वैलेंटाइन वीक में सोशल मीडिया से लेकर अलग-अलग मार्केट में आपको हर जगह हार्ट शेप वाला इमोजी दिख रहा होगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्यार दर्शाने के लिए उपयोग होने वाला ये हार्ट शेप का दिल असली हार्ट के आकार से कितना है. आज हम आपको बताएंगे कि प्यार के लिए उपयोग होने वाला ये हार्ट शेप कहां से आया है.


असली हार्ट 


हमारे शरीर में जो असली हार्ट है, असल में वो 13 सेंटीमीटर लम्बा और 9 सेंटीमीटर चौड़ा लाल रंग का तिकोना, खोखला एवं मांसल अंग होता है. बता दें कि यह छाती के बीच में थोड़ा सा बाई तरफ स्थित होता है.  इसके अलावा हार्ट एक दिन में लगभग एक लाख बार और एक मिनट में 60 से 90 बार धड़कता है. इसके अलावा यह एक आवरण द्वारा घिरा होता है, जिसे हृदयावरण कहते हैं. वहीं इसमें पेरिकार्डियल द्रव भरा रहता है, जो हृदय की बाहरी आघातों से रक्षा करता है.


हार्ट के दाहिने एवं बाएं ओर दो चैम्बर (एट्रिअम एवं वेंट्रिकल नाम के) होते हैं. इसके अलावा हृदय में चार चैम्बर होते हैं. इसमें दाहिना भाग शरीर से दूषित रक्त प्राप्त करता है एवं उसे फेफडों में पम्प करता है और रक्त फेफडों में शोधित होकर ह्रदय के बाएं भाग में वापस लौटता है. जहां से वह शरीर में वापस पम्प हो जाता है. वहीं चार वॉल्व दो बाईं ओर (मिट्रल एवं एओर्टिक) एवं दो हृदय की दाईं ओर (पल्मोनरी एवं ट्राइक्यूस्पिड) रक्त के बहाव को निर्देशित करने के लिए एक दिशा के द्वार की तरह कार्य करते हैं.


फिर कैसे बना दिल का आकार


बता दें कि जिस दिल को हम लोग प्यार जताने के लिए इस्तेमाल करते हैं, वो असली दिल से बिल्कुल अलग होता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस दिल का इस्तेमाल हम सदियों से प्यार के निशानी के तौर पर करते हैं, वो असल में एक पौधे के बीज से आया है. ये बीज आज प्यार जताने के लिए इस्तेमाल करने वाले दिल की तरह ही दिखता था. इस पौधे का नाम सिल्फियम है. 


एक यूनानी इतिहासकार और भूगोलवेत्ता हेरोडोटस ने अपनी किताब हिस्टोरिया IV.169 में इसका जिक्र करते हुए लिखा है कि इस पौधे के बीजों का इस्तेमाल गर्भनिरोधकर के तौर पर किया जाता था. कुछ कहानियों में दावा किया जाता है कि आज से सदियों पहले जब शादी से पहले लड़के और लड़की के बीच यौन संबंध स्थापित हो जाते थे. उस वक्त लड़की को अनचाहे प्रेग्नेंसी से बचाने के लिए लड़के उन्हें ये बीज भेजते थे. इसके बाद धीरे-धीरे इस बीज को ही प्यार की निशानी माना जाने लगा था. कहानियों के मुताबिक सिल्फियम के बीज के आकार को ही लोग दिल का आकार मानने लगे. हालांकि ये कहानी सोशल मीडिया पर है, हम इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करते हैं. 


 


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