नई दिल्ली: क्या आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस आगामी लोकसभा चुनाव (2019 Lok Sabha Election) में साथ लड़ेगी? शीला दीक्षित को दिल्ली कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद यह सवाल एक बार फिर सियासी गलियारों में तैरने लगा हैं. दरअसल, हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले अजय माकन गठबंधन के विरोध में थे और खबर है कि इसी वजह से माकन ने इस्तीफा दे दिया. वहीं शीला दीक्षित से जब भी गठबंधन को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कभी भी इससे इनकार नहीं किया.
हालांकि कल जब उनसे आप से गठबंधन को लेकर सवाल किया गया तो शीला दीक्षित ने कुछ भी बोलने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि अभी इसपर हमारी कोई राय नहीं है जो मैं आपसे साझा करूं. इससे पहले शीला दीक्षित ने कहा था कि जो भी हाईकमान फैसला लेगा, हमें स्वीकार है. शीला दीक्षित 1984 से 1989 तक कन्नौज से सांसद रह चुकी हैं. वह 1998 से 2013 तक (लगातार 15 साल) तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं.
वहीं कांग्रेस महासचिव और दिल्ली कांग्रेस के प्रभारी पीसी चाको ने शीक्षा दीक्षित के नाम की घोषणा करते वक्त कहा कि गठबंधन को लेकर अभी ऐसी कोई बातचीत नहीं चल रही है. हम आगामी चुनाव खुद के दम पर लड़ने के लिए तैयार हैं. इससे पहले चाको ने कहा था कि आप से गठबंधन को लेकर एके एंटनी की कमेटी फैसला लेगी.
आप से गठबंधन की अटकलों पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल को यह साफ करना चाहिए कि आम आदमी पार्टी की कांग्रेस से दोस्ती है या दुश्मनी. उन्होंने आगे कहा कि अरविंद केजरीवाल ने राजनीति में आने से पहले शीला दीक्षित पर बड़े-बड़े आरोप लगाए थे और चार्जशीट तैयार की थी. मगर शीला चुनाव हार गईं और केजरीवाल ने भी उनके खिलाफ कोई ऐक्शन नहीं लिया.
बीजेपी नेता विजेंदर गुप्ता ने दावा किया कि कांग्रेस से गठबंधन का विरोध करते हुए पिछले दिनों एचएस फुल्का ने इस्तीफा दे दिया था. कांग्रेस और आप के गठबंधन की पक रही खिचड़ी की वजह से ही अजय माकन ने पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था.
क्या बोली आप?
आम आदमी पार्टी (आप) ने पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की कमान एक बार फिर सौंपे जाने को कांग्रेस में नेतृत्व के संकट का सबूत बताया है. दीक्षित को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाये जाने की गुरुवार को घोषणा किये जाने के बाद आप की ओर से जारी बयान में इसे कांग्रेस का आंतरिक मामला बताया गया. पार्टी ने आगे कहा कि दीक्षित की वापसी का मतलब साफ है कि दिल्ली कांग्रेस में नेतृत्व का गंभीर संकट है.
कभी आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल को कांग्रेस का धुर-विरोधी माना जाता था. 2013 से पहले और बाद में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस के खिलाफ कई आंदोलनों का नेतृत्व किया और यहीं से राजनीतिक करियर की शुरुआत की. 2013 विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी कांग्रेस को हराकर पहली बार दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. बीजेपी को 31, आप को 28 और कांग्रेस को आठ सीटें मिली. यानि 70 सीटों वाली दिल्ली विधानसभा में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिली. कांग्रेस ने बाहर से समर्थन दिया और केजरीवाल पहली बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने.
शीला दीक्षित बनीं दिल्ली कांग्रेस की अध्यक्ष, अजय माकन ने दी बधाई
47 दिनों तक सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया. जिसके बाद दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया. फिर लोकसभा चुनाव के बाद 2015 में विधानसभा चुनाव हुए. इस चुनाव में आम आदमी पार्टी ने ऐतिहासिक 67 सीटें हासिल की. कांग्रेस शून्य पर सिमट गई और बीजेपी ने मात्र तीन सीटें हासिल की. लेकिन अब राजनीतिक समीकरण बदल चुके हैं. केंद्र में बीजेपी पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में है, दिल्ली में सभी सात सीटों पर उसका कब्जा है. अब सभी विपक्षी पार्टियों के सामने बीजेपी को हराने की चुनौती है. इस चुनौती का सामना गठबंधन कर आसानी से किया जा सकता है.