इन्फ्लुएंजा की दवा क्या कोविड-19 का इलाज कर सकती है? जानिए प्रायोगिक एंटी वायरल दवा के नतीजे
कोविड-19 के मामले निरंतर बीमारी और दुनिया भर में मौत की वजह बन रहे हैं. उसके खतरे को कम करने के लिए बेहरत इलाज की जरूरत है. इन्फ्लुएंजा के इलाज में काम आनेवाली एक दवा कोरोना वायरस को नकल बनाने से रोकने में सक्षम साबित हुई है. दवा मानव परीक्षण के दूसरे और तीसरे चरण में है. दुनिया भर की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए खतरे को कम करने के लिए अभी और दवा की खोज करना जरूरी है.
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Coronavirus: कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत से समस्या का हल ढूंढने में विशेषज्ञ अनथक प्रयास कर रहे हैं. वैक्सीन की सूरत में लोगों के लिए टीकाकरण का काम जारी है. लेकिन प्रभावी इलाज नहीं होने से विशेषज्ञों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है. महत्वपूर्ण खोज के तहत, वैज्ञानिकों ने पाया है कि प्रायोगिक ओरल एंटी वायरल दवा कोरोना वायरस को रोकने और कोविड-19 का इलाज करने में सक्षम हो सकती है. नेचर कम्यूनिकेशन्स पत्रिका में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, उसने हैम्स्टर के लंग्स में रोग क्षति और वायरस का लेवल घटा दिया. MK-4482 दवा का वर्तमान में मानव परीक्षण चल रहा है. छोटे स्तर पर मानव परीक्षण के तहत शोधकर्ताओं ने ओरल एंटी वायरल दवा MK-4482 को प्रभावी पाया है यानी कोरोना वायरस संक्रमण के 12 घंटे पहले या बाद में देने पर असरदार है.
कोविड-19 के इलाज में ओरल एंटी वायरल दवा प्रभावी
अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के वैज्ञानिकों का कहना है कि MK-4482 संभावित तौर पर कोरोना वायरस का जोखिम कम कर सकती है और यहां तक कि संक्रमण का इलाज कर सकती है या संभावित तौर पर दोनों. रिसर्च के लिए उन्होंने हैम्स्टर को तीन ग्रुप में बांटा यानी संक्रमण से पहले का इलाज ग्रुप, संक्रमण के बाद का इलाज ग्रुप और बिना इलाज के कंट्रोल ग्रुप. हर ग्रुप को एंटी वायरल दवा मौखिक तौर पर तीन दिनों तक हर 12 घंटे में इस्तेमाल कराया गया.
रिसर्च के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि इलाज वाले ग्रुप में शामिल जानवरों ने कंट्रोल ग्रुप के मुकाबले अपने लंग्स में संक्रामक वायरस को कम दिखाया. इलाज वाले ग्रुप में शामिल हैम्स्टर ने कंट्रोल ग्रुप के मुकाबले लंग्स में ज्यादा कम क्षति भी दिखाया. रिसर्च के अंत में उन्होंने पाया कि MK-4482 दवा वायरस को नकल बनाने से रोकने में प्रभावी है.
इन्फ्लुएंजा की दवा MK-4482 का EIDD-2801 भी है नाम
MK-4482 दवा को मर्क की साझेदारी में बायोटेक्नोलॉजी कंपनी रिजबैक बायोथेराप्यूटिक्स के जरिए संभावित कोविड-19 इलाज के तौर पर विकसित किया जा रहा है. अटलांटा में एमोरे यूनिवर्सिटी का ड्रग इनोवेशन वेंचर्स ग्रुप ने दवा का निर्माण किया है, जिसका इस्तेमाल इन्फ्लुएंजा के इलाज के लिए किया जाता है. MK-4482 दवा को EIDD-2801 और मोलनुपिराविर भी कहा जाता है.
अब तक, अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने सिर्फ एक दवा रेमडिसिविर को कोविड-19 का इलाज करने के लिए मान्यता दी है. व्यस्कों और 12 साल और उससे ज्यादा के बच्चों में कोविड-19 का इलाज करने के लिए मंजूरी दी गई है. कुछ अन्य दवाइयों को भी मंजूर किया गया है लेकिन सिर्फ आपातकालीन इस्तेमाल के लिए, जिसमें गठिया के इलाज में इस्तेमाल होनेवाली दवा बैरीसिटनिब शामिल है. फैवीपिराविर, मेरिमपोडिब समेत कई अन्य दवाइयों का कोरोना वायरस के खिलाफ परीक्षण किया जा रहा है.
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