शनि अमावस्या कब है? इस दिन होने जा रही है साल की अंतिम सबसे बड़ी खगोलीय घटना, इन 5 राशियों को रहना होगा सावधान
Shani Dev: शनि अमावस्या (Shani Amavasya December 2021) को विशेष महत्व प्राप्त है. शनि अमावस्या कब है? आइए जानते हैं
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Shani Amavasya December 2021: शनि देव की पूजा के लिए 4 दिसंबर 2021 शनिवार का दिन बहुत ही उत्तम है. इस दिन मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है. इस अमावस्या की तिथि को शनि अमावस्या या शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जाता है. इस अमावस्या की तिथि को एक बड़ी खगोलीय घटना भी घटित होने जा रही है.
सूर्य ग्रहण 2021 (solar eclipse)
4 दिसंबर 2021, शनिवार के दिन सूर्य ग्रहण भी लग रहा है. जो वर्ष 2021 का आखिरी सूर्य ग्रहण है. इस सूर्य ग्रहण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. मान्यता है कि जब ग्रहण लगता है तो इसका प्रभाव मेष से लेकर मीन राशि तक के लोगों पर पड़ता है.
शनि देव के पिता हैं 'सूर्य'
शनि अमावस्या की तिथि शनि देव को समर्पित है. इस दिन सूर्य ग्रहण भी लग रहा है. शास्त्रों के अनुसार सूर्य और शनि में पिता और पुत्र का संबंध है.
शनि की साढ़ेसाती और शनि की ढैया (shani ki sade sati, shani ki dhaiya)
शनि की दृष्टि और दशा को शुभ नहीं माना गया है. कुंडली में शनि यदि अशुभ हों तो शनि अपनी दशा में कष्ट प्रदान करते हैं. शनि की साढ़ेसाती और ढैया को इसीलिए कष्टकारी कहा गया है. वर्तमान समय में मिथुन राशि, तुला राशि, धनु राशि, मकर राशि और कुंभ राशि पर शनि की विशेष दृष्टि है. मिथुन और तुला राशि पर शनि की ढैय्या और धनु, मकर और कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है.
शनि देव का फल (Mahima Shani Dev Ki)
ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्याय को देवता भी कहा गया है. इसके साथ ही इन्हे कर्मफलदाता और दंडाधिकारी भी बताया गया है. इसके साथ ही शनि को मेहनत यानि परिश्रम का कारक भी माना गया है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार शनि एक राशि में लगभग ढाई वर्ष तक रहते हैं, शनि की चाल बहुत ही धीमी बताई गई है. यही कारण है कि शनि देव एक राशि से दूसरी राशि में जाने पर लगभग ढाई साल का समय लेते हैं. शनि की अशुभता से बचने के लिए शनिवार को शनि देव से जुड़ी चीजों का दान करना चाहिए. शनि मंदिर में पूजा करनी चाहिए और सरसों का तेल चढ़ाना चाहिए. इसके साथ ही शनि चालीसा का पाठ करना चाहिए.
शनि अमावस्या शुभ मुहूर्त ( Shani Amavasya shubh muhurat )
पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का प्रारंभ 03 दिसंबर को शाम 04 बजकर 55 मिनट से होगा.अमावस्या की तिथि का समापन दिन 04 दिसंबर 2021 को दोपहर 01 बजकर 12 मिनट पर होगा. उदया तिथि 04 दिसंबर, शनिवार को होने के कारण इसी दिन अमावस्या की पूजा की जाएगी.
इन बातों का ध्यान रखें (Shani ke Upay)
शनि अमावस्या पर शनि चालीसा और शनि मंत्र के साथ शनि आरती का पाठ करना शुभ फलदायी माना गया है.
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