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जी 20 शिखर सम्मेलन के लिए तैयार भारत, वैश्विक कूटनीति में बढ़ती ताकत दिखाने का होगा अवसर

G20 Summit: जी 20 शिखर सम्मेलन भारत के लिए दुनिया को अपनी बढ़ती ताकत दिखाने का भी एक मौका है. इसके जरिए कई मुद्दों पर वैश्विक एजेंडे को तय करने में भारत अब नेतृत्व करेगा, इसकी भी झलक देखने को मिलेगी.

G20 India Presidency: दुनिया के सबसे ताकतवर आर्थिक समूह जी 20 के सालाना शिखर सम्मेलन के लिए भारत पूरी तरह से तैयार है. भारत एक दिसंबर 2022 से इस समूह की अध्यक्षता संभाल रहा है. उसके बाद से भारत इस समूह की सबसे बड़ी बैठक यानी G20 समिट की तैयारियों के लिए पूरी मुस्तैदी से जुटा है.

जी 20 शिखर सम्मेलन का आयोजन 9 और 10 सितंबर को नई दिल्ली में होना है. बतौर अध्यक्ष इस सम्मेलन के लिए एजेंडे को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी भारत के पास ही है. इस मकसद से पिछले 8 महीने से जी 20 से जुड़ी कई बैठकों का आयोजन देश के 50 से भी ज्यादा शहरों में किया गया. अप्रैल मध्य तक जी 20 के बैनर तले करीब सौ बैठकें हो चुकी थी और अध्यक्षता के पूरे कार्यकाल के दौरान करीब दो बैठकें होनी है. इन बैठकों के जरिए भारत की विविधता को दुनिया के सामने दिखाने का भी मौका मिला.

शिखर सम्मेलन जी 20 समूह की सबसे बड़ी बैठक

जो सालाना शिखर सम्मेलन होता है, वो जी 20 समूह की सबसे बड़ी बैठक होती है. इसमें सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष या कार्यकारी प्रमुख हिस्सा लेते हैं. इसके साथ ही सितंबर में नई दिल्ली में होने वाली बैठक में आमंत्रित देशों के तौर पर 9 देशों के राष्ट्र प्रमुख भी भारत आएंगे. आमंत्रित देशों में बांग्लादेश, मिस्र, मॉरीशस, नीदरलैंड्स, नाइजीरिया, ओमान, सिंगापुर, स्पेन और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं.

इनके अलावा शिखर सम्मेलन में  कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे. इनमें  संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, वर्ल्ड बैंक, विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व व्यापार संगठन, इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन, फाइनेंशियल स्टेबिलिटी बोर्ड और आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) शामिल हैं. इनके अलावा अफ्रीकन यूनियन, अफ्रीकन यूनियन डेवलपमेंट एजेंसी ( AUDA-NEPAD) और दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन आसियान के प्रतिनिधि भी बतौर क्षेत्रीय संगठन के तौर पर जी 20 समिट में हिस्सा लेंगे. इनके अलावा बतौर अध्यक्ष भारत ने इंटरनेशनल सोलर एलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर (CDRI) और एशियन डेवलपमेंट बैंक को भी इस बैठक लिए आमंत्रित किया है.

पहली बार भारत में जी 20 का शिखर सम्मेलन

बैठक में शामिल होने वाले देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की सूची से समझा जा सकता है कि जी 20 शिखर सम्मेलन कितना बड़ा आयोजन है. ये पहला मौका है जब भारत में जी20 का शिखर सम्मेलन हो रहा है. जो भी देश समूह का अध्यक्ष होता है, वहीं शिखर सम्मेलन का भी आयोजन किया जाता है. भारत में होने वाला समिट जी20 का 18वां शिखर सम्मेलन है. ये एक ऐसा मौका होता है जिसके जरिए मेजबान देश वैश्विक बिरादरी में अपनी ताकत का एहसास करा सकता है और भारत इसके लिए पूरी तरह से तैयार है.

'भारत मंडपम' में होगा जी 20 शिखर सम्मेलन

नई दिल्ली में जिस जगह पर जी 20 शिखर सम्मेलन होना है, बैठक के करीब डेढ़ महीने पहले ही भारत ने उसे पूरी तरह से तैयार कर लिया है. ये बैठक नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आईटीपीओ अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी-सह-सम्मेलन केंद्र (IECC) परिसर में होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परिसर का उद्घाटन 26 जुलाई को किया. इस परिसर को 'भारत मंडपम' नाम दिया गया है. इसको बनाने में करीब 2,700 करोड़ रुपये का खर्च आया है. इस परिसर की भव्यता ऐसी है कि जब जी 20 की बैठक होगी तो पूरी दुनिया भारत के बढ़ते कद से परिचित होगी.

