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TIME 100 List: 'दार्जिलिंग एक्सप्रेस' चला दुनिया के 100 प्रतिभाशाली लोगों में शामिल हुईं अस्मा, टाइम मैग्जीन ने यूं दिया सम्मान

TIME Influential People of 2024: भारतीय मूल की अस्मा खान को दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल शामिल किया गया है. आज टाइम ने दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की लिस्ट जारी की.

TIME 100 Most Influential People Asma Khan: टाइम ने आज दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की 2024 की लिस्ट जारी की है. जिसमें भारतीय मूल की अस्मा खान (Asma Khan) शामिल हैं. दरअसल अस्मा खान भारतीय मूल की ब्रिटिश रेस्टोरेंट मालिक और कुकबुक लेखिका हैं. वह लंदन में "दार्जिलिंग एक्सप्रेस" नाम से रेस्टोरेंट चलाती हैं. साथ ही नेटफ्लिक्स की चर्चित सीरीज "Chef's Table" के छठे सीजन में भी वह आ चुकी हैं. वर्ष 2019 में Business Insider ने भी अस्मा कहना को 100 कूलेस्ट पीपल इन फूड एंड ड्रिंक की लिस्ट में नंबर 1 पर रखा था.​ 

दार्जिलिंग एक्सप्रेस की मालकिन अस्मा खान का जन्म साल 1969 में कलकत्ता में हुआ था. रिपोर्ट्स के अनुसार अस्मा खान के पिता उत्तर प्रदेश के रहने वाले थे जबकि उनकी मां पश्चिम बंगाल से थीं. अस्मा शादी के बाद अपने पति के साथ कैम्ब्रिज चली गईं. अस्मा को शुरुआत में खाना बनाना नहीं आता था. उन्होंने कैंब्रिज में रहने वाली एक आंटी से खाना बनाना सीखना शुरू किया. आंटी की मृत्यु के बाद वह कुछ दिन के लिए भारत आईं और यहां अपनी मां और पारिवारिक कुक से खाना बनाना सीखा.

वर्ष 1996 में उनके पति लंदन शिफ्ट हो गए. अस्मा खान ने किंग्स कॉलेज लंदन से लॉ की पढ़ाई शुरू की. साल 2012 में ब्रिटिश कांस्टीट्यूशनल लॉ में पीएचडी की. कुछ दिन बाद अस्मा खान ने अपने घर में ही एक दर्जन लोगों के लिए सपर क्लब शुरू किए. इन क्लबों को अच्छी खासी सफलता मिली. मशहूर शेफ विवेक सिंह ने भी उनके एक क्लब में शिरकत की और उन्हें अपने रेस्टोरेंट "द सिनेमन क्लब" में एक अस्थायी रेस्टोरेंट (पॉप-अप) खोलने का न्योता दिया.  

 
 
 
 
 
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मास्चलर ने की थी तारीफ

फिर धीरे-धीरे अस्मा खान के क्लब की लोकप्रियता बढ़ती गई और इन क्लबों में शामिल होने वाले लोगों की संख्या 45 तक पहुंच गई. लेकिन बाद में परिवारवालों को होने वाली असुविधा को देखते हुए उन्हें अपने क्लब को घर से बाहर शिफ्ट करना पड़ा. वर्ष 2015 में अस्मा ने अपने सपर क्लब को सोहो इलाके में शिफ्ट कर दिया. शुरुआत में उन्हें काफी दिक्कत हुई क्योंकि उनके यहां कम करने वाला स्टाफ पहली बार किसी प्रोफेशनल किचन में काम कर रहा था. लेकिन मशहूर फूड क्रिटिक फे मास्चलर ने उनके रेस्टोरेंट की समीक्षा करते हुए तारीफ की. जिसके बाद उन्हें काफी सफलता मिली और कस्टमर भी बढ़चढ़ कर आने लगे.

