How To Do Flossing: अगर आपके दांतो से ब्लीडिंग होती है, मसूड़ों में सूजन रहती है या और कोई दांतों से संबंधित परेशानी है तो फ्लॉसिंग की आदत जरूर डालें. डॉक्टर ने अगर फ्लॉसिंग की सलाह दी है तो इसे नजरअंदाज ना करें. रेगुलर फ्लॉसिंग से मुंह की स्मैल और दांतों की गंदगी दोनों क्लीन होती है.


क्या है फ्लॉसिंग?
फ्लॉस एक काफी पतला सिथेंटिक धागा होता है जिसे दांतों से बीच में घुमाते हैं उससे दांतों के बीच फंसी गंदगी, खाना सब क्लीन हो जाता है और दांतों से रिलेटेड प्रॉब्लम से काफी आराम मिलता है. सही तरीके से फ्लॉसिंग करने के लिये धागे को उंगली से पकड़कर जेंटली दांतों के बीच में घुमायें और फिर अच्छी तरह कुल्ला कर दें. 


फ्लॉसिंग का फायदा
फ्लॉसिंग करने से दांतों के बीच जो खाना फंसता है वो क्लीन हो जाता है. खाना फंसने से वहां गंदगी जमा हो जाती है और बैक्टीरिया पैदा होते हैं. यही  बैक्टीरिया मुंह की स्मैल, मसूड़ों से ब्लीडिंग और बाकी परेशानियों की वजह बनता है. एक टाइम फ्लॉसिंग रेगुलर करने से दांतों में प्लेक जमा नहीं होता .प्लेक एक पीले रंग की परत सी होती है जिससे दांतों में सड़न पैदा हो जाती है. 


फ्लॉसिंग से नहीं बनता गैप
फ्लॉसिंग के बारे में एक सबसे कॉमन मिथ है कि इससे दांतों के बीच में जगह बन जाती है जोकि बिल्कुल गलत है. बस आप अच्छी क्वालिटी और ब्रांड का फ्लॉस खरीदें और आराम से फ्लॉस करें. फ्लॉसिंग से गैप नहीं बनता बल्कि दांतों की अच्छी सफाई होती है.


Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों की एबीपी न्यूज़ पुष्टि नहीं करता है. इनको केवल सुझाव के रूप में लें. इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.


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