नई दिल्ली: कोरोना वायरस जिस तेजी से देशभर में फैल रहा है उसी तरह से अर्द्धसैनिक बलों में मामले लगातार सामने आ रहे हैं. राजधानी दिल्ली में अर्द्धसैनिक बलों की दो बटालियन ऐसी हैं जिनमें कोविड-19 संक्रमण के केस लगातार बढ़ते जा रहे हैं. एक है सीआरपीएफ की बटालियन जिसमें अबतक 135 जवान संक्रमित पाए जा चुके हैं. दूसरी है बीएसएफ की बटालियन जिसमें 31 जवान कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं.


सबसे पहले बात करेंगे सीआरपीएफ की पूर्वी दिल्ली स्थित मयूर विहार की 31वीं बटालियन की. ये वही बटालियन है जिसके सब-इंस्पेक्टर, मोहम्मद इकराम हुसैन कि कुछ दिन पहले ही कोरोना वायरस से जंग लड़ते हुए सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी. एसआई इकराम हुसैन की मौत के बाद उनके संपर्क में आए जवानों का कोविड-19 टेस्ट कराया गया. अबतक उनके 135 साथी जवान कोरोना पॉजिटिव पाए जा चुके हैं. इतनी बड़ी तादाद में कोविड-19 मामले सामने आने के बाद सीआरपीएफ ने अपने इस कैंप को पूरी तरह से सील कर दिया है.


अधिकारी पता लगा रहे हैं कि बटालियन में कैसे फैला कोरोना


सीआरपीएफ के आला-अधिकारी ये पता करने में जुटे हैं कि आखिर इस बटालियन में कोरोना वायरस कैसे फैल गया. जो जानकारी अभी तक मिल पाई है उसके मुताबिक, लॉकडाउन शुरू होने के कुछ दिन बाद इस बटालियन का एक जवान (नर्सिंग-अस्सिटेंट) नोएडा से यहां पहुंचा था. ये जवान कश्मीर के कुपवाड़ा में तैनात था और नोएडा अपने घर छुट्टी पर आया हुआ था. लेकिन लॉकडाउन के कारण उसे घर पर ही रूकना पड़ा. लेकिन बाद में सीआरपीएफ ने छुट्टी पर गए अपने सभी जवानों को निर्देश दिया कि वे निकटतम बटालियन में रिपोर्ट करें. यही वजह है कि ये जवान भी नोएडा से सबसे करीब दिल्ली के मयूर विहार स्थित 31वीं बटालियन के कैंप में पहुंच गया.


जानकारी के मुताबिक, 31वीं बटालियन में सबसे पहले नोएडा से आया ये जवान ही कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया. इसके बाद 55 साल के सब-इंस्पेक्टर इकराम हुसैन पॉजिटिव पाए गए. लेकिन एक हफ्ते के इलाज के बाद ही इकराम हुसैन का सफदरजंग अस्पताल में इंतकाल हो गया. इसके बाद तो सीआरपीएफ के इस कैंप में एक के बाद एक 135 जवान कोरोना वायरस की चपेट में आ गए.


सीआरपीएफ मुख्यालय के एक बड़े अधिकारी ने एबीपी न्यूज़ को बताया कि ये पता लगा पाना मुश्किल हो रहा है कि क्या वाकई नोएडा से लौटा जवान ही कोरोना को लेकर बटालियन हेडक्वार्टर पहुंचा है. क्योंकि उसके परिवार का कोई दूसरा सदस्य पॉजिटिव नहीं पाया गया है. अधिकारी के मुताबिक, इस बटालियन की तीन कंपनियां राजधानी दिल्ली में लॉकडाउन ड्यूटी में तैनात हैं. हो सकता है कि लॉ एंड ऑर्डर ड्यूटी में तैनात जवान कोरोना वायरस को कैंप तक ले आएं हो.


इस घटना से सीआरपीएफ सकते में है. रविवार को सीजीओ कॉम्पलेक्स स्थित सीआरपीएफ मुख्यालय को भी बंद करना पड़ गया. क्योंकि यहां तैनात एक बड़े अधिकारी का ड्राइवर कोरोना पॉजिटिव पाया गया है. सीआरपीएफ के मुताबिक, जबतक पूरे मुख्यालय की बिल्डिंग को सैनिटाइज नहीं कर दिया जाता, फोर्स हेडक्वार्टर बंद रहेगा.


बीएसएफ के जवान भी संक्रमित


सीआरपीएफ के मयूर विहार बटालियन की तरह ही बीएसएफ की भी एक ही बटालियन में अबतक 31 जवान कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. ये सभी जवान 126वीं बटालियन के हैं और पुरानी दिल्ली के जामा मस्जिद और चांदनी महल इलाके में लॉ एंड ऑर्डर कायम रखने की ड्यूटी में तैनात रहते हैं. इस बटालियन के 80 जवानों का अबतक टेस्ट हो चुका है जिसमें से 31 पॉजिटिव पाए गए हैं. पांच जवानों की रिपोर्ट आनी बाकी है. बीएसएफ में अबतक देशभर में कुल 54 पॉजिटिव मामले सामने आ चुके हैं. इनमें से 12 अकेले त्रिपुरा राज्य में तैनात जवानों के हैं.


इन दोनों घटनाओं ने केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. क्योंकि सीआरपीएफ और बीएसएफ जैसे पैरा-मिलिट्री फोर्स देशभर में लॉकडाउन की ड्यूटी करने के लिए राज्य-पुलिस के साथ तैनात हैं. लेकिन क्योंकि ये फोर्स बटालियन और कंपनी स्तर पर तैनात रहती हैं. ऐसे में इनके जवान एक साथ बैरक में रहते हैं जहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना बेहद मुश्किल हो जाता है.


कई बार शहरों में इन सुरक्षाबलों को स्थानीय प्रशासन पर अपने लॉजिस्टिक और रहन-सहन के लिए निर्भर रहना पड़ता है. ऐसी ही एक फोटो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है जिसमें एक हॉल में जवान जमीन पर नीचे बिस्तर लगाकर सोते हुए दिखाई पड़ रहे हैं. सोशल-डिस्टेंसिंग का कोई ध्यान नहीं रखा जा रहा है. हालांकि, अभी तक ये साफ नहीं हुआ है कि ये फोटो लॉकडाउन के दौरान की है या फिर कोरोना वायरस महामारी फैलने से पहले की है.


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