'भारत मंडपम' की भव्यता देखेंगे विदेशी मेहमान

'भारत मंडपम' ये भी दर्शाता है कि बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर भारत के कदम कितने आगे बढ़ गए हैं. करीब 123 एकड़ में फैले परिसर क्षेत्र के साथ आईईसीसी कॉम्‍प्‍लेक्‍स को भारत के सबसे बड़े एमआईसीई गंतव्य के रूप में विकसित किया गया है. आयोजनों के लिए उपलब्ध कवर एरिया के लिहाज से आईईसीसी कॉम्‍प्‍लेक्‍स दुनिया के शीर्ष प्रदर्शनी और सम्मेलन परिसरों में शामिल हो गया है. इसके भव्य मल्टीपरपज हॉल और प्लेनरी हॉल की संयुक्त क्षमता सात हजार लोगों की है. ये ऑस्ट्रेलिया के मशहूर सिडनी ओपेरा हाउस की बैठने की क्षमता से भी ज्यादा है. इसके शानदार एम्फीथिएटर में  3,000 लोगों के बैठने की क्षमता है.

वैश्विक कूटनीति में ताकत दिखाने का मौका

जी 20 अध्यक्ष के तौर पर भारत के पास वैश्विक कूटनीति में अपनी ताकत दिखाने का एक मौका था और भारत ने पिछले 8 महीने में इसका भरपूर इस्तेमाल किया है. अब जी 20 शिखर सम्मेलन में जिस घोषणापत्र पर सहमति बनेगी, उसमें भारत की बढ़ती ताकत का भी एहसास पूरी दुनिया को होगी, इसकी पूरी तैयारी भारत ने कर लिया है.

अफ्रीकन यूनियन को स्थायी सदस्य बनाने पर ज़ोर

जी 20 शिखर सम्मेलन में भारत की सफलता के नजरिए से सबसे बड़ा कदम होगा यूरोपीय यूनियन की तर्ज पर 55 सदस्यों वाले अफ्रीकन यूनियन (AU) को इस समूह का स्थायी सदस्यता दिलवाना. भारतीय प्रधानमंत्री ने ऐसा प्रस्ताव बनाया था और जिसको लेकर भारत सभी देशों में सहमति बनाने की कोशिशों में जुटा है. अभी हाल ही में जी 20 के लिए भारत के शेरपा अमिताभ कांत ने जानकारी दी थी कि भारत के इस प्रस्ताव को लेकर सदस्य देशों की ओर से सकारात्मक रुख दिख रहा है.

अफ्रीकन यूनियन स्थायी सदस्य बन गया तो ...

अब अगर भारतीय अध्यक्षता में ऐसा हो गया तो ये भारत के लिए बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत होगी. भारत इसके जरिए जी 20 जैसे समूह में आबादी और क्षेत्रफल के हिसाब से दुनिया के दूसरे सबसे बड़े महाद्वीप अफ्रीका के तमाम देशों की सहभागिता सुनिश्चित करना चाहता है. इसके जरिए भारत के उस दावे को वैश्विक मंजूरी भी मिलेगी कि भारत ग्लोबल साउथ के देशों की बुलंद आवाज बन चुका है. इसके साथ अफ्रीका के 50 से ज्यादा देशों में भारत को लेकर भरोसा और मजबूत होगा. अफ्रीका महाद्वीप में भारतीय हितों का संरक्षण भी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी. इसके अलावा दुनिया के सौ से ज्यादा गरीब और अल्पविकसित देशों के भारत के प्रति नजरिया में काफी बदलाव देखने को मिलेगा.

रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अगर कुछ हुआ तो..

हम जानते हैं कि रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 से युद्ध जारी है. इस संघर्ष के 17 महीने से ज्यादा हो चुके हैं और इसके खत्म होने की संभावना अभी नहीं दिख रही है. इस युद्ध से रूस और यूक्रेन पर तो असर पड़ ही रहा है, उसके साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी मंदी की छाया पड़ रही है. सबसे ज्यादा प्रभावित फूड सप्लाई चेन हो रहा है. फिलहाल रूस और यूक्रेन दोनों ही पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे हैं. इनमें से रूस जी 20 का सदस्य है और भारत के उससे संबंध भी काफी बेहतर हैं. इस युद्ध को लेकर भारत ने अपने हितों को देखते हुए कभी भी रूस की खुलेआम निंदा नहीं की है. इसके बावजूद भारतीय पक्ष को रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवधि में कई बार कहा है कि युद्ध से किसी भी समस्या का समाधान नहीं निकाला जा सकता है और वार्ता ही वो जरिया है, जिससे इस संकट से बाहर आया जा सकता है. उन्होंने युद्ध को मानवता के विरुद्ध भी बताया था.

