Sentinel Tribe: ये हैं दुनिया के सबसे रहस्यमयी लोग, बाहरी दुनिया से नहीं रखते कोई संपर्क
Sentinel Tribe: सेंटिनली लोग अंडमान के उत्तरी सेंटिनल द्वीप पर रहनी वाली निग्रिटो समुदाय के लोग हैं. ये आज भी बाहरी दुनिया से बिना किसी संपर्क के पूरी तरह से अलग-थलग रहते हैं.
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Sentinel Tribe: दुनिया में तरह-तरह की कई जनजातियां रहती हैं. कुछ धीरे-धीरे मॉर्डन होती जा रही हैं, तो कुछ आज भी अपनी परंपराओं के हिसाब से रहती है. हालांकि, हर जनजाति आज दुनिया के सामने है और लोग इनके बारे में ज्यादातर चीजें जानते हैं. लेकिन क्या आज जानते हैं कि भारत में एक ऐसी जनजाति है, जिसे आज सही से पूरी दुनिया नहीं जान पाई. उसके बारे में लोगों ने सिर्फ कहानियां सुनी हैं, ये कहानियां इतनी खतरनाक हैं कि सुन कर लोगों की रूह कांप जाए. आज हम आपको भारत की ऐसी ही एक रहस्यमयी जनजाति के बारे में बताएंगे जो सेंटिनल द्वीप पर रहते हैं और उन्हें लोग सेंटिनली जनजाति कहते हैं. यह जनजाति अंडमान के उत्तरी सेंटिनल द्वीप पर रहती है.
अब तक दुनिया क्या जानती है इनके बारे में
सेंटिनली लोग अंडमान के उत्तरी सेंटिनल द्वीप पर रहनी वाली निग्रिटो समुदाय के लोग हैं. ये आज भी बाहरी दुनिया से बिना किसी संपर्क के पूरी तरह से अलग-थलग रहते हैं. हालांकि, साल 1991 में जब इन लोगों से भारत की सरकार ने संपर्क साधने की कोशिश की तो इस जनजातीय समुदाय ने भारतीय मानव विज्ञानविदों और प्रशासकों की एक टीम से कुछ नारियल लिए थे. लेकिन ये नारियल भी इन लोगों ने दूर से ही लिए थे. सेंटिनली लोगों से किसी प्रकार का संपर्क ना होने के कारण दूर से ही इनकी तस्वीरों के जरिए इनकी जनगणना की जाती है. इनकी आबादी उत्तरी सेंटिनल द्वीप पर लगभग 50 से 100 के बीच है.
क्या खाते हैं ये लोग
उत्तरी सेंटिनल द्वीप के सर्वेक्षणों से पता चलता है कि यहां कृषि करने का कोई प्रमाण नहीं है. इसके साथ ही अब तक के रिसर्च से यह मालूम चला है कि यह समुदाय समूहों में शिकार करता है. ये लोग मछली पकड़कर भोजन हासिल करते हैं और द्वीप पर रहने वाले जंगली पौधों को इकट्ठा करके उनसे अपना पेट भरते हैं. सेंटिनली लोगों को भारत सरकार द्वारा विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह के रूप में सूचीबद्ध किया गया है.
भारत सरकार के इनके बारे में दिशा निर्देश
इन सेंटिनली लोगों की जनजाति को अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की ग्रेट अंडमानी, ओंग, जारवा और शोम्पेन PVTG के रूप में सूचीबद्ध अन्य चार जनजातियों में से एक के बराबर दर्जा दिया गया है. दरअसल, इन सभी जनजातियों को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (आदिवासी जनजातियों का संरक्षण) विनियमन, 1956 द्वारा संरक्षण दिया गया है. यह कानून जनजातियों के कब्ज़े वाले पारंपरिक क्षेत्रों को संरक्षित क्षेत्र घोषित करता है और अधिकारियों के अलावा किसी के भी यहां प्रवेश पर प्रतिबंध लगाता है. इसके साथ ही इन जनजाति लोगों की फोटो लेना या उन पर किसी भी प्रकार के फिल्मांकन का कार्य करना एक अपराध है.
अनजान लोगों की कर देते हैं हत्या
हाल ही में एक ईसाई मिशनरी इन लोगों को बाइबल का पाठ पढ़ाने गया था और कोशिश कर रहा था कि इन्हें ईसाई धर्म से जोड़ा जाए. हालांकि, इन सेंटिनली लोगों ने उसे तीर मारकर उसकी हत्या कर दी. इन लोगों ने इससे पहले भी कई बार बाहरी लोगों पर हमले किए हैं. इनके पास धारदार तीर और भाले होते हैं.
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