पढ़ें, भगवान राम के जन्म की कथा, बालकांड में तुलसीदास ने किया है खूबसूरत वर्णन
Ram Navami: इस दिन नवरात्रि की नवमी तिथि भी है. इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. भगवान राम ने मां दुर्गा की पूजा की थी. पूजा से प्रसन्न होकर ही मां ने भगवान राम को विजयी होने का आर्शीवाद दिया था. आइए जानते है इनके जन्म की कथा के बारे में.

राम नवमी के शुभ दिन ही भगवान राम का जन्म हुआ था. महाकवि तुलसीदास ने इसी दिन महाग्रंथ राम चरित मानस की रचना प्रारंभ की. राम नवमी के दिन को भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में पूरे भारत में बड़ी ही श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाते हैं. इस दिन लोग घरों में प्रभु राम की व्रत रखते हैं, पूजा करते हैं और उपवास रखते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से भगवान राम अपने भक्तों को अपनी कृपा से तार देते हैं.
भगवान राम बेहद दयालु और विन्रम हैं. वे अपने भक्तों की पुकार पर दौड़े चले आते हैं. भगवान राम को मर्यादा पुरषोत्तम भी कहा जाता है. भगवान राम के जन्म कैसे हुआ इस पर श्री राम चरित मानस के बालकांड में तुलसीदास ने बड़े ही रोचक ढंग से वर्णन किया है.
राम की जन्म कथाभए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी. हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी. लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुजचारी. भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभासिंधु खरारी.
अर्थ: दीनों पर दया करने वाले, कौसल्याजी के हितकारी कृपालु प्रभु प्रकट हुए. यानि भगवान राम ने जन्म लिया है. मुनियों के मन को हरने वाले उनके अद्भुत रूप का विचार करके माता हर्ष से भर गई. नेत्रों को आनंद देने वाला मेघ के समान श्याम शरीर था, चारों भुजाओं में अपने शस्त्र थे, आभूषण और वनमाला पहने थे, भगवान राम के बड़े-बड़े नेत्र थे. इस प्रकार शोभा के समुद्र और खर राक्षस को मारने वाले भगवान प्रकट हुए.
इसके बाद तुलसीदास लिखते हैं-
कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता. माया गुन ग्यानातीत अमाना बेद पुरान भनंता. करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता. सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रगट श्रीकंता.
अर्थ: दोनों हाथ जोड़कर माता कहने लगीं, हे अनंत! मैं किस प्रकार तुम्हारी स्तुति करूं. वेद और पुराण तुम को माया बताते हैं, आप गुण और ज्ञान से बहुत ऊपर हैं. श्रुतियां और संतजन दया और सुख का समुद्र, सब गुणों का धाम कहकर जिनका गान करते हैं, वही भक्तों पर प्रेम करने वाले लक्ष्मीपति भगवान मेरे कल्याण के लिए प्रकट हुए हैं.राम नवमी के दिन जन्में थे भगवान राम, जानें इस दिन का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और आरती
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