एक्सप्लोरर
हैरतअंगेज! गर्भावस्था में इन छोटी-छोटी कमियों के कारण नहीं हो पाता भ्रूण का विकास

नईदिल्लीः हाल ही में सोशल मीडिया पर एक नवजात की तस्वीरें वायरल हो रहीं थी जिसे एलियन कहा जा रहा था. पटना के पालीगंज अस्पताल में जन्मे इस बच्चे को आखिर ऐसा क्या हुआ था कि लोग उसे एलियन समझने लगे. एबीपीन्यूज ने इसकी जांच पड़ताल की और डॉक्टर्स से बात की जानिए, क्या कहना है डॉक्टर्स का.
क्या कहते हैं डॉक्टर-
चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. आशीष गुप्ता के मुताबिक, हारलेक्विन (harlequin) नामक एक बीमारी होती है जो कि जेनेटिक म्यूटेशन के कारण होती है. एक प्रोटीन होता है ABCA 12 जीन. जीन में डिफेक्ट के कारण ये बीमारी होती है. इस बीमारी के कारण पूरी बॉडी में डिफेक्ट पाए जाते है. इससे बच्चा दिखने में बहुत ही असामान्य सा होता है. बच्चे की स्किन कटी हुई होती है. शरीर में बहुत ड्राईनेस होती है.
हारलेक्विन बीमारी-
कई बार ये बीमारी रैंडम भी होती है तो कई बार दवाओं के कारण या फिर दूषित खाना खाने से हो सकती है. अभी तक इस बीमारी का ठोस कारण क्या होता है ये पता लगाना मुश्किल होता है.
ये बीमारी बेशक समय से पहले डिटेक्ट हो सकती है लेकिन ये भी जरूरी नहीं कि हर केस में डिटेक्ट हो.
अल्ट्रासांड्स में कुछ साइंस ऐसे होते हैं जिससे डाउट हो जाता है कि ये बीमारी है और उसके बाद एक जेनेटिक टेस्टिंग होती है. यूट्रेस के अंदर ही स्किन बायोप्सी करवा सकते हैं.
तीन लाख बच्चों में से किसी एक बच्चे को ये बीमारी होती है. ऐसे बच्चे ज्यादा वक्त तक जिंदा नहीं रह पाते.
हरलेक्विन बेबी-
डीन, डॉ. काजल मित्रा के मुताबिक, गर्भ के पानी का टेस्ट करके इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है. हरलेक्विन से पीडि़त बच्चों की त्वचा ठीक से बन नहीं पाती. स्किन की कई लेयर हो जाती है. यानि स्किन ठीक से नहीं बनती और उस पर लेयर पर लेयर चढ़ती जाती है. आमतौर पर पुरानी स्किन डेड होने के बाद नई अपनेआप आ जाती है जबकि हरलेक्विन बेबी की स्किन जमती जाती है और छूटती नहीं.
माइक्रोसिफेली बीमारी-
यूके साउथेम्प्टन के डॉ. मुमताज नय्यर के मुताबिक, इस तरह की बीमारी को माइक्रोसिफेली (Microcephaly) के नाम से जाना जाता है जिसमें गर्भ में पल रहे भ्रूण के सिर का ठीक से विकास नहीं हो पाता. माइक्रोसिफेली बीमारी आमतौर पर फोलिक एसिड (एक विटामिन) की कमी के कारण होती है. यदि प्रेग्नेंफसी के दरान महिलाएं फोलिक एसिड सप्लीमेंट्स का सेवन नहीं करती तो भ्रूण का विकास पूरी तरह से नहीं हो पाता. नतीजन, बच्चा असामान्य लगने लगता है.
इस बीमारी से बचने के उपाय-
डॉ. नय्यर आगे कहते हैं कि अगर आपके फ्रेंड्स, फैमिली या रिलेटिव्स में कोई भी प्रेग्नेंट महिला है तो उन्हें डॉक्टर की सलाह पर फोलिक एसिड सप्लीमेंट्स लेने के लिए कहें. ये हेल्थ सप्लिमेंट हॉस्पिटल्स में फ्री में भी मौजूद होते हैं. इससे बच्चे की असामान्य स्थिति को रोका जा सकता है.
अल्ट्रासाउंड भी है जरूरी-
इसके अलावा सिर्फ एक अल्ट्रासाउंड ही प्रेग्नेंसी के दौरान काफी नहीं है बल्कि ऐसी स्थिति से बचने के लिए अच्छे रेडियोलॉजिस्ट से भ्रूण की ग्रोथ और डवलपमेंट को चैक करने के लिए हर तीसरे महीने अल्ट्रासाउंड करवाएं. जरूरत पड़े तो बार-बार डॉक्टर की सलाह पर अल्ट्रासाउंड करवाएं.
Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )
हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें ABP News पर। सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट एबीपी न्यूज़ लाइव पर पढ़ें बॉलीवुड, लाइफस्टाइल, लाइफस्टाइल और खेल जगत, से जुड़ी ख़बरें
और देखें
Advertisement
ट्रेंडिंग न्यूज
Advertisement
Advertisement
टॉप हेडलाइंस
इंडिया
दिल्ली NCR
आईपीएल
Blog
Advertisement


रुमान हाशमी, वरिष्ठ पत्रकार
Opinion