Rashmi Rocket Review: ट्रैक और कोर्ट में है एक्टर्स का बढ़िया परफॉर्मेंस, तापसी और अभिषेक करते हैं इंप्रेस
Rashmi Rocket Review: यह ऐसी महिला एथलीट की कहानी है, जिसे ‘पुरुष’ बता कर ट्रैक पर दौड़ने से रोक दिया जाता है. तापसी का परफॉर्मेंस यहां शानदार है और अभिषेक बनर्जी भी एक्टिंग से दिल जीत लेते हैं.

आकर्ष खुराना
तापसी पन्नू, प्रियांशु पैन्युली, अभिषेक बनर्जी, वरुण बडोला, मंत्रा, सुप्रिया पिलगांवकर, सुप्रिया पाठक
हार-जीत परिणाम है, कोशिश हमारा काम है. इसी इरादे के साथ रश्मि रॉकेट, ट्रैक एंड फील्ड एथलेटिक्स के खिलाड़ियों की दुनिया में हुई सच्ची घटनाओं से प्रेरित कहानी हमारे सामने लाती है. फिल्म कहती है कि दुनिया में महिला एथलीटों के साथ अगर अन्याय हो रहा है तो क्या जरूरी है कि हम भी आंखें मूंद कर उसका समर्थन करते रहें. गड़बड़ी का मामला ग्लोबल है लेकिन कम से कम हम तो अपने यहां गलती सुधार सकते हैं. खेलों की दुनिया में डोपिंग (शक्तिवर्धक दवाओं का सेवन) बड़ा मुद्दा है और किसी को इससे जुड़े नियमों पर समस्या नहीं है मगर महिलाओं के मामले में जेंडर टेस्ट जरूर बहस के दायरे में हैं. पुरुष हार्मोन टेस्टेस्टोरॉन कई बार महिला एथलीटों में औसत से अधिक मात्रा में पाया जाता है और इसी को रश्मि रॉकेट मुद्दा बनाती है.
ओटीटी प्लेटफॉर्म जी-5 पर दशहरे पर रिलीज हो रही इस फिल्म की कहानी गुजरात के कच्छ में पैदा हुई, पली-बढ़ी रश्मि वीरा (तापसी पन्नू) की है. बचपन से वह दौड़ने में तेज है और लड़कों से मार-पीट करने में भी पीछे नहीं रहती. पिता उसे ‘रॉकेट’ कहते हैं लेकिन एक रेस के दौरान आए भूकंप में पिता की मौत रश्मि के पैरों में बेड़ी बन जाती है. वह दौड़ना बंद कर देती है. मगर उसके बड़े होने के बाद जिंदगी करवट लेती है और एक आर्मी ऑफिसर से मुलाकात रश्मि को फिर दौड़ने को प्रेरित करती है परंतु इस बार खिलाड़ी की तरह.
प्रदेश से लेकर देश तक और फिर अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में रश्मि मेडल जीतती है. सफलता के अगर सौ साझीदार होते हैं तो दुश्मन भी कम नहीं होते. कामयाबी के इसी मुकाम पर रश्मि नेशनल एथलेटिक्स एसोसिएशन में एक षड्यंत्र का शिकार हो जाती है. उसकी ‘रॉकेट रफ्तार’ पर संदेह करने वाले लोग अपने स्वार्थ के लिए उसका जेंडर टेस्ट करा के यह कहते हुए उसे बैन करवा देते हैं कि रश्मि के शरीर में टेस्टेस्टोरॉन तय मात्रा से कहीं अधिक है, अतः वह महिला कम और पुरुष अधिक है. रश्मि को महिला खिलाड़ियों से मुकाबला करने की इजाजत नहीं दी जा सकती. अब वह क्या करे? एसोसिएशन के धाकड़ कुर्सीबाज, कीचड़ उछालते मीडिया और जितने मुंह उतनी बातें करते लोगों से कैसे लड़ेगी? रश्मि का करिअर खत्म.
