ज्येष्ठ मास में इन चीजों का दान करने से ग्रहों की अशुभता होती है दूर
गर्मी अपने पूरे तेवर दिखा रही है. ज्येष्ठ मास को गर्मी का महीना कहा जाता है. इस माह में दान का विशेष महत्व बताया गया है. गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी व्रत ज्येष्ठ मास में ही पड़ रहे हैं.
हर दिन तापमान बढ़ता जा रहा है. मौसम विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले कुछ दिनों में गर्मी अधिक रहेगी. गर्मी में इंसान ही नहीं जीव-जंतु और पशु-पक्षी भी व्याकुल हो जाते हैं. ज्येष्ठ मास को गर्मी का महीना कहा जाता है. इस मास में सूरज की गति तेज हो जाती है. ज्येष्ठ मास में दिन बड़ा और रात छोटी होती है. इस महीने जल का संकट भी गहराने लगता है. नदियों में पानी कम हो जाता है, जल स्तर नीचे गिरने लगता है.
पौराणिक कथाओं और ज्योतिष शास्त्र में ज्येष्ठ मास में कुछ विशेष चीजों का दान श्रेष्ठ फलदायी माना गया है. मान्यता है कि यदि इन चीजों का दान किया जाता है तो ग्रहों की अशुभता दूर होती है और जीवन में सुख समृद्धि आती है. राहू-केतु और शनि के दोष दूर होते है.
घड़े का दान: ज्येष्ठ मास में घड़ा यानि मिट्टी के कलश के दान को शुभ माना गया है. ज्येष्ठ मास में जल से भरे घड़ों का दान करना चाहिए. इससे जीवन में धन की कमी दूर होती है और आने वाली बाधाएं दूर होती हैं.
पंखा का दान: गर्मी के दिनों में पंखे का दान भी विशेष फल प्रदान करने वाला माना गया है.
प्याऊ लगाना: ज्येष्ठ मास में प्याऊ लगाकर लोगों को प्यास बुझाना भी एक श्रेष्ठ दान माना गया है. प्याऊ स्थापित करने मानसिक शांति मिलती है. जीवन में तनाव कम होता है.
ज्येष्ठ मास में निर्जला एकादशी व्रत सभी व्रतों में एकादशी का व्रत श्रेष्ठ माना गया है. निर्जला एकादशी का व्रत इसमें भी सबसे उत्तम व्रत कहा गया है. यह व्रत जल ग्रहण किए बिना ही पूर्ण करना होता है. ये व्रत जीवन में जल के महत्व को बतलाता है. इसलिए इस व्रत को सबसे उत्तम व्रतों में से एक माना गया है. इस व्रत को रखने भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है.