Premanand Ji Maharaj Anmol Vachan: प्रेमानंद जी महाराज एक महान संत और विचारक हैं जो जीवन का सच्चा अर्थ समझाते और बताते हैं. प्रेमानंद जी के अनमोल विचार जीवन को सुधारने और संतुलन बनाएं रखने में मार्गदर्शन करते हैं.
प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि अगर परिवार का ही कोई सदस्य छल कपट करें और उसके वजह से रिश्ते खराब हो रहे हो तो क्या करें. प्रेमानंद महाराज जी का मानना है कि हर संबंध का अपना अधिकार होता है. शादी के बाद महिला को अपने पति के अनुकूल रहना चाहिए. अन्य रिश्ते अगर आपे विरुद्ध हैं तो उनका त्याग कर देना चाहिए.
अगर हमारे परिवारिक संबंधों में अगर किसी संबंध से या रिश्ते से छलकपट हो रहा है तो हमे उस रिश्ते का त्याग कर देना चाहिए. पति के अनुकूल परिस्थिति में हमे उनको अनुकूलता देनी चाहिए और प्रतिकूल स्थिति में धैर्य पूर्वक खड़े रहना चाहिए.
भाई, पिता, माता अगर हमारे पति के अनुकूल है तब तक ठीक है और अगर माता-पिता, भाई अगर आपका सहयोग देते है पति व्रत धर्म में तो ठीक है तो बात मानें अगर कोई प्रतिकूल स्थिति पैदा कर रहा हो तो उसका त्याग कर दें.
एक ही है आपके लिए कर्तव्य पति. अपने पति को भगवान समझकर जीवन व्यतीत करों. अगर पति और आपके बीच कोई स्थिति को खराब कर रहा हो तो उसका त्याग कर देना चाहिए. आप अपने मयाके में अपना अधिकार नहीं चला सकते हैं. पति की अनुमति आपके लिए सब कुछ है. आपका प्रधान लक्ष्य है पति. पति व्रत धर्म से युक्त होकर पति भगवान मनाने वाली स्त्री सब लोक-परलोक संभाल लेगी.
इसीलिए अपने पति की इच्छा का विरोध कभी ना करें. ये पति की उदारता है कि वो आपके परिवार के लिए कार्य करता है और आपके परिवार को अपना समझता है.
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