रश्मि रॉकेट महिला एथलीटों की दुनिया पर पड़ा एक बेहरम पर्दा उठाती है. अव्वल तो लड़कियों को लेकर समाज की सोच पारंपरिक रूप से संकुचित है. आज भी उनके खेलने-कूदने को बहुत अच्छी नजरों से नहीं देखा जाता. उस पर रूल बुक की आड़ में नैसर्गिक प्रतिभाओं को खत्म करने वालों का षड्यंत्र फिल्म सामने लाती है. फिल्म बताती है कि किस तरह से टेस्टेस्टोरॉन हॉर्मोन के बहाने कई महिला खिलाड़ियों का करिअर बर्बाद किया गया है. इस टेस्ट के बाद कई बार परिवार-समाज ने लड़की को स्वीकार नहीं किया और उसने आत्महत्या तक कर ली. नंदा परियासामी ने कहानी लिखी है और पटकथा अनिरुद्ध गुहा की है.
लेखक इसे सिर्फ रश्मि की कहानी नहीं रहने देते. बात अदालत तक पहुंचती है और फिल्म तर्क करती है कि ओलंपिक में सबसे ज्यादा 28 गोल्ड मेडल जीतने वाले अमेरिकी विश्व चैंपियन तैराक माइकल फेल्प्स के हाथ अगर औसत व्यक्ति के हाथों से लंबे और हथेलियां चौड़ी हैं, अगर दुनिया के सबसे तेज धावक उसैन बोल्ट के पैरों में एक अतिरिक्त मांस-पेशी है जो रफ्तार साधने में उनकी मदद करती है, अगर बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग की तकनीक कमजोर होने के बावजूद नैसर्गिक रूप से उनकी आंखों-हाथों का तालमेल अच्छा है तो क्या उन्हें मैदान से बाहर कर दिया गया? यह कह कर कि प्रकृति ने उन्हें थोड़ा विशिष्ट बनाया है. फिल्म कहती है कि टेस्टेस्टोरॉन का महिला एथलीटों के अच्छे प्रदर्शन से कोई सीधा संबंध नहीं है. बल्कि वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि ऐसी महिलाओं को अनेक निजी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
रश्मि रॉकेट साधारण स्पोर्ट्स फिल्म लगने के बावजूद, पर्याप्त शोध के साथ लिखी गई है. खास तौर पर इसका अदालती पक्ष बेहतरीन है और वह इसे गति प्रदान करता है. एथलीट के रूप में तापसी पन्नू का परफॉर्मेंस बढ़िया है और उन्होंने खूब मेहनत से अपने आप को उस रूप में ढाला है. उनकी मांसपेशियां और तैयारी स्क्रीन पर चमकती हैं. लेकिन इस बात में संदेह नहीं कि अदालत में वकील बन कर उनके लिए लड़ने वाले इशित मेहता (अभिषेक बनर्जी) की एंट्री के बाद कहानी में नया रोमांच पैदा होता है. अदालत का पूरा ट्रैक फिल्म को कामयाब बनाता है. अभिषेक अभी तक के सबसे अच्छे रोल में हैं.
तापसी और अभिषेक सिक्के के दो पहलू बन कर फिल्म में खनक पैदा करते हैं. गगन ठाकुर, वरुण बडोला, मंत्रा, सुप्रिया पिलगांवकर और सुप्रिया पाठक ने अपनी भूमिकाओं को बखूबी निभाया है. रश्मि रॉकेट अनछुए विषय पर बनी लीक से अलग फिल्म है लेकिन इस पर बॉलीवुड की गहरी छाप है. कारवां (2018) जैसी बॉलीवुड छाप से मुक्त बेहतरीन फिल्म बनाने वाले निर्देशक आकर्ष खुराना रश्मि रॉकेट में वह साहस नहीं दिखा पाए. बावजूद इसके खेलों पर फिल्में पसंद करने वालों और तापसी पन्नू के फैन्स को रश्मि रॉकेट पसंद आएगी.
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