बचपन की यादों से जुड़ा है रेस्टोरेंट का नाम

अस्मा खान ने साल 2017 में लंदन के सोहो इलाके में "दार्जिलिंग एक्सप्रेस" नाम से रेस्टोरेंट खोला. ये एक 56 सीटों वाला रेस्टोरेंट था, जहां भारतीय राजपूत और बंगाली खाने के व्यंजन सर्व किए जाते हैं. इस रेस्टोरेंट का नाम अस्मा की बचपन की यादों से जुड़ा हुआ है, दरअसल यह उस ट्रेन का नाम है जिसमे वे गर्मी की छुट्टियों में सफर करती थीं. रिपोर्ट्स के अनुसार दार्जिलिंग एक्सप्रेस की खासियत यह भी है कि रसोई पूरी तरह से महिलाओं पर निर्भर है. ये महिलाएं एशियाई मूल की हैं.

दार्जिलिंग एक्सप्रेस को अपने फील्ड में एक बहुत बड़ी सफलता तब मिली जब प्रतिष्ठित फूड मैगज़ीन "फूड एंड वाइन" ने इसे "स्मैश हिट" करार दिया. अस्मा खान की कहानी और उनके रेस्टोरेंट की खासियत को देखते हुए बीबीसी ने उनके ऊपर एक शार्ट डाक्यूमेंट्री बनाई.

लिखी सफलता की इबादत 

अस्मा खान की सफलता का सिलसिला यहीं तक सीमित नहीं था. इसके बाद "Chef's Table" सीरीज के निर्माता ब्रायन मैकगिन ने शो में शामिल होने का प्रस्ताव दिया. वह इस शो में शामिल होने वाली पहली ब्रिटिश शेफ थीं. उनके रेस्टोरेंट की फेम और अस्मा के हाथों के जादू को दुनिया के सामने लाने के लिए जुलाई 2018 में लंदन और भारत में शो का फिल्मांकन भी शुरु हुआ. इसका निर्देशन जिया मांडवीवाला ने किया था.

यह भी पढ़ें- यूएस में तो भारतीयों को मिलता है ग्रीन कार्ड, दुनिया के बाकी देशों में नागरिकता के लिए कौन-सा कार्ड दिया जाता है?

पत्रकारिता की दुनिया में जब बात पढ़ाई-लिखाई, लाइफस्टाइल, फीचर या न्यूज की आती है, तो चन्द्रिल कुलश्रेष्ठ का नाम सहज ही सामने आता है. जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त कर चुके चन्द्रिल बीते पांच वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय हैं और इस दौरान इन्होंने पत्रकारिता के कई रंग देखे हैं - खबरों की तह तक जाना, आम लोगों की जिंदगी से जुड़ी बातें सामने लाना और क्राइम से जुड़ी कहानियों को तथ्यात्मक ढंग से पेश करना उनकी खासियत बन चुकी है.

चन्द्रिल न सिर्फ रिपोर्टिंग में निपुण हैं, बल्कि कंटेंट राइटिंग, स्टोरी कंसेप्टिंग और फीचर प्रजेंटेशन में भी उनका अंदाज बेहद खास है. खबरों की दुनिया में जहां अक्सर रफ्तार और सनसनी का बोलबाला होता है, वहीं चन्द्रिल की कलम तथ्यों के साथ संतुलन और संवेदनशीलता बनाए रखते हुए काम करती है. वह मानते हैं कि पत्रकारिता का असली उद्देश्य जनता को सही और सटीक जानकारी देना है, न कि महज ध्यान खींचना. यही वजह है कि उनके द्वारा लिखी गई स्टोरीज ना सिर्फ पढ़ने में रोचक होती हैं, बल्कि विश्वसनीयता के मानक पर भी खरी उतरती हैं.

इन दिनों चन्द्रिल ABP Live से जुड़कर कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर काम कर रहे हैं. चाहे बात सरकारी नौकरियों की अपडेट्स की हो, स्कूली शिक्षा में हो रहे बदलावों की या फिर खेती-किसानी से जुड़े जमीनी मुद्दों की हर विषय पर उनकी पकड़ गहरी और प्रस्तुतिकरण सहज होता है. वह खबर को महज सूचना नहीं, बल्कि एक अनुभव की तरह पेश करने में यकीन रखते हैं, ताकि पाठक उससे खुद को जोड़ सके.

क्राइम रिपोर्टिंग में भी चन्द्रिल की शैली अलग है. वह किसी भी केस को सिर्फ घटनाओं के सिलसिले के रूप में नहीं दिखाते, बल्कि उसके पीछे छिपे सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और कानूनी पहलुओं को भी उजागर करने की कोशिश करते हैं.

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