सम्मेलन के लिए पुतिन के भारत आने की संभावना

अब जी 20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत आने की संभावना बन गई है तो ऐसे में पूरी दुनिया की निगाह इस पर भी टिकी होगी. रूस के साथ भारत की नजदीकियां और ऐतिहासिक संबंधों को देखते हुए कई देशों के साथ ही विदेश मामलों के जानकारों का भी मानना है कि इस युद्ध को रोकने में भारत की भूमिका कूटनीतिक तौर से अहम हो सकती है. ऐसे तो जी 20 शिखर सम्मेलन के एजेंडे में द्विपक्षीय मुद्दे नहीं होते हैं, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के वैश्विक असर ने इसे अब द्विपक्षीय मुद्दा नहीं रहने दिया है. अगर भारत के किसी भी प्रयास से इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल रूस की ओर से देखने को मिलता, तो ये भारत के लिए बहुत बड़ी कूटनीतिक सफलता होगी.

वैश्विक मुद्दों के निर्धारण में अहम भूमिका

जैसा कि हम सब जानते हैं कि जी 20 समूह में दुनिया के वो सारे देश जुड़े हैं, जिनका असर वैश्विक मुद्दों के निर्धारण में सबसे ज्यादा है. इसके स्थायी सदस्यों में यूरोपीय यूनियन के साथ ही दुनिया के तमाम बड़े देश शामिल हैं. यूरोपीय यूनियन के साथ ही कनाडा, मेक्सिको, संयुक्त राज्य अमेरिका, अर्जेंटीना, ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका,  चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, भारत, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, तुर्की, रूस, फ्रांस, जर्मनी, इटली, यूनाइटेड किंगडम और  ऑस्ट्रेलिया जी 20 के सदस्य हैं. वैश्विक जीडीपी में जी 20 का हिस्सा करीब 85% है. समूह का वैश्विक व्यापार में योगदान 75 फीसदी से भी ज्यादा है.  समूह के सदस्य देशों में विश्व की कुल आबादी का 67% हिस्सा रहता है. यही सारे देश वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा और दशा तय करते हैं. जी 20 समूह दुनिया के सबसे विकसित 7 देशों के समूह जी 7 से भी ज्यादा महत्व वाला हो गया है.

भारत की बढ़ती ताकत का एहसास

ऐसे में तमाम वैश्विक मुद्दों पर अगर भारत अपनी अध्यक्षता में विकासशील और अल्पविकसित देशों के हितों को जी 20 के एजेंडे में जगह दिलाने में कामयाब होता है तो ये बड़ी कामयाबी होगी. इन मुद्दों में कार्बन उत्सर्जन को लेकर गरीब देशों को मिलने वाली आर्थिक मदद, क्लीन एनर्जी को लेकर अल्प विकसित देशों को तकनीकी और आर्थिक मदद, खाद्यान्न सुरक्षा और सप्लाई चेन का मसला काफी महत्वपूर्ण है. इन मुद्दों पर भारत की बातों को कोई भी देश नजरअंदाज नहीं कर सकता है.

भारत की बड़ी होती अर्थव्यवस्था और भविष्य में वैश्विक अर्थव्यवस्था को नया आयाम देने की संभावना होने की वजह से फिलहाल भारत की चिंता को कोई देश हल्के में नहीं ले सकता है. इन सब मुद्दों पर भारतीय पहल  से ये भी सुनिश्चित हो जाएगा कि G20 की प्राथमिकताओं को तय करने में भविष्य में गरीब और अल्प विकसित देशों की राय और हितों को भी उतना ही महत्व मिलेगा.

जी 20 की अध्यक्षता में अब तक जितनी भी बैठकें हुई हैं, उनके जरिए भारत की सांस्कृतिक शक्ति और शानदार विरासत को दुनिया को दिखाने का मौका मिला है. जी 20 शिखर सम्मेलन के जरिए एक बार फिर भारत की सांस्कृतिक विविधता को लोग वैश्विक स्तर पर जान सकेंगे. साथ ही सम्मेलन में जो भी एजेंडा या घोषणापत्र स्वीकार किया जाएगा, उसमें भारत की बढ़ती ताकत की झलक जरूर होगी.

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