Bhanu Saptami 2024: हिन्दू धर्म में पूरे साल कई सारे व्रत और त्योहार आते हैं. वहीं सालभर में जिस दिन सप्तमी तिथि पर रविवार पड़ता है उसे भानु के नाम से जाना जाता है. फिलहाल अगहन यानि कि मार्गशीर्ष माह चल रहा है और इस महीने की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि आज यानि 08 दिसंबर को पड़ रही है. इसी दिन भानु सप्तमी का पर्व मनाया जाएगा. ऐसा कहा जाता है कि, जो भी व्यक्ति इस दिन व्रत रखने के साथ ही भगवान सूर्य की विधि विधान से पूजा करता है उसे सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिल जाती है. साथ ही कई प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है.
भानु सप्तमी को सूर्य सप्तमी, अचला सप्तमी, सूर्यरथ सप्तमी, रथ सप्तमी और आरोग्य सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है. जिन जातकों की कुंडली में सूर्य अशुभ फल दे रहा हो उनको इस दिन सूर्य भगवान की पूजा करने के बाद आदित्य हृदय स्रोत का पाठ करना चाहिए. सूर्य देव की कृपा से व्यक्ति को लंबी आयु, आरोग्य, धन-धान्य में बढ़ोत्तरी, यश-कीर्ति, विद्या, भाग्य और पुत्र, मित्र व पत्नी का सहयोग प्राप्त होता है.
सुबह उगते हुए सूर्य को प्रणाम करने या जल चढ़ाने से मन में आत्मविश्वास बढ़ता है एवं सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. सप्तमी तिथि पर सूर्य को जल चढ़ाने और पूजा करने से रोग दूर होती हैं. भविष्य पुराण में श्रीकृष्ण ने अपने पुत्र को सूर्य पूजा का महत्व बताया है. श्रीकृष्ण ने कहा है कि सूर्य ही एक प्रत्यक्ष देवता हैं. यानी ऐसे भगवान हैं जिन्हें रोज देखा जा सकता है. पुराणों के अनुसार इस सप्तमी को जो भी सूर्य देव की उपासना तथा व्रत करते है,उनके सभी रोग ठीक हो जाते हैं. श्रद्धा के साथ सूर्य पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं एवं इनकी पूजा से दिव्य ज्ञान की प्राप्ति होती है. शास्त्र के अनुसार सूर्य के कमजोर होने के कारण व्यक्ति को नेत्र रोग,अस्थि रोग और त्वचा रोग आदि होते हैं.उसका आत्मबल कमजोर रहता है तथा पिता से सम्बन्ध भी ठीक नहीं रहते अतः ऐसे व्यक्ति के लिए सूर्योपासना करना विशेष लाभकारी होता है.नेत्र रोग से मुक्ति के लिए नित्य प्रति चाक्षुषोपनिषद का पाठ करना चाहिए.
भानु सप्तमी तिथि
नीतिका शर्मा ने बताया कि पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि की शुरुआत 07 दिसंबर को रात 11:05 मिनट से होगी. वहीं, इसका समापन 08 दिसंबर को सुबह 9:44 मिनट पर होगा. ऐसे में भानु सप्तमी 08 दिसंबर को मनाई जाएगी.
सूर्य देव की उपासना
रथ सप्तमी (Ratha Saptami) या भानु सप्तमी के दिन भगवान सूर्य की उपासना की जाती है. पौराणिक मान्यता है कि भानु सप्तमी तिथि पर सूर्य देव की उपासना करने से व्यक्ति को जीवन में यदि कोई मानसिक और शारीरिक कष्ट है तो उससे मुक्ति मिलती है. इसके अलावा जिन जातकों की लग्न कुंडली में सूर्य कमजोर होता है तो भानु सप्तमी व्रत करने से कुंडली में सूर्य मजबूत होता है.
धार्मिक महत्व
रथ सप्तमी को सूर्य सप्तमी, अचला सप्तमी, सूर्यरथ सप्तमी, भानु सप्तमी और आरोग्य सप्तमी भी कहते हैं. इस व्रत को करने से कुंडली में जब सूर्य मजबूत होता है तो करियर और कारोबार में मन मुताबिक सफलता मिलती है. साथ ही आय, आयु, सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है. मनचाही नौकरी भी प्राप्त होती है.
सूर्य चालीसा का भी करें पाठ
पंचोपचार करने के बाद सूर्य देव की पूजा फल, फूल, धूप-दीप, अक्षत, दूर्वा आदि से करें. आखिर में सूर्य चालीसा और सूर्य कवच का पाठ करें. सूर्य देव की आरती-अर्चना के बाद पूजा का समापन करें और गरीब व जरूरतमंदों को दान दें.
भानु सप्तमी पर पूजा
9 जुलाई को ब्रह्म मुहूर्त में जागने के बाद स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें. सूर्योदय के साथ ही सूर्य देव को प्रणाम कर व्रत का संकल्प लें. बहती जलधारा में काले तिल प्रवाहित करें. जल में चावल, काले तिल, रोली और दूर्वा मिलाकर सूर्य देव को जल का अर्घ्य दें. सूर्य देव की पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करें
एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते. अनुकम्पय मां देवी गृहाणार्घ्यं दिवाकर..
ॐ भूर्भुवः स्वःतत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
दान करें
सूर्य से संबंधित चीजें जैसे तांबे का बर्तन, पीले या लाल कपड़े, गेहूं, गुड़, लाल चंदन का दान करें. श्रद्धानुसार इनमें से किसी भी चीज का दान किया जा सकता है. इस दिन सूर्यदेव की पूजा के बाद एक समय फलाहार करें.
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