Safalta Ki Kunji: चाणक्य की चाणक्य नीति कहती है कि धन का संचय व्यक्ति को मुसीबतों से बचाता है. जो व्यक्ति धन का संचय नहीं करते हैं और बेमतलब धन को खर्च करते हैं वे मुसीबत के समय दुखी और परेशान होते हैं.


मानव जीवन की तीन मुख्य बातों को समझने की जरूरत है. जिसमें तन, मन और धन को शामिल किया गया है. तन से अर्थ है सेहत. स्वस्थ्य शरीर को पूंजी के समान माना गया है. वहीं किसी भी कार्य करने के लिए सबसे जरूरी चीज है मन, यदि मन नहीं तो कोई भी कार्य न करें, उसमें सुख और सफलता नहीं मिलती है. तीसरी चीजे हैं धन. धन के बिना किसी भी प्रकार के सुखों की बात करना बेमानी लगती है. भौतिक युग में धन को विशेष महत्व प्राप्त है. धन व्यक्ति के खराब समय में सच्चे मित्र की भूमिका निभाता है. इसलिए धन की उपयोगिता को समझना बहुत ही जरूरी है.


गीता के उपदेश में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन के माध्यम से मानव जाति को जीवन जीने की कला को बताते हैं. गीता के वचन व्यक्ति को मोक्ष का मार्ग दिखाते हैं.
आज के दौर में जीवन जीने के लिए जिन महत्वपूर्ण चीजों की जरूरत पड़ती है, उसमे एक धन भी है. लेकिन कई लोग धन का सही उपयोग नहीं कर पाते हैं, जिस कारण धन उनके लिए चुनौती और परेशानी का कारण बन जाता है.


ध्यान रहे गलत ढंग से प्राप्त किया गया धन, कई प्रकार के रोग, अवगुण और शत्रुता भी लाता है. इसलिए धन के मामले में इन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
चाणक्य के अनुसान धन बुरे वक्त में व्यक्ति का सबसे अच्छा मित्र है. जब व्यक्ति का बुरा समय आता है तो सगे संबंधी भी साथ छोड़ देते हैं तब धन ही व्यक्ति की मदद करता है, और समझदार व्यक्ति पुन: अपनी स्थिति को प्राप्त करता है. धन का उपयोग बहुत सोच समझकर करना चाहिए. धन का संचय करना चाहिए. जो लोग धन की बचत नहीं करते हैं, वे जरूरत आने पर संकटों से घिर जाते हैं. धन का सम्मान करो, मानव हित के कार्यों में धन का प्रयोग करना चाहिए. ऐसा करने वाले व्यक्ति ही सम्मान प्राप्त करते हैं.


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