अफ्रीका के युगांडा में एक नये वायरस ने दस्तक दे दी है. इस वायरस का नाम डिंगा डिंगा है. जानकारी के मुताबिक इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति का शरीर कांपने लगता है. इस बीमारी से सबसे ज्यादा खतरा महिलाओं और बच्चों को होता है. लेकिन अब सवाल ये है कि इस बीमारी का नाम डिंगा-डिंगा कौन रखा है और किसी भी वायरस का नाम कौन रखता है.
डिंगा-डिंगा वायरस
बता दें कि डिंगा-डिंगा रोग के कारण शरीर पर नियंत्रण खत्म हो जाता है. इससे संक्रमित व्यक्ति को चलने में परेशानी होती है. वहीं प्रभावित मरीज ऐसे हिलता-डुलता रहता है, जैसे वह कोई डांस कर रहा है. फर्स्टपोस्ट इंग्लिश की एक रिपोर्ट के मुताबिक ऐसी पहली अजीब बीमारी युगांडा के बुंदीबुग्यो जिले में पाई गई थी. इस रोग से प्रभावित रोगी को ऐसा महसूस होता है कि वो डांस कर रहा है. इसके अलावा उन्हें तेज बुखार हो जाता है और कमजोरी महसूस होती है. इतना ही नहीं यह बीमारी कुछ लोगों में लकवा का भी कारण बनती है. हालाँकि अभी तक इस बीमारी से किसी की मृत्यु नहीं हुई है. लेकिन ये वायरस अफ्रीका में बहुत तेजी से पैर पसार है, जो चिंता का विषय है.
कौन रखता है वायरस का नाम
अब डिंगा-डिंगा बीमारी और डांस करने जैसे लक्षण को देखते हुए हर कोई ये सोच रहा है कि आखिर इसका नाम कौन रखता है. क्योंकि डिंगा-डिंगा नाम से ही लग रहा है कि जैसे हिलने-डुलने वाली चीज है. आज हम आपको बताएंगे कि दुनियाभर में जब कोई वायरस आता है, तो उसका नाम कौन रखता है. वहीं वायरस के नाम रखने को लेकर क्या नियम होते हैं.
ये संस्था रखती है नाम
बता दें कि किसी बीमारी या वायरस का नाम रखने या बदलने की जिम्मेदारी इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिजीज (ICD) के तहत विश्व स्वास्थ्य संगठन और इंटरनेशनल हेल्थ रिलेटेड क्लासिफिकेशन की डब्ल्यूएचओ फैमिली (WHO-FIC) के पास है. ये संस्थाएं किसी भी नाम को डब्ल्यूएचओ के सदस्यों से पर्याप्त बातचीत करने के बाद ही रख सकती हैं. इतना ही नहीं ये संस्था किसी बीमारी का नाम उसके लक्षणों को ध्यान में रखते हुए बदल भी सकते हैं. लेकिन अक्सर देखा गया है कि किसी भी वायरस का नाम उसके लक्षणों से मिलता-जुलता ही रखा जाता है. जैसे मंकी पॉक्स वायरस का नाम बंदरों से फैलने वाले वायरस के नाम पर रखा गया है.
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