं वो पाकिस्तान नहीं बल्कि कोई और देश है. दरअसल, हम बात कर रहे हैं, मालदीव की. मालदीव एशिया का सबसे छोटा देश है, इसका क्षेत्रफल 298 वर्ग किलोमीटर है. आपको जानकर हैरानी होगी कि इस देश में सिर्फ कुछ लाख लोग ही रहते हैं.
कितनी है यहां कि जनसंख्या
मालदीव की आबादी की बात करें तो 2016 की जनगणना के मुताबिक, यहां की आबादी लगभग 4 लाख 28 हजार के पास थी. लेकिन 2021 में यहां 5.21 लाख की आबादी होने का आंकलन किया गया. आपको बता दें, मालदीव में करीब 212 द्वीप हैं, जिसमें से करीब 200 द्वीपों पर स्थानीय आबादी रहती है और 12 द्वीपों को सैलानियों के लिए छोड़ा गया है.
भारतीय कैसे जा सकते हैं यहां
भारतीय अगर मालदीव जाना चाहते हैं तो उनको वीजा की जरूरत नहीं होती. दरअसल, मालदीव जाने वालों के लिए वीजा ऑन अराइवल की सुविधा मिलती है. यानी आप यहां के एयरपोर्ट पर जैसे ही उतरेंगे आपको 30 से 90 दिनों का वीजा बिना किसी दिक्कत के मिल जाएगा. बस आपके पास वैलिड पासपोर्ट, मालदीव के किसी होटल में रुकने का प्रूफ होना चाहिए.
इस्लाम को लेकर क्या हैं कानून
मालदीव का संविधान कहता है कि सिर्फ वही लोग मालदीव के नागरिक हो सकते हैं जो इस्लाम को मानते हों यानी मुसलमान हों. यहां तक कि मालदीव 2008 का संविधान ये तक कहता है कि सुन्नी इस्लाम यहां का राजधर्म होगा. इसी संविधान में इस बात का भी जिक्र है कि किसी भी गैर मुस्लिम को इस देश की नागरिकता नहीं दी जा सकती. आपको जानकर हैरानी होगी कि यहां के सरकारी नियम भी इस्लामी कानून पर निर्धारित हैं.
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