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Sweating And Health: दिनभर में कितना पसीना बहाना बेहद जरूरी, जानें किन बीमारियों से मिलती है राहत?

Sweating Benefits: मेहनत करने या गर्मी के मौसम में अक्सर लोगों को पसीना निकलता है. चलिए आपको बताते हैं कि इससे कौन सी बीमारी नहीं होती है और कब यह खतरनाक हो जाता है.

Is Sweating Good For Health: पसीना आना शरीर की एक बेहद जरूरी प्रक्रिया है, जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करने और सेहत बनाए रखने में मदद करती है. अक्सर ज्यादा पसीना आने पर लोग चिंता करने लगते हैं, लेकिन यह समझना भी उतना ही जरूरी है कि सामान्य पसीना कितना होता है और कब यह सेहत का संकेत देता है. पसीना ग्लैंड्स से निकलने वाला नमक-युक्त तरल होता है, जो त्वचा से वाष्पित होकर शरीर को ठंडा करता है. कितना पसीना आएगा, यह कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे फिजिकल एक्टिविटी, मौसम, तनाव का स्तर और व्यक्ति की शारीरिक बनावट.  चलिए आपको बताते हैं कि इससे किन बीमारियों से राहत मिलती है. 

पसीना क्यों आता है?

पसीना आना, जिसे परसीपरेशन भी कहा जाता है, शरीर का तापमान संतुलित रखने का तरीका है. जब शरीर के अंदर या बाहर का तापमान बढ़ता है, तो ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम पसीना ग्लैंड्स  को सक्रिय करता है. ये ग्लैंड्स  त्वचा के जरिए तरल छोड़ती हैं और जब यह तरल सूखता है, तो शरीर ठंडा होने लगता है. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक रिसर्च के अनुसार, पसीना आने की मात्रा हर व्यक्ति में अलग होती है और एक ही व्यक्ति में भी अलग-अलग दिनों में यह बदल सकती है. खासकर एंड्योरेंस ट्रेनिंग करने वाले एथलीट्स में एक्सरसाइज की तीव्रता, मौसम और शारीरिक स्थितियों के कारण दिनभर में निकलने वाले पसीने की मात्रा में काफी फर्क देखा गया है. इसी वजह से हाइड्रेशन और तरल पदार्थों की सही पूर्ति बेहद जरूरी मानी जाती है.

पसीने में ज्यादातर पानी होता है, जबकि करीब एक प्रतिशत हिस्सा नमक और फैट का होता है. गर्म मौसम या शारीरिक मेहनत के दौरान शरीर को ठंडा रखने के लिए यह प्रक्रिया बेहद जरूरी होती है. इसके अलावा चिंता, तनाव या घबराहट जैसी भावनाएं भी पसीना बढ़ा सकती हैं.

कितना पसीना सामान्य माना जाता है?

पसीने की सामान्य मात्रा हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकती है.आमतौर पर एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति सामान्य परिस्थितियों में दिनभर में लगभग 0.5 से 2 लीटर तक पसीना निकाल सकता है. पसीना इन स्थितियों में ज्यादा आता है गर्मी या ज्यादा नमी वाले मौसम में, शारीरिक मेहनत या एक्सरसाइज के दौरान, मानसिक तनाव या घबराहट में, मसालेदार खाना, कैफीन या शराब लेने पर, और हार्मोनल बदलाव जैसे मेनोपॉज के समय. इसके अलावा मेटाबॉलिज्म, फिटनेस लेवल और जेनेटिक कारणों से भी पसीने की मात्रा प्रभावित होती है.

कब पसीना जरूरत से ज्यादा हो जाता है?

जरूरत से ज्यादा पसीना आना हाइपरहाइड्रोसिस कहलाता है. इसमें पसीना शरीर को ठंडा रखने की जरूरत से ज्यादा निकलता है. इसके लक्षणों में बिना मेहनत या गर्मी के पसीना आना, सिर्फ हथेलियों, पैरों या बगल जैसे हिस्सों में ज्यादा पसीना आना, रोजमर्रा के कामों में परेशानी और पसीने वाले हिस्सों में बार-बार स्किन इंफेक्शन शामिल हैं. हाइपरहाइड्रोसिस दो तरह का हो सकता है. प्राइमरी हाइपरहाइड्रोसिस में पसीना ग्रंथियां ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं, जबकि सेकेंडरी हाइपरहाइड्रोसिस डायबिटीज, थायरॉइड, इंफेक्शन, मेनोपॉज या कुछ दवाओं के कारण हो सकता है.

कम पसीना आना भी हो सकता है खतरनाक?

पसीना कम आना या बिल्कुल न आना, जिसे हाइपोहाइड्रोसिस कहा जाता है, भी जोखिम भरा हो सकता है. जब शरीर पर्याप्त पसीना नहीं निकाल पाता, तो वह ठीक से ठंडा नहीं हो पाता, जिससे हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है. अगर गर्मी या एक्सरसाइज के बावजूद पसीना न आए, चक्कर, बेहोशी या गर्मी सहन न होने जैसी दिक्कतें हों, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

इसे भी पढ़ें- कड़ाके की सर्दी के बाद अचानक हो गई गर्मी, यह किन लोगों के लिए खतरनाक?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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About the author सोनम

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. 

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट  एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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