Crazxy Review: एक फिल्म जो महज 93 मिनट की है, जिसमें स्क्रीन पर 93 मिनट तक एक ही एक्टर नजर आता है, और आप पूरे 93 मिनट पलक नहीं झपकाते, वॉशरूम नहीं जाते, फोन नहीं देखते, एंड क्रेडिट भी पूरा देखकर उठते हैं तो समझ लीजिए कि क्या कमाल का सिनेमा बना होगा, सोहम शाह को अब तक तुम्बाड से जाना जाता है लेकिन अब इस फिल्म से जाना जाएगा, इन दिनों जो मैजिक मलयालम सिनेमा की कहानियां दिखा रही हैं वैसा ही कुछ ये फिल्म दिखाती है और 93 मिनट तक आपके दिमाग की दही करके रखती है
कहानी
एक डॉक्टर को किसी को 5 करोड़ देने हैं, ये 5 करोड़ उसकी जिंदगी के लिए जरूरी हैं, इतने में उसे एक फोन आता है कि उसकी बेटी को किडनैप कर लिया गया है और किडनैपर को 5 करोड़ चाहिए, लेकिन क्या सच में बेटी किडनैप हुई है, वो बेटी जिसे ये डॉक्टर पसंद नहीं करता और जिसकी मां से इसका तलाक हो चुका है, लेकिन बाप बेटी के बीच खराब रिश्ते की वजह क्या है? अगर बेटी किडनैप हुई है तो किसने किया है? ये डॉक्टर किडनैपर तक पहुंच पाएगा और रास्ते में उन 93 मिनटों में क्या क्या होगा? ये देखने आपको थिएटर जाना पड़ेगा.
कैसी है फिल्म
ये फिल्म कमाल की है, अच्छी राइटिंग, अच्छा एक्टर, अच्छा म्यूजिक, अच्छा ट्रीटमेंट क्या कर सकता है, ये फिल्म इसकी अच्छी मिसाल है. शुरू से ही ये फिल्म आपको बांध लेती है और एंड तक आप बंधे रहते हैं. आखिरी के 20-25 मिनट तो इतने कमाल के हैं कि आप हैरान हो जाते हैं. कुछ सीन ऐसे भी आएंगे कि आपको आंखें बंद करनी पड़ सकती हैं. पूरी फिल्म में एक ही एक्टर हैं, बस लास्ट सीन में एक और एक्टर की एंट्री होती है.
फिल्म में एक के बाद एक ट्विस्ट आते हैं, और जो होने वाला होता है उसका अंदाजा आप बिल्कुल नहीं लगा पाएंगे, और एंड में ये फिल्म आपके दिमाग की दही करने के बाद आपको इमोशनल कर जाती है.
एक्टिंग
इस फिल्म में एक ही एक्टर हैं सोहम शाह, और उन्होने इतना कमाल का काम किया है कि उसे बयां नहीं किया जा सकता है.वो हर फ्रेम में छाए हुए हैं. अपनी बेटी के लिए इमोशन दिखाना हो, अपनी एक्स वाइफ से बात करना हो, किडनैपर से बात करना हो, अपनी गर्लफ्रेंड से बात करना हो, सर्जरी के लिए जूनियर डॉक्टर को बताना हो, हर एक सीन में वो कमाल कर जाते हैं. डेढ़ घंटे तक दर्शकों को बांधे रखना, बिना सिक्स पैक दिखाए, बिना शर्ट उतारे, ये अपने आप में कमाल है और ये कमाल सोहम शाह बड़े कायदे से कर गए हैं. तुम्माड के बाद ये उनका एक और कमाल का परफॉर्मेंस है. कई एक्टर्स को उनसे सीखना चाहिए कि एक्टिंग की कैसे जाती है.
डायरेक्शन
गिरीश कोहली ने फिल्म को लिखा भी है और डायरेक्ट भी किया है, वो मॉम, हिट द फर्स्ट केस और केसरी जैसी फिल्में लिख चुके हैं, यानि बाप राइटर हैं. आजकल एक डायलॉग बड़ा वायरल भी है कि राइटर बाप होता है, यहां राइटिंग कमाल है, और डायरेक्शन जबरदस्त, उन्हें पता था फिल्म में एक ही कैरेक्टर है तो उन्होंने फिल्म को छोटा रखा. बिल्ड अप उतना रखा जितना जरूरी था, और इतना तो वाकई जरूरी था. उनकी राइटिंग और डायरेक्शन से बाकी लोगों को सीखना चाहिए कि अच्छी फिल्म कैसे बनाई जा सकती है.
म्यूजिक
गुलजार साहब ने फिल्म के गाने लिखे हैं और यही वजह है कि आप क्रेडिट रोल तक पूरा देखते हैं क्योंकि उस वक्त एक बड़ा प्यार गाना चल रहा होता है. विशाल भारद्वाज के साथ कई संगीतकारों ने मिलकर फिल्म का म्यूजिक दिया है, और फिल्म का म्यूजिक कमाल का है. ऐसी फिल्म में गानों की जगह नहीं होती लेकिन गाने अगर ऐसे हों तो अपनी जगह बना लेते हैं.
कुल मिलाकर इस फिल्म को थिएटर जाकर देखिए, इसके फिर से रिलीज होने का इंतजार मत कीजिए.