वियाग्रा, जिसे साइंटिफिक भाषा में सिल्डेनाफिल सिट्रेट के नाम से जाना जाता है, एक ऐसी दवा है जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ED) के इलाज में किया जाता है.जिससे यौन उत्तेजना के दौरान पुरुषों को इरेक्शन प्राप्त करने में मदद मिलती है. हाल ही में आई एक नई रिसर्च सामने आई है कि वियाग्रा, जो आमतौर पर पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन (सेक्स संबंधी समस्या) के इलाज के लिए जानी जाती है, अब अल्जाइमर रोग के खतरे को कम करने में भी मदद कर सकती है. अल्जाइमर एक ऐसी बीमारी है जो खासकर बुजुर्गों में देखी जाती है, जिसमें व्यक्ति की याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता पर असर पड़ता है. 


जानें क्या कहता है रिसर्च 
लंदन विश्वविद्यालय कॉलेज के शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन को आगे बढ़ाया और पाया कि वियाग्रा को खाने से अल्जाइमर होने की संभावना में कमी आ सकती है. यह निष्कर्ष मेडिकल जर्नल न्यूरोलॉजी में प्रकाशित हुआ है, जिसमें लगभग 270,000 पुरुषों के मेडिकल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया. ये सभी पुरुष इरेक्टाइल डिसफंक्शन से पीड़ित थे लेकिन उनमें से जिन्होंने वियाग्रा जैसी दवाओं का सेवन किया, उनमें अल्जाइमर के विकसित होने की संभावना 18% कम पाई गई. 


डिमेंशिया में भी मददगार 
इस अध्ययन की खास बात यह है कि यह दिखाता है कि पहले से मौजूद दवाओं को नए उद्देश्यों के लिए कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे नई दवाओं के विकास में आने वाले समय और खर्चे को कम किया जा सके. डॉ. लीह मुर्सलीन, अल्जाइमर्स रिसर्च यूके में रिसर्च की हेड, का कहना है कि ऐसी पहल से डिमेंशिया का कारण बनने वाली बीमारियों को रोकने या इलाज करने के नए रास्ते खुल सकते हैं. 


डिमेंशिया और अल्जाइमर  
डिमेंशिया एक स्थिति है जिसमें लोगों की सोचने, याद रखने और निर्णय लेने की क्षमता में कमी आती है, जिससे रोजमर्रा के काम करने में मुश्किल होती है. यह कई कारणों से हो सकता है. अल्जाइमर रोग डिमेंशिया का सबसे आम प्रकार है, जो मस्तिष्क में कोशिकाओं के धीरे-धीरे मरने की वजह से होता है. इससे व्यक्ति की याददाश्त और सोचने की क्षमता पर गहरा असर पड़ता है. अल्जाइमर धीरे-धीरे बढ़ता है और वक्त के साथ इसके लक्षण और भी बदतर होते जाते हैं. 


Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों और सुझाव पर अमल करने से पहले डॉक्टर या संबंधित एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.


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