Covid-19: नार्वे के शोधकर्ता संक्रमित मरीजों के शुक्राणु इकट्ठा कर रहे हैं, समझिए क्यों?
कोविड-19 के शुक्राणु पर पड़ने वाले असर को पहली बार समझने की कोशिश की जा रही हैनार्वे के शोधकर्ताओं ने अब तक 30-40 उम्र के 50 संक्रमित मरीजों के नमूने इकट्ठे कर लिए हैं
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नार्वे के शोधकर्ता संक्रमित लोगों के शुक्राणु पर कोविड-19 के प्रभाव का अध्ययन करने जा रहे हैं. शोध के लिए उन्होंने संक्रमित लोगों के शुक्राणु का सैंपल इकट्ठा करना शुरू दिया है. अब तक 30-40 से ज्यादा उम्र वाले 50 मरीजों के नमूने हासिल किए गए हैं. उनका कहना है कि नतीजे से पता चलेगा कि बीमारी से शुक्राणु और अगली पीढ़ी का इम्यून सिस्टम किस हद तक प्रभावित हो सकता है.
कोविड-19 का शुक्राणु पर क्यो होगा प्रभाव?
नार्वे की बरजन यूनिवर्सिटी की तरफ से किए जा रहे शोध के लिए छात्रों को भी शामिल करने का मंसूबा है. उनके नमूने एक साल बाद टेस्टिंग के लिए इकट्ठे किए जाएंगे. परियोजना का मसकद ये पता लगाना है कि कैसे संक्रमण इम्यून सिस्टम के विकास को प्रभावित करता है और फॉलो-अप रिपोर्ट से खुलासा होगा कि भविष्य में बच्चों का इम्यून सिस्टम पर कैसा असर पड़ता है.
बरजन यूनिवर्सिटी में सेंटर फोर इंटरनेशल हेल्थ के प्रोफेसर सेसिली वानेस कहते हैं, "इम्यून सिस्टम हर तरह के संक्रमण से प्रशिक्षित होता है. हम अध्ययन करना चाहते हैं कि कोविड-19 से कैसे ये प्रभावित होता है और ये भी समझना चाहते हैं कि क्या संक्रमण से भविष्य में अगली पीढ़ी के इम्यून सिस्टम के लिए पेचीदगी भी हो सकती है. यही वजह है कि हमने संपूर्ण ब्लड के अतिरिक्त शुक्राणु पर शोध करने का फैसला किया है."
शोधकर्ताओं का कहना है कि इंसानों पर इस तरह का पहली बार शोध हो रहा है. कोविड-19 की बीमारी ने वैज्ञानिकों को इम्यून-ट्रेनिंग पर शोध करने का नया और अनोखा अवसर मुहैया किया है और कैसे संक्रमण का प्रभाव अगली पीढ़ी पर पड़ सकता है. हमारे इम्यून सिस्टम में सभी तरह का संक्रमण प्रतिक्रिया उत्तेजित करता है.
नार्वे में किए जानेवाले शोध से मिलेगा जवाबशोधकर्ताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य ये जानना है कि कोविड-19 से इम्यून सिस्टम को अच्छे या बुरे किस अंदाज में प्रशिक्षण मिलता है. सेसिली वानेस ने बताया कि पूर्व में जानवरों पर टेस्टिंग से पता चला है कि संक्रमण भविष्य में बच्चों के इम्यून सिस्टम को अच्छे या बुरे अंदाज में प्रभावित कर सकता है. इसलिए उनका मानना है कि संक्रमण, शुक्राणु और औलाद के बीच संबंध जेनेटिक तब्दीलियों का नतीजा है क्योंकि बीमारी से वंशानुगत सामग्री पर प्रभाव पड़ता है.
शरीर इम्यून सिस्टम के लिए प्रोटीन तैयार करता है. इसके लिए शोधकर्ता DNA तक प्रोटीन को पहुंचानेवाले संदेशवाहक RNA पर भी काम कर रहे हैं. शोधकर्ता कोविड-19 के मरीजों से बच्चों के जन्म तक इंतजार नहीं कर सकते, इसलिए पिता की बीमारी का अगली पीढ़ी के इम्यून रिस्पॉंस पर होनेवाले प्रभाव का अध्ययन करना चाहते हैं.
शोध के दौरान कोविड-19 के मरीजों के साथ-साथ सेहतमंद लोगों के नमूनों का भी तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा. शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर शुक्राणु में काफी नकारात्मक परिवर्तन दिखाई दिया, तो हो सकता है लोगों को मशविरा देना पड़े कि कोविड-19 के बाद कुछ समय तक बच्चों के जन्म का इंतजार करें.
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